संसद में पास हुआ ओबीसी आरक्षण बिल, राज्यों को मिलेगा ओबीसी लिस्ट तैयार करने का अधिकार

राज्यसभा में भी पास हुआ ओबीसी आरक्षण विधेयक, अधिकांश विपक्षी दलों ने कहा कि जब तक 50 फीसदी आरक्षण की सीमा का समाधान नहीं निकाल लिया जाता, इस बिल का कोई फायदा नहीं मिल पाएगा

Updated: Aug 11, 2021, 07:46 PM IST

संसद में पास हुआ ओबीसी आरक्षण बिल, राज्यों को मिलेगा ओबीसी लिस्ट तैयार करने का अधिकार
Photo Courtesy : The Quint

नई दिल्ली। पेगासस जासूसी कांड और कृषि कानूनों को लेकर चल रहे हंगामे के बीच राज्यसभा से ओबीसी आरक्षण बिल पास हो गया है। यह पहला मुद्दा है जिसपर राज्यसभा में विपक्ष ने केंद्र का समर्थन किया है। आज 186 सांसदों के समर्थन से ओबीसी बिल को पास कराया गया। ओबीसी विधेयक के मुद्दे पर राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों ने केंद्र को सपोर्ट करने का फैसला लिया था। जिसके बाद लोकसभा में कल ही इसे पास कराया गया था।

राज्यसभा में बुधवार को संविधान का 127वां संशोधन बिल पास हो गया। इस दौरान अधिकांश विपक्षी दलों ने कहा कि जब तक 50 फीसदी आरक्षण की सीमा का समाधान नहीं निकाल लिया जाता, इस बिल का कोई फायदा नहीं मिल पाएगा। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार ने भी कहा कि 50 फीसदी कैप पर विचार किया जाना चाहिए। राज्यसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कहा कि 50 फीसदी कैप को हटा दीजिए।

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ओबीसी आरक्षण विधेयक पहला और आखिरी मुद्दा है जिसपर केंद्र सरकार को विपक्षी दलों का भी समर्थन प्राप्त हुआ है। ओबीसी विधेयक के अलावा सभी अन्य मुद्दों पर विपक्षी दलों ने आज भी दोनों सदनों में जोरदार हंगामा किया। हंगामे को देखते पहले लोकसभा को अनिश्चितकाल तक के लिए स्थगित कर दिया गया। वहीं बिल पास होते ही राज्यसभा की कार्यवाही को भी आधे घंटे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। ऐसे में अब माना जा रहा है कि कार्य में बाधा का हवाला देकर राज्यसभा सत्र का भी अवसान कर दिया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो दो दिन पहले ही मॉनसून सत्र की समाप्ति हो जाएगी।

राज्यसभा से पास होने के बाद इस बिल को मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति कोविंद के हस्ताक्षर के बाद यह बिल कानून बन जाएगा। यह कानून बनते ही भारत के सभी राज्यों में राज्य सरकारों को ओबीसी लिस्ट तैयार करने का अधिकार होगा। ऐसे में महाराष्ट्र में मराठा समुदाय, गुजरात में पटेल समुदाय हरियाणा में जाट समुदाय और कर्नाटक में लिंगायत समुदाय को ओबीसी वर्ग में शामिल करने को लेकर लंबे समय से हो रहे मांग पर फैसला लिया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 5 मई को दिए अपने फैसले में कहा था कि ओबीसी सूची तैयार करने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास है।

यहां फंसेगा पेंच

दरअसल, साल 1992 में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि रिजर्वेशन की लिमिट 50 फीसदी की सीमा क्रॉस नहीं कर सकती। SC के मुताबिक यदि कोई सरकार 50 फीसदी की सीमा को पार करती है तो वह जूडिशल स्क्रूटनी के दायरे में होगा। अधिकतम 50% आरक्षण की सीमा को कई बार राज्‍यों ने पार करने की कोशिश की है, मगर सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी। 

राजस्‍थान सरकार ने स्‍पेशल बैकवर्ड क्‍लास को रिजर्वेशन देते समय यह सीमा पार की थी जिसे SC ने खारिज कर दिया था। इसी तरह साल 2014 में महाराष्‍ट्र से जुड़े एक मामले में भी कोर्ट सरकार के फैसले पर रोक लगा चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि केंद्र सरकार ओबीसी आरक्षण के नाम पर राज्यों को ओबीसी लिस्ट बनाने का अधिकार तो दे रही है, परंतु राज्य सरकार चाहकर भी उससे लोगों को फायदा नहीं दे सकते हैं। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण पर रोक लगा रखा है। 

राज्य सरकारें अन्य जातियों को आरक्षण देने का निर्णय लेगी भी तो आरक्षण का फीसदी पहले जितना ही सीमित रहेगा। ऐसे में स्पष्ट है कि जब तक 50 फीसदी आरक्षण के कैप को हटाने का ठोस प्रावधान नहीं बनाया जाता तब तक केंद्र के इस फैसले का कोई खास असर नहीं होगा।