सिंधु जल संधि निलंबित करना सही कदम, स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर बोलीं राष्ट्रपति मुर्मू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित करते हुए 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य दोहराया। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की सैन्य क्षमता का प्रमाण बताया और पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि निलंबित करने को राष्ट्रीय हित में निर्णायक कदम कहा।
स्वतंत्रता दिवस की 80वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है और राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक की महत्वपूर्ण भूमिका है। राष्ट्रपति ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकी नेटवर्क के खिलाफ सटीक कार्रवाई करने की भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता साबित की है। इसी अवसर पर राष्ट्रपति ने रक्षा बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों के लिए 78 वीरता पुरस्कारों को भी मंजूरी दी है।
अपने संबोधन की शुरुआत में राष्ट्रपति ने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1947 को भारत ब्रिटिश शासन की बेड़ियों से मुक्त हुआ और उसके बाद देश की नियति तय करने की जिम्मेदारी नागरिकों की रही। उन्होंने कहा कि अब देश की स्वतंत्रता के 80वें वर्ष की शुरुआत होने जा रही है और भारत तथा विदेशों में रहने वाले भारतीय इस अवसर को उत्साह के साथ मनाते हैं। उन्होंने तिरंगे को देश की स्वतंत्रता का प्रतीक बताते हुए कहा कि इसे हर भारतीय गर्व और सम्मान के साथ फहराता है।
राष्ट्रपति ने राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले अलग-अलग वर्गों का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यार्थी और शिक्षक, वैज्ञानिक और इंजीनियर, डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मी, श्रमिक और किसान सहित विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे नागरिक देश की प्रगति में भागीदार हैं। संविधान में दिए गए मूल कर्तव्यों का पालन करने वाला प्रत्येक नागरिक भी राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि देशवासियों को अपनी समृद्ध विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए आधुनिक विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने वेद वाक्य वयं राष्ट्रे जागृयाम का उल्लेख करते हुए नागरिकों से राष्ट्र के प्रति हमेशा सजग रहने का आह्वान किया। स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं को याद करते हुए राष्ट्रपति ने महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि गांधी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े। जबकि, डॉ. आंबेडकर ने सामाजिक सुधार और राष्ट्रनिष्ठा के उच्च आदर्श स्थापित किए।
राष्ट्रपति ने 14 अगस्त को मनाए जाने वाले विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा के कारण लाखों लोगों को विस्थापित होकर शरणार्थी जीवन जीना पड़ा और उन्हें विभाजन की भयावह परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद लोगों ने अपनी पहचान और आत्मसम्मान को बनाए रखा।
उन्होंने कहा कि आजादी के समय भारत के सामने केवल विभाजन के दुष्परिणामों से निपटने की चुनौती नहीं थी बल्कि 550 से अधिक रियासतों को नवस्वतंत्र भारत में शामिल करना भी बड़ी चुनौती थी। राष्ट्रपति ने इस प्रक्रिया में सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने रियासतों के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राजशाही व्यवस्थाओं को लोकतांत्रिक भारत में शामिल किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि आज सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले लोग भी विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं। इससे यह विश्वास मजबूत होता है कि मौजूदा भारत में हर व्यक्ति बड़े सपने देख सकता है और उन्हें पूरा करने की क्षमता रखता है।
उन्होंने जनप्रतिनिधियों, कार्यपालिका और न्यायपालिका की जिम्मेदारियों को भी रेखांकित किया। राष्ट्रपति के अनुसार जनप्रतिनिधियों को विधायिका में जनता की आकांक्षाओं को प्रभावी ढंग से उठाना चाहिए, जबकि कार्यपालिका का दायित्व जनहित और राष्ट्रहित की नीतियों को लागू करना है। न्याय व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आर्थिक या अन्य संसाधनों की कमी के कारण कोई व्यक्ति न्याय से वंचित न रह जाए।
राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक से कुछ अधिक समय में भारत ने तेज और समावेशी विकास किया है। उन्होंने विरासत और विकास को साथ लेकर चलने तथा विकास की राह में लंबे समय से मौजूद बाधाओं को दूर करने को महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताया।
राष्ट्रपति ने महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती के अवसर पर उनके और क्रांति ज्योति सावित्रीबाई फुले के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि दोनों ने सामाजिक न्याय, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और समानता के लिए ऐतिहासिक कार्य किया। उनके आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए वंचित वर्गों को आगे बढ़ाना पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में बेटियां प्रभावशाली प्रदर्शन कर रही हैं और महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूहों से 10 करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। वहीं, मुद्रा योजना के तहत सहायता पाने वाले उद्यमियों में करीब दो-तिहाई महिलाएं हैं।
राष्ट्रपति ने देश की युवा आबादी को भारत की महत्वपूर्ण संपदा बताया। उन्होंने कहा कि देश की कुल आबादी में 65 प्रतिशत लोगों की उम्र 35 वर्ष से कम है। उन्होंने हाल ही में करीब 28 वर्ष की औसत उम्र वाली युवा टीम के नेतृत्व में हुए सफल रॉकेट प्रक्षेपण का उदाहरण देते हुए कहा कि यह युवाओं की क्षमता और देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में आगे बढ़ते कदमों को दर्शाता है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में आतंकवाद और पाकिस्तान का भी स्पष्ट रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय सशस्त्र बलों की उस क्षमता को प्रदर्शित किया है। जिसके जरिए आतंकी नेटवर्क के खिलाफ सटीक कार्रवाई की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद को संरक्षण देने वाले देश के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित करना राष्ट्रीय हित में उठाया गया निर्णायक कदम है। राष्ट्रपति ने विशेष रूप से किसानों के हित का उल्लेख करते हुए इस फैसले को महत्वपूर्ण बताया।
राष्ट्रपति ने युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे पर कहा कि सार्वजनिक परीक्षाओं की व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार व्यापक कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि गलत तरीकों और अनियमितताओं पर रोक लगाने तथा युवाओं को अधिक पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति ने रक्षा बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों के लिए कुल 78 वीरता पुरस्कारों को मंजूरी दी। इनमें 13 पुरस्कार मरणोपरांत प्रदान किए जाएंगे।
स्वीकृत पुरस्कारों में 9 कीर्ति चक्र शामिल हैं। जिनमें 7 मरणोपरांत हैं। इसके अलावा एक शौर्य चक्र के लिए बार, 19 शौर्य चक्र जिनमें एक मरणोपरांत है, 5 सेना मेडल (वीरता) के लिए बार, 36 सेना मेडल (वीरता) जिनमें 5 मरणोपरांत हैं, 3 नौसेना मेडल (वीरता) और 5 वायु सेना मेडल (वीरता) शामिल हैं।




