CJP का CEC ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे का अल्टीमेटम, इस्तीफा नहीं दिया तो देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाने का आरोप लगाते हुए कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।

Updated: Sep 24, 2026, 05:11 PM IST

नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। इसके लिए कॉकरोच जनता पार्टी ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने गुरुवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि निर्धारित समय में इस्तीफा नहीं देने पर संगठन देशभर में आंदोलन करेगा और इसके बाद दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की घोषणा की जाएगी।

दीपके ने SIR के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया में 13 करोड़ से अधिक नाम ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से हटाए गए हैं और इससे लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ रहा है। हालांकि, यह संख्या और इससे जुड़े निष्कर्ष CJP की ओर से लगाए गए आरोप हैं। चुनाव आयोग ने SIR समेत अपने सभी अंतिम फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया है।

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CJP की यह मांग उस रिपोर्ट के बाद सामने आई है जिसमें चुनाव आयोग के भीतर SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर मतभेदों का दावा किया गया। इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट में बताया गया कि ये आपत्तियां मतदाताओं के नाम जोड़ने-हटाने, Form-6 में बदलाव, वोटर डेटाबेस के संचालन और कुछ अन्य चुनावी प्रक्रियाओं से संबंधित थी।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता डेटाबेस के दिल्ली में धीरे-धीरे केंद्रीकरण और राज्य स्तर के अधिकारियों की सिस्टम तक पहुंच से जुड़े सवाल भी उठाए थे। नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में किए गए बदलाव को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई थी। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े मामलों और गोवा में 97 पात्र मतदाताओं से संबंधित सॉफ्टवेयर समस्या का भी रिपोर्ट में उल्लेख है।

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इन दावों पर चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि तीन सदस्यीय संवैधानिक संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय, सुझाव और टिप्पणियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग के मुताबिक, SIR समेत पिछले एक साल में लिए गए सभी अंतिम निर्णय पूरी आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से हुए। आयोग ने यह भी कहा कि मतदाता पंजीकरण और नाम हटाने जैसे कार्य संबंधित वैधानिक अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में होते हैं तथा डिजिटल चुनावी प्रणालियां सुरक्षा और ऑडिट नियंत्रण के तहत संचालित की जाती हैं।

CJP ने केवल CEC के इस्तीफे की मांग तक मामला सीमित नहीं रखा है। संगठन ने तीन मांगें सामने रखी हैं। इनमें ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और उनकी भूमिका की जांच, आगामी चुनावों को रोकने तथा जनवरी 2024 की मतदाता सूची बहाल करने और SIR पर रोक लगाने की मांग शामिल है। पार्टी ने 2023 के उस कानून में बदलाव की भी मांग की है जिसे वह चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण देने वाला कानून बताती है। इन मांगों के साथ CJP ने SIR से जुड़े दस्तावेजों की न्यायिक जांच की भी मांग रखी है।

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प्रेस कॉन्फ्रेंस में दीपके ने 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद क्षेत्रीय दलों की स्थिति और उसके बाद हुए विभिन्न राज्यों के चुनावों का हवाला देते हुए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने महाराष्ट्र, दिल्ली और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में विपक्षी नेताओं और दलों से जुड़े चुनावी घटनाक्रम को SIR से जोड़कर कई आरोप लगाए। हालांकि, इन राजनीतिक दावों को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं रखा जा सकता।

CJP के राष्ट्रीय संयोजक सौरभ दास ने भी मतदाता सूची में बदलाव को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार नागरिकों के लिए राजनीतिक बदलाव का प्रमुख माध्यम है और यदि मतदाता सूची से लोगों के नाम हटते हैं तो इसका असर चुनावी भागीदारी पर पड़ेगा। वहीं, सह संयोजक आशुतोष रांका ने युवाओं से आंदोलन में शामिल होने की अपील की और दावा किया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का असर सरकारी योजनाओं के लाभ पर भी पड़ सकता है। यह दावा भी CJP की ओर से किया गया है।

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