स्वराज का मतलब सिर्फ Freedom नहीं, खुद पर राज करना है: राहुल गांधी

राहुल गांधी ने कहा कि अगर वह खुद यह मानने लगें कि वे किसी दूसरे व्यक्ति की सच्चाई जानते हैं, तो यह उनकी समझ की कमी होगी, क्योंकि उन्होंने उस व्यक्ति के अनुभवों को खुद नहीं जिया है।

Updated: Aug 20, 2026, 02:39 PM IST

नई दिल्ली। दिल्ली के जवाहर भवन में आयोजित ‘हरा-भरा स्वराज: राजीव गांधी के विजन को श्रद्धांजलि’ कार्यक्रम में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने स्वराज, आजादी और लोकतंत्र को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत में आज की वैचारिक लड़ाई इस बात को लेकर है कि क्या कुछ लोग पूरे देश के लिए सच तय करेंगे या हर व्यक्ति को अपनी बात और अपने अनुभव को समझने का अधिकार मिलेगा।

राहुल गांधी ने कहा कि कुछ लोगों ने यह मान लिया है कि उन्हें देश के हर व्यक्ति के लिए सच पता है। उन्होंने कहा कि इसी सोच के कारण छात्रों पर लगातार सवाल उठाए जाते हैं और उनकी आवाज को नजरअंदाज किया जाता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई छात्र उनके पास आता है, तो उनका मानना है कि वह छात्र अपने बारे में उनसे बेहतर जानता है। राहुल गांधी के मुताबिक, उनकी भूमिका उस छात्र की बात सुनने, उसका सम्मान करने और उसे समझने की है। उन्होंने इसे देश में चल रही मौजूदा राजनीतिक और वैचारिक लड़ाई का हिस्सा बताया।

कार्यक्रम में राहुल गांधी ने महात्मा गांधी के स्वराज के विचार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गांधी चाहते थे कि देश का हर व्यक्ति स्वराज के रास्ते पर आगे बढ़े। उनके मुताबिक, स्वराज का मूल विचार व्यक्ति को अपने फैसलों, सोच और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बनाना है। यही विचार लोकतंत्र में नागरिक की भूमिका को मजबूत करता है। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में राजीव गांधी के विजन के साथ-साथ व्यक्ति की स्वतंत्र सोच, छात्रों की आवाज और लोकतांत्रिक मूल्यों को केंद्र में रखा गया।

राहुल गांधी ने युवाओं की पसंद और उनके सपनों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर कोई इंजीनियर, रसोइया या मोची बनना चाहता है तो उसे अपनी पसंद का काम करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। इसी तरह अगर कोई अंतरिक्ष यात्री बनना चाहता है, तो देश और सरकार की जिम्मेदारी है कि उसे उस दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता मिले। उन्होंने कहा कि सरकार और देश का काम लोगों की कल्पना के दरवाजे खोलना और उन्हें अपने सपनों पर भरोसा करने का अवसर देना है। देश को लोगों को उनके चुने हुए रास्ते पर आगे बढ़ने में मदद करनी चाहिए। राहुल गांधी ने इसे महात्मा गांधी के भारत के विजन और ‘स्वराज’ की अवधारणा से जोड़ते हुए कहा कि यही स्वराज का रास्ता है।

राहुल गांधी ने कहा कि देश में इस स्थिति को बदलने की जरूरत है। उनके मुताबिक, धर्म, जाति, उम्र या लिंग चाहे कुछ भी हो, हर व्यक्ति को यह महसूस होना चाहिए कि ‘मैं यहां का हिस्सा हूं, मुझे यहां प्यार और सम्मान मिलता है और सत्य की मेरी तलाश भी महत्वपूर्ण है।’ उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब प्रत्येक नागरिक को अपनी पहचान, विचार और जीवन के रास्ते के साथ आगे बढ़ने की स्वतंत्रता मिले। राहुल गांधी ने इसे महात्मा गांधी के स्वराज के विचार से जोड़ते हुए कहा कि देश की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें हर व्यक्ति को अपनी सच्चाई तलाशने और अपने जीवन का रास्ता चुनने का अवसर मिले।

राहुल गांधी ने RSS पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि संगठन ने यह मान लिया है कि वह देश के करीब 1.5 अरब लोगों की सच्चाई जानता है। उन्होंने कहा कि असल में हर व्यक्ति ही अपने जीवन और अपनी सच्चाई को सबसे बेहतर तरीके से जान सकता है। उन्होंने कहा कि अगर वह खुद यह मानने लगें कि वे किसी दूसरे व्यक्ति की सच्चाई जानते हैं, तो यह उनकी समझ की कमी होगी, क्योंकि उन्होंने उस व्यक्ति के अनुभवों को खुद नहीं जिया है। राहुल गांधी ने BJP पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मुसलमानों, ईसाइयों और सिखों से कहा जाता है कि उनका अस्तित्व ही मायने नहीं रखता। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों को उनकी जमीन छिनने का डर है और विरोध करने पर कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। वहीं, दलितों के साथ होने वाले भेदभाव और उत्पीड़न को भी गंभीरता से नहीं लिया जाता।