कांग्रेस के सीनियर नेता पद्मश्री DY पाटिल का निधन, बिहार-बंगाल और त्रिपुरा के रह चुके हैं राज्यपाल

डी वाई पाटिल काफी लंबे समय से बीमार थे। आज मंगलवार, 4 अगस्त की सुबह कोल्हापुर के कस्बा बावड़ा स्थित घर पर उन्होंने अंतिम सांस ली।

Updated: Aug 04, 2026, 04:04 PM IST

कोल्हापुर। महाराष्ट्र के शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्र को नई पहचान देने वाले पद्मश्री डॉ. डी. वाय. पाटिल का निधन हो गया। उनके निधन से महाराष्ट्र समेत पूरे देश के शिक्षा जगत में शोक की लहर है। डॉ. पाटिल ने अपने दूरदर्शी नेतृत्व और समाजसेवा के माध्यम से उच्च शिक्षा, चिकित्सा और खेल अधोसंरचना को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

उन्होंने केवल संस्थानों की स्थापना नहीं की, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समग्र विकास की सोच को आगे बढ़ाया. देशभर में स्थापित उनके विश्वविद्यालय, अस्पताल और अन्य संस्थान आज भी लाखों छात्रों, मरीजों और युवाओं के जीवन को नई दिशा दे रहे हैं। उनके निधन को शिक्षा जगत की अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

डी वाई पाटिल काफी लंबे समय से बीमार थे। आज मंगलवार, 4 अगस्त की सुबह कोल्हापुर के कस्बा बावड़ा स्थित घर पर उन्होंने अंतिम सांस ली। पिंपरी की प्रो-वाइस चांसलर ने उनके निधन की जानकारी दी। डी वाई पाटिल को प्यार से दादा कहा जाता था। कांग्रेस के पूर्व नेता पाटिल के परिवार में उनके बेटे कांग्रेस एमएलसी सतेज पाटिल, संजय पाटिल और अजिंक्य पाटिल और बेटी नंदिता पालशेतकर हैं।

डी वाई पाटिल को प्यार से दादा कहा जाता था। कांग्रेस के पूर्व नेता पाटिल के परिवार में उनके बेटे कांग्रेस एमएलसी सतेज पाटिल, संजय पाटिल और अजिंक्य पाटिल और बेटी नंदिता पालशेतकर हैं। डी वाई पाटिल के निधन की जानकारी देते हुए पिंपरी की प्रो-वाइस चांसलर स्मिता जाधव ने कहा, 'बहुत दुख और भारी मन से मैं आपको हमारे प्रिय संस्थापक, माननीय डॉ. डी वाई पाटिल सर के निधन की सूचना दे रही हूं।

स्मिता जाधव ने आगे कहा, 'उनकी दूरदर्शी लीडरशिप, शिक्षा के प्रति अटूट समर्पण और असाधारण विरासत ने अनगिनत लोगों के जीवन और संस्थानों को संवारा है। उनका जाना पूरे डी वाई पाटिल परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है।' डी वाई पाटिल को सामाजिक क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 1991 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। डी वाई पाटिल का अंतिम संस्कार कल बुधवार, 5 अगस्त को होगा।