MP में बाघों की संदिग्ध मौतों पर हाईकोर्ट सख्त, NTCA से 10 साल के फंड का हिसाब मांगा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कान्हा समेत अन्य संरक्षित क्षेत्रों में 8 बाघों की संदिग्ध मौत पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने NTCA से पिछले 10 साल के बजट का पूरा हिसाब मांगा है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कान्हा टाइगर रिजर्व समेत प्रदेश के संरक्षित क्षेत्रों में बाघों की लगातार हो रही संदिग्ध मौतों पर गंभीर चिंता जताई है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) से पिछले 10 सालों में टाइगर रिजर्व के लिए जारी किए गए फंड का सालाना हिसाब मांगा है। कोर्ट यह भी जानना चाहता है कि राशि कितनी मिली, कहां खर्च हुई और बाघों के संरक्षण, निगरानी तथा स्वास्थ्य व्यवस्था पर इसका कितना उपयोग किया गया। मामले की अगली सुनवाई सितंबर के अंतिम सप्ताह में होगी।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि टाइगर रिजर्व को जरूरत के मुताबिक पर्याप्त बजट नहीं मिल रहा है और लंबे समय से कई महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं। याचिकाकर्ता ने बाघों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में निगरानी और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग की है।
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याचिका में अप्रैल और मई के दौरान हुई बाघों की मौतों का भी उल्लेख किया गया है। इस अवधि में आठ बाघों की मौत का दावा किया गया है। इनमें बाघिन सुनैना, बाघिन अमाही और उसके चार शावक शामिल हैं। इसके अलावा 19 मई को युवा नर बाघ महावीर की मौत हुई थी। बालाघाट और किसली क्षेत्र में दो अन्य वयस्क बाघ भी मृत पाए गए थे।
इन मौतों के पीछे कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के संक्रमण की आशंका जताई गई है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से इस संभावित संक्रमण को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश देने की मांग की है। हालांकि, मौतों के कारण को लेकर संक्रमण की आशंका को जांच के दायरे में रखा गया है।
कैनाइन डिस्टेंपर वायरस को लेकर सबसे बड़ी चिंता इसके फैलने की क्षमता को लेकर है। संक्रमित कुत्तों के संपर्क में आने से यह वायरस वन्यजीवों तक पहुंच सकता है। बाघों में संक्रमण गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है और स्थिति बिगड़ने पर मौत भी हो सकती है। याचिका में आशंका जताई गई है कि यदि किसी एक टाइगर रिजर्व में संक्रमण फैलता है तो आसपास के दूसरे संरक्षित क्षेत्रों में भी इसके पहुंचने का खतरा पैदा हो सकता है। इसी वजह से टाइगर रिजर्व के आसपास रहने वाले आवारा कुत्तों की निगरानी, क्वारंटाइन और वैक्सीनेशन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाईकोर्ट पहले ही इस संबंध में निर्देश जारी कर चुका है।
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सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि करीब 2 हजार आवारा कुत्तों का वैक्सीनेशन कराया जा चुका है। इसके अलावा इन कुत्तों को बूस्टर डोज देने की तैयारी भी की जा रही है। कोर्ट ने प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व में भी संक्रमण की रोकथाम और वन्यजीवों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि केवल कान्हा ही नहीं बल्कि प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में स्वास्थ्य निगरानी और वैक्सीनेशन व्यवस्था को मजबूत किया जाए ताकि किसी संभावित संक्रमण को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सके।
बाघों की मौत के मामले के साथ टाइगर रिजर्व में लंबे समय से खाली पड़े पदों का मुद्दा भी हाईकोर्ट के सामने आया। याचिका में कहा गया कि पर्याप्त स्टाफ के अभाव में वन्यजीवों की निगरानी और स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद कई पद अब भी रिक्त बताए गए हैं। हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश के सभी नौ टाइगर रिजर्व में पशु चिकित्सकों के खाली पद जल्द भरने के निर्देश दिए हैं। सितंबर के अंतिम सप्ताह में होने वाली अगली सुनवाई में फंड, संसाधनों, कर्मचारियों और टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी स्थिति पर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
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