लखनऊ कोचिंग हादसे के बाद छत्तीसगढ़ में भी एक्शन, 62 कोचिंग सेंटरों को नोटिस और कई संस्थान सील

लखनऊ कोचिंग अग्निकांड में 15 छात्रों की मौत के बाद छत्तीसगढ़ के दुर्ग, बिलासपुर और रायपुर में कोचिंग सेंटर्स की जांच हुई। सुरक्षा नियमों की अनदेखी मिलने पर 62 संस्थानों को नोटिस जारी किए गए और कई कोचिंग सेंटर सील कर दिए गए।

Updated: Jun 25, 2026, 05:30 PM IST

लखनऊ में कोचिंग सेंटर में आग लगने की घटना में 15 छात्रों की मौत के बाद छत्तीसगढ़ प्रशासन ने राज्यभर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच शुरू कर दी है। दुर्ग, बिलासपुर और रायपुर में हुए विशेष निरीक्षण के दौरान सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी सामने आई। जिसके बाद 62 कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं, कई संस्थानों पर तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें सील कर दिया गया।

दुर्ग जिले में बुधवार रात एसडीआरएफ और पुलिस की संयुक्त टीम ने अचानक निरीक्षण अभियान चलाया। करीब दो घंटे तक चले इस अभियान में कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की गई। अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश संस्थानों में फायर सेफ्टी, इमरजेंसी एग्जिट और अन्य आवश्यक सुरक्षा प्रबंधों में गंभीर कमियां पाई गई। निरीक्षण के बाद 62 संस्थानों को 24 घंटे के भीतर व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का निर्देश देते हुए नोटिस थमाए गए। गंभीर लापरवाही पाए जाने पर रामा कोचिंग, कैड एकेडमी मोशन, मोशन कोटा स्टडी सर्किल और वेदांतु को सील कर दिया गया। इस कार्रवाई को लेकर एक भाजपा नेता ने विरोध भी दर्ज कराया है।

अधिकारियों के अनुसार, दुर्ग जिले में लगभग 150 से 200 कोचिंग सेंटर और ट्यूटोरियल संस्थान संचालित हो रहे हैं। जिनमें सबसे अधिक संख्या भिलाई के न्यू सिविक सेंटर क्षेत्र में है। जांच के दौरान ऐसा कोई संस्थान नहीं मिला जहां सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन किया जा रहा हो। कई जगह फायर एक्स्टिंग्विशर की वैधता समाप्त हो चुकी थी। जबकि, कुछ स्थानों पर उन्हें सही तरीके से लगाया तक नहीं गया था।

जांच में यह भी सामने आया कि अधिकांश कोचिंग सेंटरों में आपातकालीन स्थिति के लिए अलग निकास द्वार उपलब्ध नहीं था। कई भवनों में आने-जाने के लिए केवल एक ही रास्ता था। कुछ संस्थानों में छात्रों की संख्या के मुकाबले जगह बेहद कम पाई गई। कई भवनों में इतनी संकरी सीढ़ियां थी कि एक समय में केवल एक छात्र ही ऊपर-नीचे जा सकता था। अधिकारियों का मानना है कि ऐसी स्थिति किसी आपदा के दौरान बड़े खतरे का कारण बन सकती है।

दुर्ग में जिन संस्थानों को नोटिस जारी किए गए हैं उनमें वेदांतु कोचिंग सेंटर, एबीएस फाउंडेशन, नीट-जेईई मास्टर, टाइम, लीगल एज, गोल, द इंग्लिश, कैड एकेडमी ग्रुप, केसीएस, रामा कोचिंग, मोशन, फ्लुएंसी, करियर नॉलेज सेंटर, कोटा स्टडी सर्किल, इम्पैक्ट स्टडी जोन, एस-टू-एस और लॉ प्रेप ट्यूटोरियल समेत न्यू सिविक सेंटर क्षेत्र के अधिकांश कोचिंग संस्थान शामिल हैं।

दूसरी ओर बिलासपुर में पुलिस, नगर निगम और फायर ब्रिगेड की संयुक्त टीम ने छह कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान पांच संस्थानों में भवन अनुमति, फायर सेफ्टी उपकरण और इमरजेंसी एग्जिट जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं की कमी पाई गई। सबसे अधिक अनियमितताएं मिलने पर उड़ान आईएएस एकेडमी को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया। जबकि, अन्य संस्थानों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, उड़ान आईएएस में प्रवेश और निकास के लिए केवल एक गेट था। चार मंजिला भवन में फायर सेफ्टी सिस्टम और लिफ्ट की सुविधा मौजूद नहीं थी। लगभग 700 विद्यार्थियों की क्षमता के मुकाबले भवन में पर्याप्त जगह और पार्किंग की भी कमी मिली। इसके अलावा चंद्रा एकेडमी, आचार्य एकेडमी, ऑक्सीडेशन कोचिंग, प्रीमियर एकेडमी और पटेल ट्यूटोरियल में भी कई प्रकार की खामियां पाई गई। कुछ संस्थानों के पास आवश्यक लाइसेंस नहीं थे। जबकि, कई जगह फायर सुरक्षा व्यवस्था नदारद मिली।

राजधानी रायपुर में 23 और 24 जून को सात प्रमुख कोचिंग संस्थानों की जांच की गई। निरीक्षण में अनअकैडमी, विद्यापीठ और एलन में अधिकांश सुरक्षा व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गई। हालांकि, इन संस्थानों को वेंटिलेशन और क्षमता प्रबंधन से जुड़े कुछ सुधारात्मक सुझाव दिए गए हैं।

इसके अलावा अकादजा, आरसीसी एकेडमी, आभा लाइब्रेरी और टुटेजा एकेडमी में सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन सामने आया। इन संस्थानों में फायर एनओसी, इमरजेंसी एग्जिट, पर्याप्त वेंटिलेशन और बिजली सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की कमी पाई गई। प्रशासन ने सभी संस्थानों को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए हैं।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर कमियां दूर नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि बड़ी संख्या में छात्र कोचिंग सेंटरों और लाइब्रेरी में अध्ययन करते हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।