दफ्तर दरबारी: बहू वायरल हुई तो एक्शन में आए सीनियर आईएएस

MP IAS: कॉलोनी के रास्ते पर निर्माण को लेकर हुआ विवाद एक वीडियो वायरल होने के बाद चर्चा में आ गया। प्रदेश के सीनियर आईएएस के परिवार से जुड़ाव के कारण वीडियो ज्यादा वायरल हुआ। अब छवि बिगाड़ने वालों पर कार्रवाई का दबाव है।

Updated: Aug 09, 2026, 08:27 AM IST

बीते दिनों भोपाल का एक वीडियो वायरल हुआ। यह वीडियो मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव (सीएस) एवी सिंह (आदित्य विजय सिंह) की बहू उजमा रजा उर्फ अंजलि सिंह का है। यूं तो वायरल होने पर प्रसिद्धि होती है लेकिन इस वीडियो के वायरल होने से पूर्व सीएस की बहू उजमा यानी अंजलि ट्रोल के निशाने पर आ गई। 

असल में, यह विवाद चूना भट्टी स्थित आम्रपाली एंक्लेव में एक मंदिर को लेकर हुआ था। कॉलोनी में रास्ते पर निर्माण कार्य के कारण अंजलि सिंह उर्फ उजमा रजा की निवासियों से बहस हो गई। आरोप है कि उन्होंने नवनिर्मित शिव मंदिर को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने इस मंदिर के ढांचे को अवैध भी बताया था। उनकी टिप्पणी से कॉलोनी निवासी आक्रोशित हो गए। इस दौरान बनाया गया वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

मामले ने जब धार्मिक पहचान का रूप लिया तो पूर्व मुख्य सचिव की बहू अंजलि उर्फ उजमा ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि कि उन्होंने 30 साल पहले अपनी मर्जी से हिंदू धर्म अपनाया था। कुछ लोगों ने उनके निजी या कॉलोनी के रास्ते के विवाद को जानबूझकर सांप्रदायिक रूप दिया। उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल करके उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। 

वीडियो वायरल होना और अंजलि की सफाई अपनी जगह लेकिन इस मामले में रिटायर्ड आईएएस पूर्व मुख्य सचिव एवी सिंह को एक्शन में आना पड़ा। पुलिस मुखिया को सूचित किया गया कि अंजलि सिंह को बदनाम करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट पर कार्रवाई हो। हालांकि, इस मामले में जांच जारी है लेकिन उच्च संपर्कों के आईएएस चाहते हैँ कि वीडियो वायरल कर छवि बिगाड़ने वालों की पहचान कर कार्रवाई की जाए। 

सीएम नायक, बस में अफसर, कर्मचारियों को सस्पेंड करने का दौर

जनता की समस्या सुलझाने के लिए सरकार गांव-गांव जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को छिंदवाड़ा से ‘मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान’ की शुरुआत की। अभियान शुरू होने के पहले ही दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनता की शिकायत पर लापरवाही बरतने के आरोप में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, तहसीलदार और पटवारी को निलंबित करने के निर्देश दिए गए। 

प्रख्यात फिल्म नायक की तर्ज पर मुख्यमंत्री के इस रूप को नायक का अवतार कहा जा रहा है। जहां एक और सीएम मोहन यादव ने कर्मचारियों को निलंबित करते हुए अपने कार्यकाल के शुरुआती दिनों की याद दिला दी जब उन्होंने कुछ सख्त फैसले लिए थे। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी अपने जनदर्शन कार्यक्रम में ऐसी ही छवि के साथ पेश आते थे। 

सीएम डॉ. मोहन यादव जनता के बीच जाने के लिए आम जनता की सवारी का प्रयोग कर चुके हैं। उनके बाद उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा भी मंदसौर कलेक्टर तथा अन्य अफसरों के साथ बस में बैठक कर मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान पर निकले। डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा को समस्याएं सुनाते हुए एक छात्रा जाति प्रमाण पत्र न बनने की शिकायत करते हुए रो पड़ी। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने किसी कर्मचारी को निलंबित तो नहीं किया अलबत्ता प्राथमिकता से जाति प्रमाण पत्र बनाने के निर्देश दिए। जन विश्वास अभियान में जगह-जगह समस्याओं का अंबार सुनाई दे रहा है। निलंबन जैसी कार्रवाई तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे बाकि स्थानों पर सिस्टम की पोल यूं ही खुलती रहेगी। व्यवस्था सुधारने के निर्देश कड़ी भाषा में दिए जाते रहेंगे। 

ये कलेक्टरों की ब्रांडिंग का मौसम है...

जब सरकार गांव में जा रही है तो अफसर भी पीछे क्यों रहें? जिलों में नए नए कलेक्टर बने अफसर हों या लूप लाइन से मैदानी पोस्टिंग में पहुंचे अफसर सभी अपनी ब्रांडिंग का कोई मौक़ा नहीं छोड़ रहे। इस सप्ताह रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी बारिश में भी रूके नहीं, छाता लेकर निरीक्षण पर निकल पड़े। दृश्य कर्मठ अफसर का बन रहा इसलिए तस्वीर तो वायरल होनी ही थी। ऐसा हुआ भी।

इसी तरह, रतलाम में पदस्थ हुए कलेक्टर अजय कटेसरिया सामान्य नागरिक की तरह व्यवस्था की पड़ताल करने निकल पड़े। कलेक्टर अजय कटेसरिया बिना सरकारी काफिले या प्रोटोकॉल के देर रात अपनी निजी गाड़ी से अकेले मेडिकल कॉलेज परिसर पहुंचे। उन्होंने अस्पताल परिसर में एक आम नागरिक की तरह प्रवेश किया। उन्होंने इमरजेंसी वार्ड, ट्रॉमा सेंटर और सामान्य वार्डों की स्थिति मरीज के परिजन की तरह देखी। ऐसे ही मंदसौर कलेक्टर दिव्यांक सिंह भी पद संभालते ही औचक निरीक्षण पर निकल पड़े। अफसरों का यूं औचक निरीक्षण ब्रांडिंग का मौका है और इसका पूरा लाभ उठाया जा रहा है। ब्रांडिंग पोस्ट पर स्थानीय लोग अहो भाव के कमेंट कर रही हैं।  

महिला अफसर के सिर मुंडाते ही ओले पड़े

मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा की अधिकारी सविता प्रधान इस सप्ताह एक बार फिर चर्चा में आई। इस बार उन्होंने अपना सिर मुंडवाकर फोटो पोस्ट किया तो लोगों में यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई कि अफसर ने आखिर सिर क्यों मुंडवाया। बाद में सविता प्रधान ने साफ किया कि कैंसर पीड़ित एक बच्ची की इच्छा पूरी करने और उसके चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए उन्होंने विग बनवाने के लिए बाल दान किए हैं।

उनके इस फैसले की खूब प्रशंसा हुई। जब प्रशंसा हुई तो साथ-साथ अतीत के किस्से भी वायरल हो गए। उनकी पहली शादी तथा प्रख्यात शो में दिए गए बयान की पड़ताल होने लगी। जाहिर है, जितनी प्रशंसा मिली उतनी ही आलोचना भी हुई। उनके इस काम को नेकी कम वायरल होने का प्रेम ज्यादा बताया गया।