सुप्रीम कोर्ट पहुंचा JPSC परीक्षा में गड़बड़ी का मामला, दोबारा एग्जाम और CBI जांच की मांग

JPSC 2025 प्रारंभिक परीक्षा में गड़बड़ी का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। छात्रों के विरोध के बीच परीक्षा रद्द करने, री-एग्जाम कराने और सीबीआई जांच की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है।

Updated: Aug 08, 2026, 05:51 PM IST

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 2025 प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। याचिकाकर्ता हरिशरण देवगन ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर परीक्षा रद्द करने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के साथ नए सिरे से परीक्षा कराने की मांग की है। इसके साथ ही मामले की सीबीआई से जांच कराने और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच कमेटी गठित करने की मांग भी की गई है। याचिका वकील सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दाखिल की गई है।

मामला 2 जुलाई को उस समय सामने आया जब JPSC प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित किए गए एक अभ्यर्थी की ओएमआर कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। आरोप लगाया गया कि अभ्यर्थी ने पेपर-1 में केवल 48 प्रश्न हल किए थे। इसके बावजूद उसे अगले चरण के लिए योग्य घोषित कर दिया गया। ओएमआर कॉपी सामने आने के बाद परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने लगे और बड़ी संख्या में छात्र विरोध में उतर आए।

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विवाद बढ़ने के बाद झारखंड सरकार ने मामले की जांच CID को सौंप दी। हालांकि, आंदोलन कर रहे छात्र इस जांच से संतुष्ट नहीं हैं। छात्र 25 जुलाई से रांची में प्रदर्शन कर रहे हैं और परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच तथा दोबारा परीक्षा कराने की मांग कर रहे हैं।

अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जांच विस्तृत होने के साथ-साथ निश्चित समयसीमा में पूरी की जानी चाहिए। ताकि परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर उठे सवालों का निष्पक्ष तरीके से समाधान हो सके।

याचिका में JPSC प्रारंभिक परीक्षा-2025 को रद्द कर सुरक्षित और पारदर्शी व्यवस्था के तहत दोबारा आयोजित करने की मांग भी की गई है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त जज या झारखंड से बाहर के किसी हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच समिति बनाने का अनुरोध किया गया है।

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याचिकाकर्ता ने परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच और ऑडिट कराने की मांग रखी है। इसमें ओएमआर शीट की स्कैनिंग, कोडिंग, उत्तरों के मूल्यांकन और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया को शामिल किया गया है। साथ ही यह भी पता लगाने की मांग की गई है कि कथित अनियमितता में शामिल अभ्यर्थियों और किसी गलती के बिना परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों की अलग-अलग पहचान की जा सकती है या नहीं।

याचिका में परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों और रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है। इनमें मूल ओएमआर शीट, कार्बन कॉपी, प्रश्नपत्र, आंसर की, अभ्यर्थियों की उपस्थिति का रिकॉर्ड और बायोमेट्रिक डेटा शामिल हैं। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज, डिस्पैच रजिस्टर, ओएमआर स्कैनिंग से संबंधित रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी संरक्षित रखने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने परीक्षा से जुड़े सभी डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की है। ताकि जांच के दौरान किसी भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के नष्ट होने या उसमें बदलाव की आशंका न रहे।

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