मास्टर प्लान नहीं आया तो 50 हजार लोगों के साथ करूंगा पदयात्रा, जीतू पटवारी ने दिया 3 महीने का अल्टीमेटम

पीसी शर्मा ने आरोप लगाया कि आवासीय और कमर्शियल जमीन से होने वाले फायदे और कमाई को देखते हुए बीजेपी के नेता और अधिकारी मास्टर प्लान जारी नहीं होने दे रहे हैं।

Updated: Sep 12, 2026, 06:32 PM IST

भोपाल। इंदौर और भोपाल के मास्टर प्लान को लेकर मध्य प्रदेश की सियासत गर्म है। विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार को तीन महीने का अल्टीमेटम दिया है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कहा कि अगर तीन महीने में मोहन सरकार ने दोनों शहरों का मास्टर प्लान जारी नहीं किया तो कांग्रेस 50 हजार लोगों के साथ इंदौर से भोपाल तक पदयात्रा निकालेगी और सीएम हाउस में घुसकर विरोध करेगी।

दरअसल, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा भोपाल का मास्टर प्लान जारी करने की मांग को लेकर शुक्रवार को 31 घंटे के उपवास पर बैठे थे। शनिवार को धरने के समापन कार्यक्रम में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी भी पहुंचे और उन्होंने राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। जीतू पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार को 20 साल हो गए, लेकिन भोपाल का मास्टर प्लान अब तक नहीं आया।

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जीतू पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश के लोगों ने बीजेपी को केंद्र और राज्य दोनों में सरकार बनाने का मौका दिया। सांसद, विधायक और महापौर चुने, लेकिन अब यही सरकार लोगों को वोट देने की सजा दे रही है। उन्होंने कहा कि देश में अब मोदी... मोदी... मोदी नहीं, बल्कि राहुल... राहुल... राहुल होने लगा है। उन्होंने इस दौरान मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि चैनल और अखबार मुख्यमंत्री से यह सवाल नहीं पूछते कि आखिर भोपाल का मास्टर प्लान क्यों नहीं आ रहा है। 

पटवारी ने बीजेपी सरकार को “कैंसर का कीटाणु” बताते हुए कहा कि सरकार को जनता के मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण बालाघाट, सागर, छिंदवाड़ा और इंदौर में लोगों की जान गई। लेकिन सरकार इन घटनाओं पर जवाबदेही तय नहीं कर पा रही है। इस दौरान पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि हर दस साल में मास्टर प्लान आना चाहिए, लेकिन भोपाल का मास्टर प्लान 21 साल से नहीं आया है। इससे व्यवसायी और रहवासी दोनों परेशान हैं।

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पीसी शर्मा ने कहा कि भोपाल का आखिरी मास्टर प्लान 1995 में तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार के समय आया था, जो 2005 तक के लिए था। शर्मा ने आरोप लगाया कि आवासीय और कमर्शियल जमीन से होने वाले फायदे और कमाई को देखते हुए बीजेपी के नेता और अधिकारी मास्टर प्लान जारी नहीं होने दे रहे हैं।