अतिथि विद्वानों ने रोका केंद्रीय मंत्री शिवराज का काफिला, चुनावी साल के आश्वासन याद दिलाए
प्रदर्शनकारी अतिथि विद्वान नियमितीकरण और स्थायित्व के लिए नीति बनाने तथा जब तक नीति लागू नहीं होती, तब तक फॉलन आउट की प्रक्रिया रोकने की मांग कर रहे हैं।
भोपाल। मध्य प्रदेश के अतिथि विद्वान मंगलवार से उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के भोपाल स्थित बंगले के बाहर धरने पर बैठे हैं। बुधवार सुबह करीब 200 अतिथि विद्वानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिला वहां से गुजरते वक्त रोक लिया। उन्होंने शिवराज को अपनी मांगें बताईं और 11 सितंबर 2023 के उनके आश्वासन याद दिलाए।
प्रदर्शनकारी अतिथि विद्वान नियमितीकरण और स्थायित्व के लिए नीति बनाने तथा जब तक नीति लागू नहीं होती, तब तक फॉलन आउट की प्रक्रिया रोकने की मांग कर रहे हैं। अतिथि विद्वानों के प्रतिनिधिमंडल के संयोजक डॉ राकेश कुमार परिहार ने बताया कि 10 जुलाई 2026 को रविंद्र भवन, भोपाल में आयोजित सम्मेलन में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और मुख्यमंत्री की मौजूदगी में उनकी समस्याओं को गंभीरता से स्वीकार किया गया था। इस दौरान अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण और स्थायित्व के संबंध में नीति बनाने का आश्वासन दिया गया था।
बुधवार सुबह मंत्री इंदर सिंह परमार ने अतिथि विद्वानों के चार प्रतिनिधियों को बुलाकर उनकी समस्याएं सुनीं। हालांकि, उन्होंने फॉलन आउट प्रक्रिया बंद करने से इनकार कर दिया। अतिथि विद्वानों का कहना है कि जब तक नियमितीकरण और स्थायित्व को लेकर ठोस नीति नहीं बनती, तब तक फॉलन आउट प्रक्रिया बंद की जाए।
अतिथि विद्वानों ने केंद्रीय मंत्री शिवराज को बताया कि उनके सामने सबसे बड़ा मुद्दा फॉलन आउट प्रक्रिया है। उन्होंने शिवराज सिंह चौहान के 11 सितंबर 2023 के आश्वासन का भी उल्लेख पत्र में किया है। उनके मुताबिक भोपाल में अतिथि विद्वानों की महापंचायत में शिवराज ने फॉलन आउट की प्रक्रिया रोकने और अतिथि विद्वानों का भविष्य सुरक्षित करने की बात कही थी।
अतिथि विद्वानों ने बताया कि पिछले महीने 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के अवसर पर उज्जैन में मुख्यमंत्री आवास पर प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंची अतिथि विद्वान बहनों ने मुख्यमंत्री को रक्षा सूत्र बांधकर उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नीति बनने तक फॉलन आउट प्रक्रिया रोकने का आग्रह किया था। इस दौरान मुख्यमंत्री ने जल्द ही फॉलन आउट प्रक्रिया रोकने का आश्वासन दिया था। लेकिन मांग पूरी करना तो दूर मंत्री परमार उनसे मिलने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में मजबूरन उन्होंने मंत्री परमार के आवास के बाहर धरना शुरू कर दिया है।




