MP: जमीन अधिग्रहण के विरोध में ट्रैक्टर लेकर निकले किसान, भोपाल कूच से पहले पुलिस ने रोका
इंदौर-देवास वेस्टर्न रिंग रोड के लिए जमीन के 4 गुना मुआवजे की मांग कर रहे किसानों को शिप्रा चौराहे पर पुलिस ने रोक दिया। भोपाल कूच कर रहे किसानों पर आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल हुआ।
इंदौर-देवास वेस्टर्न रिंग रोड प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन के बदले चार गुना मुआवजे की मांग को लेकर सोमवार को किसानों और करणी सेना परिवार का भोपाल कूच शिप्रा चौराहे पर रुक गया। ट्रैक्टरों के साथ मुख्यमंत्री से मिलने के लिए निकले किसानों को पुलिस और प्रशासन ने आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। किसानों ने आरोप लगाया कि उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। उनके अनुसार, इस कार्रवाई में कई किसान घायल हुए। घटना के बाद प्रदर्शनकारी बरलाई जागीर में धरने पर बैठ गए और आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।
करणी सेना परिवार के इंदौर जिला अध्यक्ष ऋषिराज सिंह सिसोदिया ने कहा कि प्रभावित किसान पिछले तीन सालों से अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के चक्कर लगा रहे हैं। इस दौरान करीब 50 ज्ञापन सौंपे गए लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। उनका कहना है कि किसान अपनी बात मुख्यमंत्री तक शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचाने के लिए भोपाल जा रहे थे लेकिन प्रशासन ने उन्हें बलपूर्वक रोक दिया।
सिसोदिया ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। उनका दावा है कि इस कार्रवाई में करीब सात किसान घायल हुए। जबकि, कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध और अपनी मांग सरकार तक पहुंचाना किसानों का अधिकार है।
यह भी पढ़ें:FIFA World Cup: स्पेन से हार के बाद अर्जेंटीना में बवाल, हजारों की भीड़ ने सड़क पर किया हंगामा
उन्होंने बताया कि ग्रेटर रिंग रोड परियोजना से 39 गांवों के 991 किसान प्रभावित हो रहे हैं और लगभग 4,442 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण के दायरे में है। किसानों का आरोप है कि जिस जमीन की बाजार कीमत एक करोड़ से साढ़े तीन करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक है। उसके बदले उन्हें केवल 18 लाख से 42 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा प्रस्तावित किया गया है। किसानों का कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं लेकिन उपजाऊ और सिंचित जमीन के बदले उन्हें न्यायसंगत मुआवजा मिलना चाहिए।
करणी सेना परिवार के सदस्य रवींद्र कन्नौजिया ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने रास्ता रोकने के लिए डंपर खड़े कर दिए थे। उनके मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान छोड़ा गया एक आंसू गैस का गोला उनके पैर के पास फट गया जिससे वे घायल हो गए। उनका दावा है कि इस कार्रवाई में कई अन्य किसानों को भी चोटें आई।
वहीं, किसान राम मकवाना ने कहा कि किसान पिछले तीन सालों से लगातार अपनी मांग उठा रहे हैं लेकिन समाधान नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई में आठ से दस किसान घायल हुए जिनमें कुछ को अस्पताल ले जाना पड़ा। उनके अनुसार, आंसू गैस के प्रभाव से कई किसानों की तबीयत बिगड़ गई। जबकि, बल प्रयोग के दौरान कुछ लोगों के पैर और कंधे में चोटें आई।
यह भी पढ़ें:MP में सामान्य से 16 प्रतिशत कम बारिश, किसानों को सता रहा फसल नष्ट होने का डर
इंदौर-देवास वेस्टर्न रिंग रोड परियोजना का उद्देश्य भारी वाहनों को शहर के भीतर आने से रोककर बाहरी मार्ग से निकालना है। साल 2028 में उज्जैन सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, प्रभावित किसानों का कहना है कि वे रिंग रोड निर्माण का विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि अपनी जमीन के बदले उचित और न्यायपूर्ण मुआवजे की मांग कर रहे हैं। किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।




