छत्तीसगढ़ पेपर लीक का मास्टरमाइंड निकला प्रोफेसर, 11 हजार में हुई थी डील, 6 आरोपी गिरफ्तार
छत्तीसगढ़ के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय का पेपर लीक करने वाला मास्टरमाइंड प्रोफेसर निकला। आरोपी प्रोफेसर ने सुई से सीलबंद पैकेट में छेद कर प्रश्नपत्र का वीडियो बनाया और 11 हजार रुपये में छात्रों को बेच दिया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) की कीटशास्त्र परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक करने के मामले में पुलिस ने 36 घंटे के भीतर पूरे नेटवर्क का खुलासा कर दिया है। जांच में सामने आया कि पेपर लीक का मास्टरमाइंड कोई छात्र नहीं बल्कि दुर्ग के भारती एग्रीकल्चर कॉलेज में प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया था। आरोप है कि उसने परीक्षा के सीलबंद प्रश्नपत्र में बारीकी से छेद कर मोबाइल कैमरे से उसकी रिकॉर्डिंग की और बाद में प्रश्नपत्र की जानकारी छात्रों को 11 हजार रुपये में बेच दी। पुलिस ने प्रोफेसर समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जबकि, दो अन्य की तलाश जारी है।
IGKV के अंतर्गत संचालित 28 कृषि महाविद्यालयों में बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष के AGCH-221 (कीटशास्त्र) विषय की परीक्षा होनी थी। परीक्षा से ठीक पहले 20 अगस्त की सुबह विश्वविद्यालय और संबंधित अधिकारियों को ईमेल के जरिए प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना मिली थी। इसी दौरान छात्रों और छात्र प्रतिनिधियों ने भी व्हाट्सऐप पर प्रश्नपत्र के कुछ सवाल वायरल होने की जानकारी दी थी। मामला सामने आते ही पुलिस ने वायरल सामग्री की जांच शुरू कर दी थी।
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रायपुर पुलिस की एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट ने वायरल स्क्रीनशॉट, फोटो, मैसेज और अन्य डिजिटल सामग्री का तकनीकी विश्लेषण किया। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि प्रश्नपत्र सबसे पहले किस मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट या डिजिटल माध्यम से साझा किया गया था। पुलिस ने मोबाइल डेटा, लोकेशन, सोशल मीडिया गतिविधियों और डिजिटल साक्ष्यों को जोड़कर प्रश्नपत्र के प्रसार की पूरी कड़ी तैयार की। इसी जांच के दौरान पुलिस की पहुंच दुर्ग निवासी अनुज मिंज तक हुई। इसके बाद टीम दुर्ग पहुंची और उससे पूछताछ की गई।
पेपर लीक की गंभीरता को देखते हुए रायपुर के अलावा दुर्ग, कबीरधाम, बिलासपुर और आसपास के जिलों में अलग-अलग पुलिस टीमों को सक्रिय किया गया। 100 से अधिक पुलिसकर्मियों ने करीब 36 घंटे तक तकनीकी जांच और पूछताछ की। जैसे ही डिजिटल साक्ष्य और आरोपियों से मिली जानकारी सामने आती गई पुलिस वैसे ही ने पेपर लीक से जुड़े लोगों की कड़ियां जोड़ ली। इसके बाद छह आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया गया।
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पुलिस की जांच के अनुसार, मुख्य आरोपी योगेश सोनकेसरिया साल 2019 से दुर्ग स्थित भारती एग्रीकल्चर कॉलेज में प्रोफेसर है। आरोप है कि 17 अगस्त को वह रायपुर के कृषि महाविद्यालय में अपने कॉलेज की उत्तरपुस्तिकाएं जमा करने पहुंचा था। इसी दौरान उसे आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों के सीलबंद पैकेट सौंपे गए थे।
पुलिस के मुताबिक, प्रोफेसर सभी पैकेट कॉलेज ले गया लेकिन 20 अगस्त को होने वाली कीटशास्त्र परीक्षा का प्रश्नपत्र अपने घर ले गया था। वहां उसने सुई और नुकीले उपकरण की मदद से लिफाफे में बेहद छोटा छेद किया। इसके बाद मोबाइल कैमरे को उस छेद के जरिए अंदर डालकर प्रश्नपत्र की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई। रिकॉर्डिंग के आधार पर प्रश्नपत्र की सामग्री तैयार की गई और फिर उसे छात्रों तक पहुंचाया गया।
पुलिस के अनुसार, योगेश सोनकेसरिया ने अपने कॉलेज के छात्र अजय नायक और अन्य छात्रों को 11 हजार रुपये में प्रश्नपत्र की जानकारी उपलब्ध कराई थी। इसके बाद अजय नायक ने यह सामग्री त्रिदेव पटेल, नितिन पाण्डेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू तक पहुंचाई थी। आरोप है कि इसके बाद प्रश्नपत्र की जानकारी आगे कई छात्रों तक पहुंची और देखते ही देखते उसके सवाल सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इसी वायरल सामग्री के आधार पर विश्वविद्यालय और अधिकारियों को पेपर लीक की जानकारी मिली थी।
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गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने कई अहम चीजें बरामद की हैं। इनमें 11 हजार रुपये नकद, छह मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस, केबल तार, मोबाइल कनेक्टर, सुई, सुजा, कॉपी और फेविकोल शामिल हैं। पुलिस इन सामानों को प्रश्नपत्र के सीलबंद पैकेट के साथ कथित छेड़छाड़ और उसकी रिकॉर्डिंग से जोड़कर देख रही है। डिजिटल उपकरणों की जांच से पेपर लीक के नेटवर्क में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आने की संभावना है।
इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया के अलावा अजय नायक, त्रिदेव पटेल, नितिन पाण्डेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, ये सभी आरोपी दुर्ग स्थित भारती एग्रीकल्चर कॉलेज से जुड़े छात्र हैं। वहीं, पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े दो अन्य आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
मामले में थाना तेलीबांधा में छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2008 की धारा 4, 5 और 10 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316 के तहत अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के साथ यह भी पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र कितने लोगों तक पहुंचा और इस नेटवर्क में फरार आरोपियों की क्या भूमिका थी।
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