राम मंदिर चढ़ावा चोरी: क्षमा-याचना के लिए ट्रस्ट करा रहा प्रायश्चित अनुष्ठान, 18 पुजारी और 5 आचार्य कर रहे पूजा-पाठ
अयोध्या में राम मंदिर में दान की कथित चोरी की घटना को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से प्रायश्चित पूजन शुरू किया गया है। इस विशेष पूजन के जरिए भगवान से चोरी के लिए क्षमा मांगी जा रही है।
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की घटना के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रायश्चित्त पूजन शुरू कर दिया है। ट्रस्ट के पदाधिकारियों मानते हैं कि मंदिर में दान की चोरी व्यवस्था में हुई चूक के कारण हुई है। इस अपराध के लिए ट्रस्ट ने विधि विधान से शुद्धिकरण के बाद क्षमा याचना के लिए विशेष अनुष्ठान का आयोजन शुरू कर दिया है। मंदिर परिसर के अंदर और बाहर कुल 70 वैदिक आचार्य इस पूजन में शामिल हैं।
राम मंदिर में के गर्भगृह और परकोटा सहित मंदिर मंदिर परिसर के कई स्थानों पर यह 10 दिवसीय प्रायश्चित पूजन एक साथ चल रहा है। इसमें शामिल आचार्य वैदिक मंत्रोच्चार, हवन, रुद्राभिषेक और रामार्चन कर रहे हैं। मान्यता है कि किसी भी प्रकार की अपवित्रता या चोरी जैसी घटनाएं होने पर मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रायश्चित पूजन किया जाता है।
अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में कथित चढ़ावे की चोरी से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की भारी बदनामी हुई है। इससे देश-विदेश के श्रद्धालुओं को ठेस पहुंची है। ट्रस्ट के पदाधिकारी भी इस घटना से आहत हैं। उन्होंने वैदिक परंपरा का पालन करते हुए इस घटना के लिए प्रायश्चित शुरू किया है। इसमें पूजा-अर्चना करके भगवान से क्षमा मांगी जा रही है। यह विशेष पूजन 10 दिन तक चलेगा।
ट्रस्ट क्षमा याचना के लिए यह अनुष्ठान कर रहा है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरी के अनुसार, यह जरूरी है कि भूल होने पर उसे दोहराया न जाए। यही प्रायश्चित होता है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इस प्रकार का कार्य फिर कभी न हो। इसके लिए कुछ नई व्यवस्थाएं लागू कर दी गई हैं।
प्रायश्चित्त पूजन के अंतर्गत मंदिर में विशेष जप और स्त्रोतों का पाठ किया जा रहा है। ट्रस्ट के पदाधिकारियों का कहना है कि इस सामूहिक अनुष्ठान के साथ-साथ व्यक्तिगत रूप से भी प्रायश्चित किया जाना चाहिए। स्वामी गोविंददेव गिरी ने कहा कि वे प्रतिदिन विशिष्ट जप और स्त्रोत पाठ कर रहे हैं।




