चुप्पी तोड़िए, मॉब लिंचिंग की निंदा कीजिए, पत्रकार दयाशंकर मिश्र को मिला बहुजन इंटलेक्ट सम्मान

भोपाल में दयाशंकर मिश्र की पुस्तक अख़लाक़ पर परिचर्चा, मिश्र ने कहा कि इस किताब को लिखना उनके लिए एक बड़ी पीडा से गुजरना था। जिन परिवारों के सदस्‍य बिना किसी गुनाह के कत्‍ल कर दिए गए।

Updated: Sep 20, 2026, 07:01 PM IST

भोपाल। वरिष्ठ पत्रकार दयाशंकर मिश्र को भोपाल के गांधी भवन में बहुजन इंटलेक्ट सम्मान से अलंकृत किया गया। उन्हें यह सम्मान प्रदेश की सामाजिक संस्‍था बहुजन इंटलेक्‍ट द्वारा उनकी सद्य प्रकाशित पुस्तक "अखलाक़: भारत में मॉब लिंचिंग की विस्तृत ज़मीनी पड़ताल के लिए दिया गया। 

इस अवसर पर किताब पर हुई परिचर्चा में प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि दयाशंकर मिश्र हमारे समय के निर्भीक लेखक और पत्रकार हैं। उन्‍होंने देश के विभिन्‍न राज्‍यों में पीडि़त परिवारों, आरोपियों और नीति नियंताओं से विषम परिस्थितियों में बातचीत कर यह दस्‍तावेजी महत्‍व की किताब प्रकाशित की है। 

यह किताब देश के अल्‍पसंख्‍यक समाज को यह हौसला देती है कि भारत का संविधान और बहुसंख्‍यक समुदाय इस तरह की हिंसा के खिलाफ है और उनके साथ खड़ा है। इस पुस्‍तक में गुजरात, महाराष्‍ट्र, उड़ीसा, हरियाणा और उत्‍तर प्रदेश जैसे राज्‍यों में पिछले कुछ वर्ष में हुई मॉब लिंचिंग की घटनाओं और उनके बाद के हालात की जमीनी पड़ताल की गई है। किताब अमेरिका में मॉब लिंचिंग के इतिहास से शुरू होकर भारत के वर्तमान की तुलना करती है। 

वरिष्‍ठ साहित्‍याकर डॉ विजय बहादुर सिंह ने अपने लिखित संदेश में कहा कि अहिंसा और अवैर सनातन धर्म का मूल लक्षण है। जो लोग धर्म के आधार पर हिंसा करते हैं, वे हिंदू धर्म का अपमान करते हैं। दयाशंकर मिश्र ने कहा कि इस किताब को लिखना उनके लिए एक बड़ी पीडा से गुजरना था। जिन परिवारों के सदस्‍य बिना किसी गुनाह के कत्‍ल कर दिए गए, उनसे उनके दर्द के बारे में बातचीत करना उनके जख्‍मों को कुरेदने जैसा था। लेकिन यह कठिन काम करना हमारे समय की जरूरत थी। हमें यह समझने की जरूरत है कि मॉब लिंचिंग सिर्फ अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं, इनके पीछे राजनैतिक स्‍वार्थ हैं जो मॉब लिंचिंग के ईंधन का काम करते हैं। 

कांग्रेस केंद्रीय वार रूम ट्रेनिंग प्रभारी प्रोफेसर सौरभ वाजपेयी ने कहा कि दयाशंकर जी की किताब हमारे समाज को आईना दिखाने का काम करती है। जरूरत इस बात की है कि हम हिंदू-मुसलमान के भेद को मिटाकर संवैधानिक और सच्‍चे धार्मिक मूल्‍यों के आधार पर अपने राष्‍ट्र का नवनिर्माण करें। 

पूर्व आईएसएस अधिकारी श्रीमती शैलबाला मार्टिन ने कहा कि मॉब लिंचिंग की घटनाएं भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को शर्मसार करती हैं। इसके शिकार मुख्‍य रूप से मुस्लिम, ईसाई, दलित और आदिवासी बन रहे हैं। इस प्रवृत्ति के खिलाफ देश को एकजुट होने की जरूरत है। 

इस अवसर पर गांधी भवन ट्रस्‍ट के अध्‍यक्ष श्री संजय सिंह ने कहा कि हम सबको महात्‍मा गांधी के रास्‍ते पर चलने की जरूरत है। इस रास्‍ते में सांप्रदायिक घृणा और हिंसा के लिए जगह नहीं है। सामाजिक सद्भाव के  लिए यह किताब महत्‍वपूर्ण है। सभा को साहित्‍यकार  ओम प्रकाश बबेले, डॉ मेजर मनोज राजे, पत्रकार कासिफ काकवी, सामाजिक कार्यकर्ता इनायत अब्‍बास ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता सुनील बोरसे ने किया। कार्यक्रम का आयोजन मध्‍य प्रदेश की सामाजिक संस्‍था बहुजन इंटलेक्‍ट ने किया।