NEET विवाद के बीच नरेश पाल गंगवार बने शिक्षा सचिव, खीरा सब्सिडी घोटाले से जुड़ चुका है नाम
पशुपालन और डेयरी विभाग का सचिव रहने के दौरान उनकी पत्नी, बेटे और मां को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की योजना के तहत लगभग 1.16 करोड़ रुपए की सब्सिडी मिली।
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर महीनेभर से जारी प्रदर्शन के बीच गुरुवार रात केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल कर दिया। सरकार ने हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट के सचिव विनीत जोशी का तबादला कर दिया। उनकी जगह अब नरेश पाल गंगवार को नया सचिव बनाया गया है।
नरेश पाल गंगवार 1994 बैच के IAS अधिकारी हैं। उन्होंने 1993 में UPSC परीक्षा पास की थी। उन्होंने राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार में कई अहम पदों पर जिम्मेदारी संभाली है। राजस्थान सरकार की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, नरेश पाल गंगवार राजस्थान में कई जिलों के कलेक्टर रह चुके हैं। 2001 में उन्हें टोंक का कलेक्टर बनाया गया था।
नरेश पाल गंगवार का विवादों से भी पुराना नाता रहा है। हाल ही में खीरा सब्सिडी घोटाले में नाम आने के बाद वे सुर्खियां बटोर चुके हैं। दरअसल, पिछले साल अगस्त महीने में गंगवार को मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत पशुपालन और डेयरी विभाग का सचिव नियुक्त किया गया था। इस पद पर रहने के दौरान उनकी पत्नी, पुत्र और माता को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की योजना के तहत लगभग 1.16 करोड़ रुपए की सब्सिडी मिली। वहीं, केंद्रीय मंत्री भगीरथ चौधरी को खीरा की खेती के लिए मंत्रालय ने 99 लाख रुपए की सब्सिडी दी थी।
बता दें कि द इंडियन एक्सप्रेस ने 27 जून को अपनी खोजी रिपोर्ट में बताया था कि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी को उनके ही मंत्रालय के अधीन चलने वाली योजना के तहत सरकारी सब्सिडी मिली है। इनके साथ ही एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के परिवार को भी 1.16 करोड़ की सब्सिडी मिली है।
अखबार ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के पीह गांव में फार्म में एक बोर्ड लिखा है कि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की ओर से इस परियोजना के लिए 99.60 लाख रुपये की सहायता दी गई है, लेकिन बोर्ड पर यह नहीं लिखा है कि इस योजना का लाभ लेने वाले स्वयं केंद्र की मोदी सरकार में कृषि राज्य मंत्री हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अजमेर से सांसद भगीरथ चौधरी ने अपने खेत में बड़े पैमाने पर खीरे की व्यवसायिक खेती के लिए पॉलीहाउस परियोजना शुरू की। इस परियोजना की कुल लागत 1.99 करोड़ रुपये बताई गई। केंद्रीय मंत्री ने करीब 49.80 लाख रुपये स्वयं लगाए और करीब 1.49 करोड़ रुपए की सब्सिडी ली। जिसके बाद सरकारी सब्सिडी को सीधे बैंक ऋण खाते में जमा करा दी गई। यह सब्सिडी बागवानी बोर्ड की योजना के तहत दी गई। बहरहाल, खीरा सब्सिडी घोटाले में नाम आने के बावजूद उन्हें शिक्षा सचिव बनाए जाने के फैसले पर कई सवाल उठ रहे हैं।




