जी भाईसाहब जी: राहुल गांधी की जमीन के लिए छोटा पड़ गया इंदौर
MP Politics: बीजेपी नेताओं के साथ कुछ खेल संगठनों को आपत्ति है कि नेहरू स्टेडियम में खेल गतिविधियां हो रही हैं। यहां राजनीतिक कार्यक्रम होने से खेल गतिविधियां प्रभावित होगी। क्या वाकई में कार्यक्रम की अनुमति नहीं देने का यही कारण एकमात्र आधार है?
कांग्रेस ने युवाओं को साधने के लिए सीधे विद्यार्थियों से संवाद का रास्ता चुना है। 12 सितंबर को राहुल गांधी का इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम प्रस्तावित है। राहुल गांधी या यूं कहिए कांग्रेस की राजनीतिक जमीन मजबूत करने के इस आयोजन के लिए स्थल चुनने में मुश्किल आ रही है क्योंकि बीजेपी की अगुआई वाली नगर निगम मनचाहा आयोजन स्थल नहीं दे रही है।
इंदौर में होने वाला यह आयोजन महत्वपूर्ण है क्योंकि जंतर-मंतर पर हुए जेन-जी आंदोलन ने देश की राजनीतिक दिशा बदल दी है। इसके बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की भागीदारी के बाद कांग्रेस की ओर से विभिन्न राज्यों में छात्रों की गूंज कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कांग्रेस ने इंदौर में आयोजन के लिए शहर के मध्य स्थित नेहरू स्टेडियम तय किया गया है। जैसे ही स्थान तय हुआ बीजेपी नेताओं के साथ कुछ खेल संगठनों ने यह कहते हुए आपत्ति जताई है कि नेहरू स्टेडियम में लगातार खेल गतिविधियां हो रही हैं। यहां राजनीतिक कार्यक्रम होने से खेल गतिविधियां प्रभावित होगी।
इंदौर नगर निगम के अधीन इस स्टेडियम की अनुमति पर आपत्तियों के बीच कहा गया कि हाईकोर्ट द्वारा दी गई एक गाइडलाइन को आधार बनाकर अनुमति नहीं देने पर विचार किया जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि छात्रों की गूंज कार्यक्रम राजनीतिक आयोजन नहीं है, इसलिए नेहरू स्टेडियम में राहुल गांधी के लाइव कंसर्ट को अनुमति नहीं मिलने का कोई प्रश्न नहीं उठता है। इस बीच खालसा स्टेडियम अथवा खंडवा रोड या सुपर कॉरिडोर स्थित स्टेडियम सहित अन्य मैदान भी देखे जा रहे हैं।
आकलन है कि यह आयोजन युवाओं के बीच कांग्रेस या राहुल गांधी की पकड़ को मजबूत करने की शृंखला का एक हिस्सा है। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी छात्रों के मुद्दों को सुनने की कोशिश करेंगे। युवाओं के साथ से कांग्रेस सरकार और व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करने की तैयारी कर रही है। इस आयोजन को युवाओं के मुद्दों को राजनीतिक एजेंडे में बदलने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है और इसी कारण इसके आयोजन के लिए स्थल देने में इंदौर (नगर निगम) का दिल छोटा पड़ गया है।
रियल जेन जी को साधने के लिए रील बीजेपी
जेन जी और जेन अल्फा की आवाज को बढ़ता देख बीजेपी ने भी अपनी रणनीति का बदल दिया है। बीजेपी का फोकस युवाओं को पार्टी से जोड़ने के साथ ही साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी उपस्थिति बढ़ाने पर है जहां युवा अपना सबसे ज्यादा समय बिता रहे हैं। बीजेपी ने ओरछा में हुई प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में तय किया गया कि जेन जी के बीच पहुंच बढ़ाने का काम सोशल मीडिया के माध्यम से होगा। रील, शॉर्ट वीडियो और डिजिटल कंटेंट के जरिए सरकार की योजनाओं, संगठन की गतिविधियों और राजनीतिक संदेशों को युवाओं तक पहुंचाने पर काम तेज कर दिया गया है।
पार्टी ने अपने नेताओं को हिदायत दी है कि वे अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक्टिविटीज बढ़ाएं। उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर सरकारी योजनाओं की जानकारी तथा युवाओं से जुड़ी सामग्री ज्यादा से ज्यादा होनी चाहिए। लक्ष्य साफ है कि बीजेपी की कोशिश सिर्फ युवाओं को पार्टी की विचारधारा से जोड़ने की नहीं, बल्कि जेन जी के डिजिटल स्पेस में अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की है
एक वायरल वीडियो पूरी बीजेपी पर भारी
मध्यप्रदेश में जब तब नेतृत्व परिवर्तन की बात उठ खड़ी होती हैं। इन दिनों भी ऐसी चर्चाएं आम हैं। इस बीच ओरछा में हुई बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति पर एक वायरल वीडियो भारी पड़ गया। कुछ सेकंड्स की सार्वजनिक मुलाकात का यह वीडियो कार्यसमिति की खबरों की बराबरी से प्रसारित हुआ। यह वीडियो कार्यसमिति की बैठक के पहले मंत्री कृष्णा गौर और पूर्व मंत्री इमरती देवी की मुलाकात का है। आयोजन स्थल पर इमरती देवी ने मंत्री कृष्णा गौर को देखा तो खुशी से उनको गले लगा लिया।
इमरती देवी ने कहा कि ‘मंत्री जी, बड़े दिनों में मिली हो। मैं तो कहती हूं कि रामराजा आपको मुख्यमंत्री बना दें’। इस बात को सुनकर मंत्री कृष्णा गौर कुछ देर रुकीं। फिर उन्होंने पलट कर इमरती देवी के नजदीक जाकर उनसे कुछ कहा और हँस कर आगे चली गईं। छोटी सी मुलाकात का यह वीडियो खूब वायरल हुआ। यहां तक खबरें चल पड़ी कि प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन होने वाला है और केंद्र ने कृष्णा गौर का बायोडाटा मांगा है। हो रहा है।
लुटे जा रहे हैं कारोबारी, कहां है उनके रहनुमां
भोपाल में रहवासी इलाकों में सीलिंग की कार्रवाई जारी है। नगर निगम पर भेदभाव से काम करने का आरोप है कि वह बड़े कारोबारियों को छोड़ रहा है और छोटे दुकानदारों की दुकानें सील कर रहा है। व्यापारियों की ओर से कहा जा रहा है कि आज सिर्फ दुकानें सील नहीं हुई है, किसी का सपना, किसी की रोज़ी-रोटी और किसी के परिवार की उम्मीदें सील हुई हैं। जिस दुकान से वर्षों से घर चलता था, आज उसी पर ताला लगा दिया गया। गलती अगर व्यवस्था की है, तो सज़ा व्यापारी क्यों भुगते? 21 साल से मास्टर प्लान का इंतज़ार करने वाले भोपाल के व्यापारियों के साथ यह अन्याय कब तक? मास्टर प्लान लागू करो। व्यापारियों को बेरोज़गार मत करो।
कमल राठी सोशल मीडिया पर लिखते हैं कि शायद हम सबकी लंबे समय तक मास्टर प्लान के प्रति रही उदासीनता का ही परिणाम है कि भोपाल का नया मास्टर प्लान समय पर नहीं आ पाया। लेकिन अब जनता जागी है तो उम्मीद है कि आने वाला प्लान जनभागीदारी, पारदर्शिता और शहर के दीर्घकालीन हित को ध्यान में रखकर बनेगा। रहवासियों का अधिकार भी सुरक्षित रहे और व्यवसायियों की आजीविका का सम्मान भी बना रहे—ऐसा स्थायी और न्यायपूर्ण समाधान हमें तलाशना होगा।
एक मुहिम चल पड़ी है कि सरकार मास्टर प्लान को जारी कर व्यापारियों की आजीविका पर आए संकट का समाधान करें। नगर निगम सुप्रीम कोर्ट का डर दिखा रहा है मगर सरकार कोई भी हस्तक्षेप करने से बच रही है। व्यापारी परेशान है और इस परेशानी में बीजेपी के विधायकों से भी कोई सहायता नहीं मिल पा रही है। कहा जा रहा है कि जैसे मंत्री विजय शाह के मामले में स्टैंड लिया गया है वैसे ही सरकार तुरंत मास्टर प्लान लागू करने जैसा निर्णय ले सकती है।




