दिल्ली-भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस में परोसी गई एक्सपायरी ब्रेड, फूड पॉइजनिंग की आशंका से मचा हड़कंप

नई दिल्ली-भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस में यात्रियों को नाश्ते में एक्सपायरी ब्रेड परोसने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। शनिवार को सी-4 कोच के दर्जनों यात्रियों ने अनजाने में एक्सपायरी वाली ब्रेड खा ली। घटना के बाद यात्रियों ने शिकायत दर्ज कर हंगामा किया।

Updated: Jul 11, 2026, 04:38 PM IST

नई दिल्ली-रानी कमलापति (भोपाल) शताब्दी एक्सप्रेस (12002) में शनिवार सुबह यात्रियों को नाश्ते में एक्सपायरी ब्रेड परोसने का मामला सामने आया है। ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों ने ब्रेड खाने के बाद पैकेट पर छपी यूज़ बाय डेट देखी तो पता चला कि उसकी वैधता 10 जुलाई 2026 तक थी। जबकि, ब्रेड 11 जुलाई को परोसी गई। घटना सामने आते ही यात्रियों में नाराजगी फैल गई और फूड पॉयजनिंग की आशंका जताते हुए उन्होंने रेल मदद ऐप और ऑनलाइन कंज्यूमर कमीशन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।

जानकारी के मुताबिक, यह मामला सबसे पहले सी-4 कोच में सामने आया। वहां करीब 74 यात्री सफर कर रहे थे। सुबह कैटरिंग स्टाफ ने नियमित नाश्ता परोसा और अधिकांश यात्री ब्रेड खा चुके थे। इसी दौरान एक यात्री की नजर ब्रेड पैकेट पर लिखी एक्सपायरी तारीख पर पड़ी। इसके बाद कोच में मौजूद अन्य यात्रियों ने भी पैकेट जांचे तो सभी में एक ही तारीख दर्ज मिली। जिससे पूरे डिब्बे में हड़कंप मच गया।

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यात्रा कर रहे सीनियर एनालिस्ट प्रणव और उनके सह यात्री अशोक कालिया ने बताया कि कई लोगों ने अनजाने में एक्सपायरी ब्रेड खा ली थी। जब यात्रियों ने कोच के बाहर रखे कैटरिंग पैकेटों की जांच की तो वहां भी उसी तारीख वाली ब्रेड के बंडल मिले। इससे आशंका जताई जा रही है कि यह ब्रेड केवल एक कोच तक सीमित नहीं थी बल्कि ट्रेन के अन्य डिब्बों में भी सप्लाई की गई हो सकती है। यात्रियों ने सवाल उठाया कि यदि इस लापरवाही से किसी बच्चे, बुजुर्ग या अन्य यात्री की तबीयत बिगड़ती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।

घटना के बाद यात्रियों ने कैटरिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि शिकायत करने पर स्थानीय स्तर पर आईआरसीटीसी अधिकारियों ने ठोस कार्रवाई का भरोसा देने के बजाय जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। क्षेत्रीय अधिकारी मनोरंजन बिनकर ने बताया कि यह उत्तर रेलवे की ट्रेन है और भोजन दिल्ली से लोड किया जाता है। हालांकि, रेलवे नियमों के अनुसार, शताब्दी एक्सप्रेस में ऑनबोर्ड कैटरिंग और भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित रेलवे जोन की होती है। इस जवाब से यात्रियों की नाराजगी और बढ़ गई तथा उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

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गौरतलब है कि शताब्दी एक्सप्रेस की कैटरिंग व्यवस्था लगातार दूसरे दिन विवादों में रही। इससे एक दिन पहले यानी 10 जुलाई को भोपाल से नई दिल्ली जाने वाली 12001 शताब्दी एक्सप्रेस के एक यात्री ने सोशल मीडिया पर रेल मंत्री और आईआरसीटीसी को टैग करते हुए भोजन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों पर सवाल उठाए थे। यात्री का आरोप था कि पूरा किराया वसूलने के बावजूद कैटरिंग सेवा का स्तर लगातार गिर रहा है। लगातार दो दिनों में सामने आई इन शिकायतों ने प्रीमियम ट्रेनों में खानपान की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।