संसद के मॉनसून सत्र का अवसान, तय समय से दो दिन पहले खत्म हुआ सत्र

आखिरकार नहीं हुई पेगासस जासूसी कांड पर बहस, हंगामे के बीच लोक सभा से 20 बिल हुए पास, 22 फ़ीसदी हुआ कामकाज, राज्य सभा 28 में फ़ीसदी कामकाज का मिला ब्यौरा

Updated: Aug 12, 2021, 11:20 AM IST

संसद के मॉनसून सत्र का अवसान, तय समय से दो दिन पहले खत्म हुआ सत्र

नई दिल्ली। पेगासस जासूसी कांड और कृषि कानूनों के खिलाफ मॉनसून सत्र में लगातार हंगामे के बाद संसद की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है। केंद्र सरकार ने जासूसी कांड पर चर्चा के बजाए संसद के सत्र को ही तय समय से 2 दिन पहले समाप्त करने का निर्णय लिया है। बुधवार देर शाम तक राज्यसभा में चल रहे हंगामे के बीच आखिरकार ऊपरी सदन की कार्यवाही को समाप्त कर दिया गया।

राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित होने के साथ ही पिछले 19 जुलाई से शुरू हुआ मॉनसून सत्र समाप्त हो गया है। इस दौरान विपक्ष लगातार आरोप लगाती रही कि केंद्र सरकार चर्चा से भाग रही है। वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि विपक्षी सांसदों ने सदन के भीतर असंसदीय व्यवहार किया जिससे सदन का अपमान हुआ है।

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राज्यसभा में नेता सदन पीयूष गोयल ने कहा है कि चेयरमैन को एक स्पेशल कमेटी बनानी चाहिए और राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों ने जिस तरह से हंगामा किया है उसकी पूरी जांच कर असंसदीय व्यवहार करने वालों के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई होना चाहिए। ताकि भविष्य में कोई भी सांसद सदन का इस तरह अपमान न कर सके।

इसके पहले बुधवार सुबह लोकसभा की कार्यवाही को अनश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने यह तर्क देते हुए सत्र को समाप्त कर दिया कि सदन की कार्यवाही अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रही। ओम बिरला ने कहा कि इस सत्र की उत्पादकता महज़ 22 फीसदी ही रही। उन्होंने इसके लिए जिम्मेदार लागतार पैदा हुए व्यवधानों को ठहराया। संसद के मॉनसून सत्र के चौथे हफ्ते का आज तीसरा दिन ही था।

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दरअसल, इस सत्र में विपक्ष लगातार संसद में पेगासस जासूसी कांड, कृषि कानून, महंगाई जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा करने के लिए सरकार पर दबाव बनाता रहा। लेकिन सरकार इन मुद्दों पर चर्चा के लिए राज़ी नहीं हुई। सरकार के आनाकानी भरे रवैए के कारण सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्ष ने आक्रमक रुख अपनाए रखा। जिसके बाद आखिरकार मॉनसून सत्र की अवधि पूर्ण होने से पहले ही दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। सरकार ने सदन के भीतर चर्चा करने के बजाए सत्र को ही तय समय से पहले खत्म करना उचित समझा।

सदन में पक्ष-विपक्ष के बीच चल रहे गतिरोध के कारण मॉनसून सत्र के दौरान राज्यसभा में महज 28 फीसदी कामकाज हुआ है। इस दौरान कुल 19 विधेयक राज्यसभा से पास किए गए हैं। उधर लोकसभा की स्थिति राज्यसभा से भी बुरी रही। यहां तो महज 22 फीसदी ही कामकाज हुआ। लोकसभा अध्यक्ष के मुताबिक विपक्ष द्वारा व्यवधान उत्पन्न किए जाने के कारण 96 घंटे में करीब 74 घंटे कामकाज नहीं हो सका। हालांकि, विपक्ष ने इसके लिए सरकार को दोषी ठहराते हुए कहा है कि यदि सरकार चर्चा के लिए तैयार होती तो सत्र हंगामे की भेंट नहीं चढ़ता।

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मॉनसून सत्र हंगामे के इतर भी कई घटनाओं को लेकर चर्चित रहा। मसलन राज्यसभा में सभापति वैंकेया नायडू भावुक होकर रोने लगे। नायडू की आंखों से आंसू इसलिए छलक पड़े, क्योंकि नाराज सदस्यों ने आसन की ओर रूल बुक उछाल दी थी। उन्होंने कहा कि इस रवैये से उन्हें बहुत कष्ट हुआ है और वे रात में सो नहीं पाए।' सत्र के शुरुआत में ही आरजेडी सांसद मानोज झा का ऑक्सीजन की कमी और कोरोना वायरस को लेकर भाषण भी खूब चर्चा में रहा। मानोज झा ने सदन के भीतर कोरोना से जान गंवाने वालों के लिए साझा माफीनामा भेजने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि हमने अनडिग्निफाइड मौत को देखा है।