विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में TMC को झटका, राज्यसभा सांसद मौसम नूर कांग्रेस में हुईं शामिल
2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मौसम नूर का कांग्रेस में शामिल होना सिर्फ एक दल-बदल नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति बदलने वाला कदम माना जा रहा है।
नई दिल्ली। विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद मौसम बेनजीर नूर ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दामन थाम लिया है। लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए उनकी यह घर वापसी कांग्रेस के लिए बंगाल से आई बड़ी खुशखबरी मानी जा रही है।
2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मौसम नूर का कांग्रेस में शामिल होना सिर्फ एक दल-बदल नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में सियासी संतुलन बदलने वाला कदम माना जा रहा है। मालदा की प्रभावशाली खान चौधरी परिवार से आने वाली मौसम नूर की वापसी से कांग्रेस को संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ उत्तर बंगाल और मुस्लिम बहुल इलाकों में फायदेमंद साबित होगा।
तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद मौसम बेनजीर नूर शनिवार को दिल्ली स्थित AICC मुख्यालय पहुंचीं, जहां कांग्रेस नेतृत्व की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभंकर सरकार भी मौजूद रहे। कांग्रेस में शामिल होते ही मौसम नूर का जोरदार स्वागत किया गया और इसे पार्टी के लिए बंगाल ब्रेकथ्रू बताया गया।
मौसम नूर का राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त होना है। लेकिन इससे पहले कांग्रेस में उनकी एंट्री को चुनावी रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। उनकी वापसी से कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिया है कि वह बंगाल में दोबारा सियासी जमीन मजबूत करने के मूड में है।
मौसम नूर का नाम मालदा की राजनीति में दशकों से असरदार रहा है। वह दिवंगत दिग्गज नेता गनी खान चौधरी की भतीजी हैं, जिनका उत्तर बंगाल में गहरा प्रभाव रहा है। कांग्रेस में उनकी वापसी से पार्टी को पारंपरिक मुस्लिम वोट बैंक को फिर से साधने का मौका मिला है। मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे इलाकों में कांग्रेस कभी मजबूत स्थिति में थी। समय के साथ टीएमसी और बीजेपी के उभार से कांग्रेस कमजोर पड़ी, लेकिन मौसम नूर की वापसी से इन क्षेत्रों में पार्टी को नई धार मिलने की उम्मीद है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक मौसम नूर लंबे समय से टीएमसी में खुद को हाशिए पर महसूस कर रही थीं। 2019 में कांग्रेस छोड़कर टीएमसी जॉइन करने के बाद उन्हें जिला अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन बाद में यह जिम्मेदारी उनसे छीन ली गई। पार्टी के कार्यक्रमों में उनकी भूमिका सीमित होती चली गई और निर्णय प्रक्रिया से भी वह धीरे-धीरे बाहर होती गईं। यही असंतोष उनकी कांग्रेस वापसी की सबसे बड़ी वजह बना।




