इंदौर के बाद अब गुजरात के गांधीनगर में दूषित जल का कहर, 130 लोग बीमार, पाइपलाइन में मिला सीवेज का पानी

पाइपलाइन लीकेज से दूषित पानी की सप्लाई के कारण गुजरात के गांधीनगर में 130 से अधिक लोग टाइफाइड से संक्रमित हो चुके हैं। सभी मरीजों को गांधीनगर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

Updated: Jan 04, 2026, 10:16 AM IST

गांधीनगर। मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित जल पीने से 16 मौतों का मामला अभी थमा भी नहीं की गुजरात के गांधीनगर में भी दूषित जल का कहर देखने को मिला है। यहां सप्लाई वाटर के पाइपलाइन में सीवेज का पानी मिलने से सैंकड़ों लोग बीमार पड़ गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक 130 से ज्यादा मरीज टाइफाइड से संक्रमित पाए गए हैं। सभी मरीजों को गांधीनगर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि पिछले तीन दिनों में सिविल अस्पताल में टाइफाइड के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें 104 मरीज 1 से 16 साल तक के बच्चे हैं। अधिकारियों ने बताया कि पिछले तीन दिनों में सिविल अस्पताल में टाइफाइड के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है, और बाल चिकित्सा वार्ड में 104 मरीजों को भर्ती कराया गया है।

हालात इतने गंभीर हैं कि गांधीनगर सिविल अस्पताल में उल्टी, तेज बुखार और पेट दर्द से पीड़ित बच्चों की बढ़ती संख्या को देखते हुए आनन-फानन में 30 बिस्तरों का एक विशेष बाल रोग वार्ड खोलना पड़ा है। डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों का आना लगातार जारी है। मरीजों में बुखार, पेट दर्द और उल्टी जैसे लक्षण प्रमुख हैं।

जांच में प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां 257 करोड़ रुपये के ’24×7 जलापूर्ति प्रोजेक्ट’ के बावजूद, इंजीनियरिंग अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि पीने के पानी की लाइनें सीवर लाइनों के बिल्कुल सटाकर बिछा दी गई थीं। एक अधिकारी ने बताया कि जब पाइपों में पानी का प्रेशर बढ़ाया गया, तो कमजोर पाइप फट गए और उनमें पास के गटर का गंदा पानी रिसने लगा। अब तक ऐसे 7 लीकेज पॉइंट ढूंढे गए हैं। पानी के सैंपल रिपोर्ट्स में भी पीने का पानी असुरक्षित पाया गया है।

मामला तूल पकड़ता देख प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग की 40 टीमें गठित की है जो घर-घर सर्वे करेंगे। साथ ही नागरिकों को उबला हुआ पानी पीने, घर का बना खाना खाने और क्लोरीन टैबलेट्स से टैंक साफ करने की सलाह दी गई है। वहीं, राज्य के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने शनिवार को गांधीनगर सिविल अस्पताल में स्थिति की समीक्षा की। 

गांधीनगर सिविल अस्पताल की अधीक्षक डॉ. मिताबेन पारिख ने कहा, सेक्टर 24, 26, 28 और आदिवाड़ा से सबसे ज्यादा मरीज आए हैं। सभी की हालत स्थिर है, लेकिन बच्चों की संख्या ज्यादा होने से सतर्कता बरती जा रही है। बता दें कि इंदौर में दूषित पानी से दर्जनों मौतों के बाद गुजरात में यह प्रकोप शहरी पानी सप्लाई की गुणवत्ता पर बड़े सवाल उठा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाइपलाइन रखरखाव और नियमित जांच की कमी से ऐसे हादसे हो रहे हैं।

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से होने वाले मौतों का आंकड़ा बढ़कर 16 हो गया है। शहर में 200 से अधिक मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें करीब 32 लोग ICU में हैं और उनकी हालत गंभीर है। विपक्ष लगातार इस हादसे को लेकर प्रदर्शन कर रहा है। शनिवार को कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल को पीड़ितों से मिलने से रोका गया। इस दौरान जमकर हंगामा देखने को मिला। फिलहाल यहां विभिन्न अस्पताल में एडमिट मरीजों को एक जगह शिफ्ट किया जा रहा है।