प्रयागराज में 5 दिन से अनशन पर बैठे शंकराचार्य की तबियत बिगड़ी, वसंत पंचमी पर भी नहीं किया संगम स्नान

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को तेज बुखार है। उन्होंने डॉक्टरों के कहने पर दवा खाई और वैनिटी वैन में आराम किया। भक्तों की भीड़ बढ़ने पर वे वैनिटी से बाहर आए और पालकी पर बैठे।

Updated: Jan 23, 2026, 04:42 PM IST

प्रयागराज। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की तबीयत बिगड़ गई है। वे प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या से बसंत पंचमी तक पांच दिनों के अनशन पर थे। शंकराचार्य के स्वास्थ्य को लेकर उनके अनुयायियों और समर्थकों में चिंता बनी हुई है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को तेज बुखार है। उन्होंने डॉक्टरों के कहने पर दवा खाई और वैनिटी वैन में आराम किया। भक्तों की भीड़ बढ़ने पर वे वैनिटी से बाहर आए और पालकी पर बैठे। दरअसल, वसंत पंचमी के चलते बड़ी संख्या में शिष्य अविमुक्तेश्वरानंद का आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचे थे। 

हालांकि, जब उनको पता चला कि अविमुक्तेश्वरानंद वैनिटी वैन से बाहर नहीं आए तो वैन के बाहर भीड़ लग गई। करीब 5 घंटे बाद अविमुक्तेश्वरानंद वैनिटी वैन से बाहर आए और पालकी पर बैठ गए हैं। इधर, माघ मेला प्रशासन से शंकराचार्य विवाद पर उनका टकराव खत्म खत्म नहीं हो रहा है। वसंत पंचमी पर उन्होंने संगम स्नान भी नहीं किया।

अविमुक्तेश्वरानंद ने कल मीडिया से कहा था कि जब तक प्रशासन माफी नहीं मांगता, तब तक मैं स्नान नहीं करूंगा। प्रशासन नोटिस-नोटिस खेल रहा है। अभी मेरा मौनी अमावस्या का स्नान नहीं हुआ है, तो मैं वसंत का स्नान कैसे कर लूं? हालांकि, दो नोटिस भेजने के बाद से प्रशासनिक अफसर इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हैं।

अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में सवा लाख मिट्‌टी के शिवलिंग स्थापित करने के लिए लेकर आए थे। हालांकि, मौनी अमावस्या को हुए विवाद के बाद वह स्थापित नहीं कर पाए हैं। इससे पहले, गुरुवार को सीएम योगी ने अविमुक्तेश्वरानंद का नाम लिए बिना कहा था कि किसी को परंपरा बाधित करने का हक नहीं। ऐसे तमाम कालनेमि हैं, जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं। वहीं, डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने आजमगढ़ में कहा था कि मैं ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के चरणों में प्रणाम करता हूं। प्रार्थना है कि वे स्नान कर इस विषय का समापन करें।