MP: स्टाइपेंड संशोधन की मांग पर प्रदेशभर के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल, ओपीडी सेवाएं बंद
मध्य प्रदेश में स्टाइपेंड और एरियर न मिलने से नाराज 8 हजार जूनियर डॉक्टरों ने सोमवार सुबह 9 बजे से हड़ताल शुरू कर दी है। सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ओपीडी सेवाएं ठप हो गई हैं।
मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत रेजिडेंट डॉक्टरों ने लंबित स्टाइपेंड संशोधन को लेकर सोमवार सुबह 9 बजे से हड़ताल शुरू कर दी है। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के नेतृत्व में हो रहे इस आंदोलन के कारण ओपीडी सेवाएं प्रभावित हो गई हैं। डॉक्टरों ने साफ किया है कि मांगें पूरी होने तक ओपीडी में सेवाएं नहीं देंगे। जिससे इलाज के लिए आने वाले मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
JDA के अनुसार, इस विरोध प्रदर्शन में प्रदेश के करीब 8 हजार रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न शामिल हैं। मेडिकल कॉलेजों की व्यवस्था में इन डॉक्टरों की अहम भूमिका मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल कॉलेजों के कामकाज का लगभग 70 प्रतिशत भार यही डॉक्टर संभालते हैं। मरीजों के इलाज से लेकर उनकी निगरानी तक की जिम्मेदारी भी इन्हीं के कंधों पर होती है।
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डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन थिएटर में केवल अति गंभीर मरीजों का ही इलाज किया जाएगा। ऐसे में हर्निया या रॉड इंप्लांट जैसे सामान्य ऑपरेशन फिलहाल टल सकते हैं। इससे प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेजों में इलाज के लिए आने वाले कई मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, आपातकालीन सेवाएं पहले की तरह जारी रखने की बात कही गई है ताकि गंभीर मरीजों को किसी तरह की दिक्कत न हो।
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन का कहना है कि सीपीआई आधारित स्टाइपेंड संशोधन शासन के आदेश के अनुसार एक अप्रैल 2025 से लागू होना था लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। इसके साथ ही अप्रैल 2025 से देय एरियर का भुगतान भी लंबित है। संगठन का आरोप है कि इस मुद्दे को लेकर कई बार शासन और संबंधित विभागों को अवगत कराया जा चुका है लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
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JDA से जुड़े डॉ. ब्रिजेंद्र ने बताया कि मध्य प्रदेश शासन ने 7 जून 2021 को आदेश जारी कर सीपीआई आधारित स्टाइपेंड संशोधन लागू करने की बात कही थी। जिसे एक अप्रैल 2025 से प्रभावी होना था। इसके बावजूद अब तक न तो संशोधित स्टाइपेंड लागू किया गया है और न ही बकाया राशि का भुगतान हुआ है। इसी कारण डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ रही है।
डॉक्टरों ने आंदोलन की जानकारी देने के लिए प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन और विभागाध्यक्षों (एचओडी) को पत्र भी सौंपा है। पत्र में बताया गया है कि सुबह 9 बजे से सभी रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न हड़ताल पर रहेंगे। इस दौरान ओपीडी सहित सभी इलेक्टिव सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा। हालांकि, इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी।
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दरअसल डॉक्टर पिछले तीन दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज करा रहे थे। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के नेतृत्व में शुक्रवार से प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर काली पट्टी बांधकर काम कर रहे थे। उनका कहना है कि इस प्रतीकात्मक विरोध का उद्देश्य जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान समस्या की ओर आकर्षित करना था।
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन का कहना है कि उनका आंदोलन केवल पहले से जारी सरकारी आदेश के क्रियान्वयन और लंबित एरियर के भुगतान की मांग को लेकर है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार जल्द निर्णय लेती है तो आंदोलन समाप्त कर दिया जाएगा लेकिन मांगों को नजरअंदाज किया गया तो विरोध को और तेज किया जा सकता है।
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