विजयपुर से कांग्रेस MLA मुकेश मल्होत्रा का चुनाव निरस्त, ग्वालियर हाईकोर्ट ने BJP नेता रामनिवास को विधायक घोषित किया

मुकेश मल्होत्रा पर आरोप है कि उन्होंने साल 2024 के उपचुनाव नॉमिनेशन में अपने खिलाफ दर्ज क्रिमिनल केस की पूरी जानकारी नहीं दी थी।

Updated: Mar 09, 2026, 05:23 PM IST

ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने विजयपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर सोमवार को अपना फैसला सुना दिया है। हाई कोर्ट की ग्वालियर पीठ ने फैसला सुनाते हुए कांग्रेस MLA मुकेश मल्होत्रा का चुनाव निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने बीजेपी नेता रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया है।

दरअसल, 11 महीने पहले मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री रामनिवास रावत ने हाईकोर्ट में विजयपुर विधानसभा उपचुनाव को चुनौती देते हुए चुनाव याचिका दाखिल की थी। याचिका में मांग की गई थी कि उपचुनाव को निरस्त किया जाए। रावत का आरोप था कि कांग्रेस प्रत्याशी रहे मुकेश मल्होत्रा ने नामांकन पत्र और चुनावी शपथ पत्र में गलत और अधूरी जानकारी दी है। रामनिवास के मुताबिक नॉमिनेशन में अपने खिलाफ दर्ज क्रिमिनल केस की पूरी जानकारी नहीं दी थी। मुकेश ने सिर्फ दो क्रिमिनल रिकॉर्ड बताए थे, जबकि 4 केस छिपाए थे।

इस मामले की सुनवाई के उपरांत कोर्ट ने फैसला सुनाया कि रामनिवास रावत उपचुनाव में दूसरे नंबर पर आए थे, इसलिए मुकेश मल्होत्रा का चुनाव रद्द किया जाता है। साथ ही रावत को विजयपुर का MLA घोषित किया जाता है। मामले पर सुप्रीम कोर्ट के वकील विवेक तन्खा ने कहा कि हम इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। हमने कोर्ट से रिक्वेस्ट की है कि सिर्फ कुछ जानकारी गलत दी गई, इसका मतलब यह नहीं है कि चुनाव में धांधली हुई थी। हमें भरोसा है कि मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलेगी।

बता दें कि रामनिवास रावत श्योपुर जिले की विजयपुर सीट से 6 बार विधायक रहे। 2023 के विधानसभा चुनाव में रामनिवास रावत कांग्रेस के टिकट पर विजयपुर सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद लोकसभा चुनाव के दौरान 30 अप्रैल 2024 को वे भाजपा में शामिल हो गए थे। भाजपा में जाने के बाद रामनिवास को मंत्री बनाया गया। उनके इस्तीफा देने के कारण ही विजयपुर सीट खाली हुई थी। नवंबर 2024 में हुए उपचुनाव में रामनिवास रावत को हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि, अब कोर्ट के आदेश के बाद वह फिर से क्षेत्र के विधायक होंगे। उधर, कांग्रेस इस फैसले के विरुद्ध सर्वोच्च अदालत में अपील करेगी।