MP हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस बने अल्पेश यशवंत कोगजे, राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने दिलाई शपथ

जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने भोपाल के लोक भवन में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 30वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने सीएम मोहन यादव की मौजूदगी में उन्हें शपथ दिलाई।

Updated: Sep 10, 2026, 04:10 PM IST

भोपाल। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने गुरुवार को भोपाल के लोक भवन में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने सांदीपनि सभागार में आयोजित समारोह में उन्हें शपथ दिलाई। इस मौके पर मुख्यमंत्री मोहन यादव, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और हाईकोर्ट के न्यायाधीश व वकील मौजूद थे। जस्टिस कोगजे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 30वें मुख्य न्यायाधीश हैं।

शपथ ग्रहण के बाद राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने जस्टिस कोगजे को पुष्पगुच्छ भेंट कर नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दी। वे शुक्रवार से जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में औपचारिक रूप से मुख्य न्यायाधीश का कार्यभार संभालेंगे। उनके पद संभालने के साथ हाईकोर्ट को करीब तीन महीने बाद स्थायी मुख्य न्यायाधीश मिला है। इससे पहले जस्टिस विवेक रसिया कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

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जस्टिस कोगजे की नियुक्ति देश के आठ हाईकोर्ट में नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के दौरान हुई। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 31 अगस्त 2026 को गुजरात हाईकोर्ट के न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे के नाम की सिफारिश की थी। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर केंद्र सरकार ने उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी की थी।

जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे का जन्म 16 जुलाई 1969 को हुआ था। उन्होंने 1990 में केमिस्ट्री में बीएससी और 1993 में एलएलबी की पढ़ाई पूरी की थी। इसी साल उन्होंने गुजरात में वकालत शुरू की थी। करीब 33 साल के कानूनी अनुभव के बाद वे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद तक पहुंचे।

कानूनी करियर के दौरान उन्होंने गुजरात सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण मामलों में पैरवी की थी। साल 2001 में वे असिस्टेंट गवर्नमेंट प्लीडर और 2002 से 2007 के बीच एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर रहे थे। साल 2008 में उन्हें सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम्स डिपार्टमेंट का स्टैंडिंग काउंसल बनाया गया था। इसके बाद 2011 में वे स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और स्पेशल टास्क फोर्स के स्पेशल काउंसल नियुक्त हुए थे। इस दौरान उन्होंने 2002 के गोधरा दंगों से जुड़े कई संवेदनशील मामलों में गुजरात सरकार का पक्ष रखा था।

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6 अप्रैल 2016 को जस्टिस कोगजे गुजरात हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बने और 15 मार्च 2018 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। सितंबर 2026 तक उन्होंने गुजरात हाईकोर्ट में न्यायाधीश के तौर पर काम किया था। आपराधिक मामलों के अलावा सर्विस, लेबर और अन्य महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई में भी उनकी भूमिका रही है। वे 15 जुलाई 2031 को सेवानिवृत्त होंगे यानी मुख्य न्यायाधीश के तौर पर उनका कार्यकाल करीब चार साल दस महीने रहेगा।

जस्टिस कोगजे की न्यायिक यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण फैसले भी सामने आए हैं। साल 2024 में उन्होंने पत्नी की हत्या के आरोपी पति की जमानत याचिका खारिज की थी। अदालत ने माना था कि आरोपी ने जांच को गुमराह करने का प्रयास किया और उसकी भूमिका हत्या के मामले में महत्वपूर्ण थी। साल 2022 के एक कस्टोडियल डेथ मामले में भी जमानत देने से इनकार किया गया था। मामले में आरोप था कि हिरासत में लिए गए लोगों के साथ मारपीट की गई और उन्हें बिजली का करंट देने की धमकी दी गई। अदालत ने मामले की गंभीर परिस्थितियों को ध्यान में रखा था।

वहीं, साल 2024 में जल निकायों की सुरक्षा से जुड़े मामले में जस्टिस कोगजे की पीठ ने तालाबों, झीलों और अन्य जल स्रोतों में अंधाधुंध लैंडफिलिंग पर चिंता जताई थी। अदालत ने कहा था कि इससे स्थानीय पारिस्थितिकी प्रभावित होने के साथ जलभराव जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। औद्योगिक विवादों से जुड़े मामलों में भी उन्होंने महत्वपूर्ण फैसले दिए थे। एक मामले में अदालत ने कहा था कि सुपरवाइजरी क्षमता में काम करने वाला व्यक्ति औद्योगिक विवाद नहीं उठा सकता। वहीं, लंबे समय तक काम करने वाले कर्मचारी को केवल कॉन्ट्रैक्ट पर होने के आधार पर औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 25एफ के लाभ से वंचित करने को भी अदालत ने उचित नहीं माना था।

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शपथ ग्रहण से एक दिन पहले जस्टिस कोगजे ने लोक भवन में राज्यपाल मंगुभाई पटेल से सौजन्य भेंट की थी। इस दौरान उनकी पत्नी अर्चना अल्पेश कोगजे भी मौजूद थी। लोक भवन पहुंचने पर अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने उनका पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया था। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी इस दौरान उपस्थित रहे थे। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जस्टिस कोगजे को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी। उन्होंने शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने और उन्हें शुभकामनाएं देने की जानकारी साझा की।