FDA ने रद्द किया cipla का दवा बिक्री का लाइसेंस, 11.91 लाख रुपए का स्टॉक भी जब्त

महाराष्ट्र FDA ने सिप्ला के पुणे स्थित वडकी C&F सेंटर का दवा बिक्री लाइसेंस 27 अगस्त से रद्द कर दिया। Reactin Plus की पैकेजिंग, स्टॉक रिकॉर्ड, भंडारण और रिकॉल प्रक्रिया में अनियमितताएं मिली थीं। FDA ने करीब 11.19 लाख रुपए का स्टॉक जब्त किया।

Updated: Aug 29, 2026, 11:13 AM IST

महाराष्ट्र FDA ने दवा कंपनी सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड के पुणे स्थित वडकी C&F सेंटर का औषधि बिक्री लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह कार्रवाई 27 अगस्त से तत्काल प्रभाव से लागू हुई। FDA की जांच में दवाओं के स्टॉक और कंप्यूटर रिकॉर्ड में अंतर, खरीद और बिक्री के दस्तावेजों में खामियां, अनुचित भंडारण और एक्सपायर्ड दवाओं के प्रबंधन में नियमों की अनदेखी सामने आई थी।

महाराष्ट्र FDA ने वडकी स्थित सिप्ला के C&F सेंटर का निरीक्षण किया था। जांच के दौरान मौके पर मौजूद दवाओं और कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज स्टॉक का मिलान नहीं हुआ। इसके अलावा दवाओं की खरीद और बिक्री से संबंधित रिकॉर्ड भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिले।

FDA अधिकारियों को दवाओं के भंडारण में भी गंभीर कमियां मिली। कई दवाएं सीधे जमीन पर रखी गई थी और उन्हें व्यवस्थित रखने के लिए पर्याप्त रैक व पैलेट उपलब्ध नहीं थे। एक्सपायर्ड दवाओं से संबंधित रिकॉर्ड में भी आवश्यक जानकारी नहीं मिली। ऐसी दवाओं को अलग रखने और उनके निस्तारण से जुड़ी निर्धारित प्रक्रिया का भी सही तरीके से पालन नहीं किया गया था।

जांच में रिएक्टिन प्लस टैबलेट की पैकेजिंग भी FDA की कार्रवाई का अहम आधार बनी। यह Schedule-H श्रेणी की प्रिस्क्रिप्शन दवा है। FDA के मुताबिक, इसकी पैकेजिंग पर दर्द कम करने और बुखार घटाने वाली दवा से संबंधित उल्लेख किया गया था लेकिन इसके लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी।

FDA ने इसे दवा संबंधी नियमों का उल्लंघन माना। कार्रवाई के दौरान करीब 11.91 लाख रुपये मूल्य का दवा स्टॉक जब्त किया गया। विभाग ने स्पष्ट किया कि डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवाओं की बिक्री, भंडारण और वितरण निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत ही किया जाना चाहिए।

रिएक्टिन प्लस टैबलेट की पैकेजिंग से जुड़े मामले में FDA ने कंपनी को बाजार में मौजूद गलत जानकारी वाली दवाओं का स्टॉक वापस मंगाने का निर्देश दिया था। हालांकि, जांच के दौरान विभाग ने पाया कि इन निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।

इसके बाद FDA ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर उसका पक्ष पूछा। कंपनी के जवाब और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों की समीक्षा करने के बाद विभाग ने पुणे स्थित C&F सेंटर का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द करने का फैसला किया।

FDA के आदेश के अनुसार, सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड, वडकी, पुणे का दवा बिक्री C&F लाइसेंस 27 अगस्त से रद्द कर दिया गया था। यह लाइसेंस दवाओं की बिक्री और वितरण से संबंधित था। इसके रद्द होने के बाद इस केंद्र को दवाओं की बिक्री और वितरण की अनुमति नहीं रहेगी।

FDA ने कहा कि दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता। दवा कारोबार से जुड़े संस्थानों के लिए सही स्टॉक रिकॉर्ड रखना, दवाओं को निर्धारित परिस्थितियों में सुरक्षित तरीके से रखना और बिक्री व वितरण के सभी नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

विभाग ने विशेष रूप से Schedule-H दवाओं को लेकर नियमों के पालन पर जोर दिया है। FDA के मुताबिक, ऐसी दवाओं के विज्ञापन, बिक्री, भंडारण और वितरण के लिए निर्धारित कानूनी प्रावधानों का पालन जरूरी है। नियमों की अनदेखी पाए जाने पर दवा कंपनियों और विक्रेताओं के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज ने FDA की कार्रवाई पर अपना पक्ष रखा है। कंपनी ने कहा कि उसने पुणे FDA के आदेश को अदालत में चुनौती दी है और मामला फिलहाल विचाराधीन है। ऐसे में कंपनी ने इस स्तर पर कार्रवाई को लेकर आगे टिप्पणी करना उचित नहीं बताया।

सिप्ला ने यह भी कहा कि FDA के आदेश में उसकी दवाओं की सुरक्षा, गुणवत्ता या प्रभावशीलता को लेकर कोई चिंता नहीं जताई गई है। कंपनी के मुताबिक, मामले में मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा कोई मुद्दा भी शामिल नहीं है।

कंपनी ने कहा कि वह पिछले 90 सालों से स्वास्थ्य क्षेत्र में भरोसेमंद संस्था के रूप में काम कर रही है और आगे भी दवाओं की गुणवत्ता, नियमों के अनुपालन और मरीजों की सुरक्षा के उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।