मायावती का बड़ा फैसला: भतीजे आकाश आनंद आउट, अब भतीजी दीपिका संभालेंगी BSP की कमान

बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भतीजी दीपिका आनंद को राजनीति में उतारने के संकेत दिए हैं और साफ किया है कि सभी भतीजों के लिए उनके दरवाजे बंद हो चुके हैं।

Updated: Sep 12, 2026, 07:06 PM IST

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी के भीतर चल रहा राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। बसपा प्रमुख मायावती ने पहले बड़े भतीजे आकाश आनंद पर भरोसा जताया। उन्हें राजनीतिक उत्तराधिकारी तक घोषित कर दिया। लेकिन, पिछले तीन वर्षों में तीन बार बसपा प्रमुख ने आकाश आनंद को तीन बार तमाम पदों से हटा भी दिया। अब उन्होंने कहा है कि BSP में उनके भतीजों को कभी पद नहीं दिया जाएगा।

मायावती ने शनिवार को एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उनके भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे को बसपा में रहकर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा। इस तरह उन्होंने अपने सभी भतीजों को बसपा में कोई पद से साफ इनकार कर दिया है और उन्होंने इसे अपना अंतिम फैसला बताया है। लेकिन दिलचस्प यह है कि भतीजों से मोहभंग के बीच उन्होंने भतीजी दीपिका आनंद को एंट्री का हक दिया है। वह भी आनंद कुमार की ही बेटी हैं, जो मायावती के भाई हैं और लंबे समय से उनके साथ काम कर रहे हैं।

मायावती ने लिखा, 'यदि आगे चलकर मेरे साथ रहते हुए आनन्द कुमार को मेरी मदद के लिए किसी और सदस्य की भी जरूरत पड़ती है तो फिर वह अपनी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनंद को साथ ले सकते हैं। उसकी ईमानदारी, वफादारी व कार्य क्षमता आदि को देखकर पार्टी में उसे अपनी खुद की जिम्मेदारी भी सौंप सकते हैं।' 

दीपिका आनंद फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं और वह आकाश आनंद की बहन हैं। मायावती ने भाई आनंद कुमार को साफ नसीहत दी है कि भविष्य में उनका कोई बेटा यानी आकाश और आनंद में से कोई भी बसपा में कोई जिम्मेदारी नहीं संभालेंगे। इसके आगे मायावती ने लिखा कि यदि दीपिका आनंद तैयार नहीं होती हैं तो फिर पार्टी के दलित वर्ग में से ही अन्य किसी मिशनरी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी दी जा सकती है।

मायावती ने यह भी साफ कर दिया कि आनंद कुमार अपने किसी भी बेटे को व उनके बच्चों के बड़े होने पर उन्हें भी यह जिम्मेदारी नहीं सौंपेंगे। यही नहीं मायावती ने परिवारवाद के आरोपों को लेकर भी सफाई दी और कहा कि मैं एक महिला हूं और सुरक्षा समेत तमाम जरूरतों के लिए किसी को साथ रखने की जरूरत थी। इसी के चलते मैंने अपने भाई आनंद कुमार को साथ रखा था।