Epstein फाइल्स में PM मोदी के नाम पर भड़का विदेश मंत्रालय, 9 साल पुराने ईमेल पर मचा हंगामा
एप्स्टीन फाइल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम आने को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि इजरायल दौरे के अलाव ईमेल की बातें बेकार की बकवास से अधिक कुछ नहीं हैं।
नई दिल्ली। एपस्टीन फाइल्स के खुलासों ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लेकर टेस्ला के मालिक एलन मस्क और बिल गेट्स समेत कई बड़ी हस्तियों के नाम इस सैक्स स्कैंडल में सामने आए हैं। हाल ही में जारी दस्तावेजों के बाद से भारत में भी इसे लेकर हंगामा बढ़ गई है। दरअसल, इस बार सार्वजनिक किए गए फाइल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का भी जिक्र है।
दरअसल, एपस्टीन फाइल्स में 9 जुलाई 2017 का एक मेल सामने आया है। इसमें बाल यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन लिखता है, 'मोदी ने सलाह ली, अमेरिकी राष्ट्रपति के हित में इज़राइल दौरा किया और अंत में बोला, “IT WORKED!” बता दें कि साल 2017 में 25–26 जून को मोदी–ट्रंप मुलाक़ात की मुलाकात हुई थी। इसके बाद 4–6 जुलाई को पीएम मोदी ने इज़राइल का दौरा किया। जबकि 9 जुलाई को एपस्टीन ने यह मेल लिखा।
पीएम मोदी का नाम सामने आने पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि इस तरह का संदर्भ निर्णय क्षमता, पारदर्शिता और कूटनीतिक आचरण पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने इसे एक अस्पष्टीकृत संबंध बताया। वहीं, दिल्ली के पूर्व केबिनेट मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने x पर सवाल उठाया, "एप्सटीन फाइल्स का सच्च क्या है ? प्रधानमंत्री जी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर जेफ्री एप्सटीन से उन्होंने क्या सलाह ली व इस्राइल में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को खुश करने के लिए यह डाँस व गाने का क्या मामला है ? अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि का मामला है इसलिए सच्च सामने आना चाहिए।"
हालांकि सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री और जेफ्री एपस्टीन के बीच किसी तरह का कोई संबंध नहीं रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने बयान जारी कर कहा, "हमने सो-कॉल्ड एपस्टीन फाइल्स में एक ईमेल का संदर्भ देखा है जिसमें प्रधानमंत्री और उनकी इज़राइल यात्रा का जिक्र है। प्रधानमंत्री की जुलाई 2017 की आधिकारिक इज़राइल यात्रा के अलावा, ईमेल में बाकी बातें एक दोषी अपराधी की घटिया कल्पनाएं मात्र हैं, जिन्हें पूरे तिरस्कार के साथ खारिज किया जाना चाहिए।"
इधर भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी ने ईमेल को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और "his advice" जैसे शब्द जोड़कर गलत नैरेटिव बनाया, जबकि मूल ईमेल में ऐसा कोई सीधा संकेत नहीं है कि सलाह एपस्टीन की थी।
बता दें कि जेफरी एपस्टीन को दुनिया के बदनाम लोगों के रूप में जाना जाता है। उसके कारण कई लड़कियों को सुसाइड तक करना पड़ा। उसके खिलाफ जांच हुई तो दुनिया के कई हाई-प्रोफाइल लोगों के नाम आए। एपस्टीन के काले कारोबार में मदद करने वाले ऐसे लोगों के नाम उजागर करने की मांग उठी तो अब उससे संबंध रखने वालों के नाम अमेरिका के न्याय विभाग ने जारी किए हैं। पहली क़िस्त में ज्यादा लोगों के नाम नहीं आए तो बहुत विवाद हुआ। लोगों ने आरोप लगाए कि बड़े लोगों के नाम जानबूझकर छिपा लिए गए। अब 30 लाख पन्नों की नई किश्त जारी की गई है। इसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स, अमेरिका के वाणिज्य सचिव और अरबपति हॉवर्ड लटनिक और ब्रिटिश अरबपति रिचर्ड ब्रैनसन सहित एक देश के राजकुमार के भी नाम इन दस्तावेजों में दर्ज हैं।




