सनातनियों से माफी मांगें मोदी-योगी, शंकराचार्य के साथ दुर्व्यवहार पर भड़के दिग्विजय सिंह
हजारों वर्षों से सनातनी परंपरा चली आ रही है कि शंकराचार्य पालकी में बैठकर गंगा स्नान के लिए जाते हैं। पुलिस ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ जो दुर्व्यवहार किया वह निंदनीय है: दिग्विजय सिंह
प्रयागराज। प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ दुर्व्यवहार की घटना को लेकर देशभर में आक्रोश है। देशभर के संतों ने इस घटना की निंदा की है। प्रसिद्ध निरंजनी अखाड़ा भी शंकराचार्य के समर्थन में उतर आया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इस घटना की निंदा करते हुए पीएम मोदी और सीएम योगी से माफी की मांग की है।
पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि सनातन धर्म के हमारे चार पीठ हैं, द्वारका, पूरी, रामेश्वरम और बद्रीनाथ जोशीमठ। यहां हजारों वर्ष से शंकराचार्य जी की पीठ स्थापित हैं। प्रयागराज में जोशीमठ के शंकराचार्य जी के साथ पुलिस ने दुर्व्यवहार किया। वे मौनी अमावस्या पर स्नान करने जा रहे थे। हजारों वर्ष से ये सनातनी परंपरा चली आ रही है कि जो शंकराचार्य स्नान करने जाते हैं वह पालकी में बैठकर जाते हैं। वह पैदल नहीं जाते हैं।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि हमें इस बात की उम्मीद नहीं थी कि महंत योगी आदित्यनाथ की पुलिस शंकराचार्य जी के साथ दुर्व्यवहार करेगी। हम इस घटना की घोर निंदा करते हैं। शंकराचार्य अन्न और जल त्यागकर सत्याग्रह कर रहे हैं। अविमुक्तेश्वरानंद मेरे गुरुभाई भी हैं। वे भी स्वामी स्वरुपानंद जी के शिष्य हैं। हमारी पूरी संवेदना उनके साथ है। पीएम मोदी और सीएम योगी को सभी सनातनियों से माफी मांगना चाहिए। साथ ही पुलिस के जिस अधिकारी ने यह सब किया है उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होना चाहिए।
दरअसल, मौनी अमावस्या के दिन पालकी और अपने शिष्यों के साथ संगम में स्नान की अनुमति न मिलने पर शंकराचार्य के शिष्यों ने विवाद किया था। इस दौरान पुलिस पर शंकराचार्य के शिष्यों के साथ मारपीट का आरोप लगा। दुर्व्यवहार से आहत होकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठ गए। उन्होंने दो दिन से अनाज का एक दाना भी ग्रहण नहीं किया। अन्न के साथ ही जल भी त्याग दिया है।
इसी बीच माघ मेला प्रशासन ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी किया था। मेला प्राधिकरण ने उन्हें 24 घंटे में यह साबित करने को कहा है कि वे ही असली शंकराचार्य हैं। इसपर अविमुक्तेश्वरानंद जी ने माघ मेला प्रशासन पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कंधे पर बंदूक रखकर जो गलती प्रशासन से हुई है, उसको ये लोग पीछे करना चाह रहे। सुप्रीम कोर्ट का गलत हवाला देकर ये लोग कब तक बच पाएंगे? खुद सरकार ने महाकुंभ में सरकार ने एक पत्रिका छापी थी, उसमें मुझे शंकराचार्य के रूप में छापा गया था।




