जिंदगी की कीमत 2 लाख रुपए नहीं होती, दूषित पानी से मौतों पर उमा भारती ने अपनी ही सरकार को घेरा
उमा भारती ने कहा है कि साल 2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौतें हमारा प्रदेश, हमारी सरकार और हमारी पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित कर गईं। इस पाप का घोर प्रायश्चित करना होगा।
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पानी पीने से अबतक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। दूषित पानी पीने के कारण सैंकड़ों लोग बीमार हैं। इनमें करीब 32 लोगों की स्थिति नाजुक है। उन्हें ICU में भर्ती कराया गया है। इस मामले पर राज्य सरकार की चौतरफा आलोचना हो रही है। भाजपा की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भी इस घटना को लेकर राज्य सरकार को घेरा है।
उमा भारती ने दो लाख मुआवजे के ऐलान पर कहा कि जिंदगी की कीमत 2 लाख रुपए नहीं होती। पूर्व मुख्यमंत्री ने एक एक्स पोस्ट में लिखा, 'साल 2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौतें हमारा प्रदेश, हमारी सरकार और हमारी पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित कर गईं। प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का अवार्ड प्राप्त करने वाले नगर में इतनी बदसूरती, गंदगी, जहर मिला पानी जो कितनी जिंदगियों को निगल गया और निगलता जा रहा है, मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है।'
उमा भारती ने आगे कहा कि जिंदगी की कीमत दो लाख रुपए नहीं होती क्योंकि उनके परिजन जीवन भर दुःख में डूबे रहते हैं। इस पाप का घोर प्रायश्चित करना होगा, पीडित जनों से माफी मांगनी होगी और नीचे से लेकर ऊपर तक जो भी अपराधी हैं उन्हें अधिकतम दंड देना होगा। यह मोहन यादव जी की परीक्षा की घड़ी है। उन्होंने पार्टी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि इंदौर दूषित पानी के मामले में यह कौन कह रहा है कि हमारी चली नहीं। जब आपकी नहीं चली तो आप पद पर बैठे हुए बिसलेरी का पानी क्यों पीते रहे? पद छोड़कर जनता के बीच क्यों नहीं पहुंचे?
उमा भारती ने स्पष्ट कहा कि ऐसे पापों का कोई स्पष्टीकरण नहीं होता या तो प्रायश्चित या दंड। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ इंदौर के मेयर नहीं, मध्य प्रदेश का शासन एवं प्रशासन, इस महापाप के सभी जिम्मेवार लोग जनता के प्रति अपराध के कटघरे में खड़े हैं। बता दें कि दूषित पानी पीने से इंदौर में हुई मौतों को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी मध्य प्रदेश सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा है कि इंदौर में पानी नहीं जहर बांटा गया।
इंदौर में जहरीला पानी पीने से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें 32 को ICU में रखा गया है। 71 मरीजों को इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है। भागीरथपुरा इलाके में अब भी डर का माहौल है, लोग पानी पीने से भी डर रहे हैं। गलियां सुनसान पड़ी हैं क्योंकि ज्यादातर लोग अस्पतालों में हैं।
मामला तूल पकड़ने के बाद मोहन सरकार ने नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव और एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। एडिशनल कमिश्नर सिसोनिया का ट्रांसफर कर दिया है। साथ ही इंचार्ज सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस ले लिया है। उधर, विपक्ष इस घटना को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है। शुक्रवार को युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पुतले को वही दूषित पानी पिलाकर इस घटना का विरोध जताया।




