PM मोदी ने मां गंगा को धोखा दिया, नमामि गंगे योजना की 55 फीसदी राशि क्यों नहीं हुई ख़र्च: खड़गे

खड़गे ने कहा कि नमामि गंगे योजना में मार्च 2026 तक 42,500 करोड़ का फंड इस्तेमाल किया जाना था, पर संसद में दिए गए प्रश्नों के जवाब से पता चलता है कि दिसंबर 2024 तक केवल 19,271 करोड़ रुपये ख़र्च हुए हैं।

Updated: Mar 08, 2025, 05:43 PM IST

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में उत्तराखंड के उत्तरकाशी में मुखवा मंदिर का दौरा किया, जहां उन्होंने मां गंगा के शीतकालीन निवास स्थान पर पूजा अर्चना की। इधर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी मां गंगा को धोखा देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि नमामी गंगे योजना की 55 फीसदी राशि खर्च नहीं हुई।

खड़गे ने एक एक्स पोस्ट में लिखा, 'मोदी जी ने कहा था कि उनको "माँ गंगा ने बुलाया है" पर सच ये है कि उन्होंने गंगा सफ़ाई की अपनी गारंटी को भुलाया है। क़रीब 11 वर्ष पहले, 2014 में, नमामि गंगे योजना लॉंच की गई थी। नमामि गंगे योजना में मार्च 2026 तक ₹42,500 करोड़ का फंड इस्तेमाल किया जाना था, पर संसद में दिए गए प्रश्नों के जवाब से पता चलता है कि दिसंबर 2024 तक केवल ₹19,271 करोड़ रुपये ख़र्च हुए हैं। यानि मोदी सरकार ने नमामि गंगे योजना के 55% फंड ख़र्च ही नहीं किये हैं। माँ गंगा के प्रति इतनी उदासीनता क्यों?' 

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खड़गे ने आगे लिखा, '2015 में मोदी जी ने हमारे NRI साथियों से Clean Ganga Fund में योगदान देने का आग्रह किया था। मार्च 2024 तक इस फंड में ₹876 करोड़ दान दिए गए, पर इसका 56.7% अब तक इस्तेमाल नहीं हुआ है। इस फंड का 53% सरकारी उपक्रमों से दान लिया गया है। नवंबर 2024 का राज्य सभा उत्तर बताता है कि नमामि गंगे के 38% प्रोजेक्ट्स अभी लंबित हैं। Sewage Treatment Plants (STPs) बनाने के लिए कुल आवंटित फंड का 82% ख़र्च किया जाना था पर 39% STPs अभी भी पूरे नहीं हुए हैं, और जो पूरे हुए हैं वो चालू ही नहीं हैं।'

कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे लिखा, 'उत्तर प्रदेश - 75% नाले जिन्हें STPs में जाना था, उसका प्रदूषित पानी, सीधे गंगा जी में जा रहा है, इनमें 3513.16 MLD सीवेज डाला जा रहा है। 97% STPs में नियमों का पालन नहीं हुआ है। (नवंबर 2024)। बिहार - 46% STP चालू नहीं हैं; बाकी faecal coliform levels पर खरे नहीं उतरते (अक्टूबर 2024)। पश्चिम बंगाल: 40 STP काम नहीं कर रहे हैं; 95% NGT के मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं; 76.16 MoEF मानदंडों का पालन नहीं करते हैं (मार्च 2024)।' 

कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा कि नवंबर 2024 में National Green Tribunal (NGT) ने मोदी जी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में गंगा की सफाई बनाए रखने में प्रशासन की विफलता पर कड़ी नाराजगी जताई थी। कड़ी फटकार लगाते हुए ट्रिब्यूनल ने यहां तक सुझाव दिया कि नदी के किनारे एक बोर्ड लगाया जाए, जिसमें लिखा हो कि शहर में गंगा का पानी नहाने के लिए सुरक्षित नहीं है। फ़रवरी 2025 में जारी Central Pollution Control Board (CBCB) की ताज़ा रिपोर्ट में faecal coliform level 2,500 units/100 mL की Safe Limit से बहुत अधिक पाया गया। प्रयागराज के शास्त्री ब्रिज के पास 11,000 units/100 mL और संगम में 7,900 units/100 mL थी। 

कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा कि अन्य शोध के मुताबिक़ Solid Waste की वृद्धि के कारण गंगा जल में पारदर्शिता घटकर मात्र 5% रह गई है, जो गंभीर प्रदूषण का संकेत है। मई और जून 2024 के बीच गंगा में Plastic Pollution में 25% की वृद्धि हुई, जिससे प्रदूषण का संकट और भी बढ़ गया। गंगा ग्राम के नाम पर मोदी सरकार ने केवल शौचालयों का निर्माण कराया है। 5 राज्यों में गंगा किनारे 1,34,106 hectares का Afforestation करना था, जिसकी लागत ₹2,294 करोड़ थी, पर 2022 तक 78% Afforestation नहीं हुआ और 85% फंड इस्तेमाल नहीं हुए, ऐसा RTI ने ख़ुलासा किया है। उन्होंने आखिर में लिखा है कि गंगा जीवनदायनी है। भारत की संस्कृति और उसकी आध्यात्मिक धरोहर है, पर मोदी सरकार ने गंगा सफ़ाई के नाम पर माँ गंगा से केवल धोखा ही किया है।