माघ मेले से हमेशा के लिए बैन कर देंगे, जगतगुरू स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को योगी सरकार की धमकी

प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस भेजा है जिसमें पूछा गया है कि क्यों न आपको हमेशा के लिए माघ मेले से बैन कर दिया जाए। अगर 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो संस्था को दी गई जमीन और सुविधाएं रद्द की जा सकती हैं।

Updated: Jan 22, 2026, 01:05 PM IST

प्रयागराज। जगतगुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है।प्रयागराज मेला प्रशासन ने 48 घंटे के भीतर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस भेजा है। इसमें मौनी अमावस्या के दिन बैरियर तोड़ने और जबरन भीड़ में बग्घी घुसाने को लेकर सवाल किए गए हैं। साथ ही माघ मेला से हमेशा के लिए प्रतिबंधित करने की धमकी भी दी गई है।

नोटिस में पूछा गया है कि क्यों न आपको हमेशा के लिए माघ मेले से बैन कर दिया जाए। अगर 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो संस्था को दी गई जमीन और सुविधाएं रद्द की जा सकती हैं। मामले पर अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगिराज ने कहा कि प्रशासन ने बुधवार शाम 7 बजे नोटिस चस्पा किया, जिस पर 18 जनवरी की डेट थी। 

अविमुक्तेश्वरानंद ने गुरुवार सुबह 8 बजे तीन पेज में जवाब मेला ऑफिस भिजवाया। इसमें आरोपों को गलत और भ्रामक बताया है। बता दें कि योगी सरकार और मेला प्रशासन के कृत्यों से देशभर के संतों में आक्रोश है। मशहूर कथावाचक अनिरुद्धाचार्य, अविमुक्तेश्वरानंद से मिलने उनके शिविर पहुंचे। हालांकि, इस समय अविमुक्तेश्वरानंद पदयात्रा पर हैं, इसलिए मुलाकात नहीं हो सकी।

उधर, द्वारका पीठ और गोवर्धन पीठ के शंकराचार्यों ने भी भाजपा सरकार के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद महाराज ने अविमुक्तेश्वरानंद को मौनी अमावस्या पर स्नान करने से रोके जाने की निंदा की है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज मेला प्रशासन को माफी मांगनी चाहिए। ब्राह्मणों को पुलिस ने चोटी पकड़कर घसीटा। उन्होंने आगे कहा कि शिखा के अंदर ब्रह्मरंध्र होता है, इसका अपमान नहीं किया जाता। यह शासन का अहंकार है। सत्ता हर दिन नहीं रहेगी। कभी अपनी सत्ता का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। 

वहीं, गोवर्धन पीठ पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि धार्मिक छत्र का नेतृत्व सरकार पास रखना चाहती है। हम कोई वकील नहीं हैं कि सरकार को सुझाव दें, लेकिन मैं संविधान का भी जानकार हूं। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग मुझसे वकालत और निर्णय लेने के तरीके के बारे में पूछते रहते हैं। जब मैं शंकराचार्य नहीं था, तब भी 32-32 लोगों ने मुझसे प्रशिक्षण लिया था।

गंगा स्नान को लेकर शुरू हुए विवाद के बीच अविमुक्तेश्वरानंद गो-प्रतिष्ठा प्रेरणा यात्रा निकाल रहे हैं। उनके साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु और साधु-संत हैं। शिष्य ढोल-नगाड़े बजाते हुए आगे बढ़ रहे हैं। इस दौरान मृत्युंजय धाम के महामंडलेश्वर मृत्युंजय पुरी ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की गौ प्रतिष्ठा प्रेरणा यात्रा के दौरान और अपना समर्थन दिया है।