जापान के कुमामोटो में 6.8 तीव्रता का भूकंप, 48 हजार से ज्यादा घरों की बिजली गुल, सुनामी की चेतावनी

जापान के कुमामोटो में मंगलवार को 6.8 तीव्रता का भीषण भूकंप आया। जिससे सड़कें फट गईं और 48,000 से अधिक घरों की बिजली गुल हो गई। कई जगह आग लगने और लोगों के घायल होने की खबर है।

Updated: Jul 28, 2026, 04:35 PM IST

जापान के दक्षिणी द्वीप क्यूशू के कुमामोटो प्रीफेक्चर में मंगलवार को एक शक्तिशाली भूकंप का झटका महसूस हुआ। जापान मौसम एजेंसी (JMA) के अनुसार, भूकंप की अंतिम पुष्टि 6.8 तीव्रता के रूप में की गई। जबकि, शुरुआती रिपोर्ट में इसकी तीव्रता 7.1 बताई गई थी। भूकंप का केंद्र कुमामोटो के तटीय शहर उटो के पास जमीन से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। शुरुआती झटकों के बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी लेकिन स्थिति का आकलन करने के बाद एजेंसी ने इसे वापस ले लिया। भूकंप के इन जोरदार झटकों के चलते मौसम विभाग ने वहां सुनामी का अलर्ट जारी किया है। 

तेज झटकों के कारण कुमामोटो और आसपास के इलाकों में जनजीवन प्रभावित हो गया। कई सड़कों पर गहरी दरारें पड़ गई हैं। जबकि, कुछ स्थानों से आग लगने और लोगों के घायल होने की खबरें भी सामने आई हैं। राहत और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं और प्रशासन नुकसान का विस्तृत आकलन करने में जुटा हुआ है।

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भूकंप का सबसे बड़ा असर बिजली व्यवस्था पर पड़ा है। क्यूशू इलेक्ट्रिक पावर के मुताबिक, 48,300 से अधिक घरों की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। कंपनी की टीमें युद्धस्तर पर बिजली बहाल करने का काम कर रही हैं। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे गिरे हुए या क्षतिग्रस्त बिजली के तारों से दूर रहें और बिजली लाइनों में किसी भी तरह की खराबी दिखने पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना दें।

जापान मौसम एजेंसी ने चेतावनी दी है कि मुख्य भूकंप के बाद अगले कुछ दिनों तक आफ्टरशॉक आने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में प्रभावित इलाकों के लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। भूकंप के बाद एहतियातन कुमामोटो प्रीफेक्चरल म्यूजियम ऑफ आर्ट ने बुधवार को बंद रखने का फैसला लिया है। संग्रहालय प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय आगंतुकों और कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

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जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है। यह देश प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर क्षेत्र में स्थित है और चार प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों के संगम पर बसा है। इसी वजह से यहां हर साल औसतन 1,500 से अधिक भूकंप दर्ज किए जाते हैं। हालांकि, भूकंप रोधी निर्माण तकनीक, आधुनिक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, नियमित आपदा अभ्यास और मजबूत राहत व्यवस्था के कारण बड़े भूकंपों में भी अन्य देशों की तुलना में जान-माल का नुकसान अपेक्षाकृत कम रहता है।