ग्वालियर में हूटर का रौब दिखाना पड़ा भारी, BJP नेता और डॉक्टर समेत 11 पर पुलिस की कार्रवाई

ग्वालियर ट्रैफिक पुलिस ने अवैध हूटर लगाने वाले VIP वाहनों के खिलाफ बड़ा चेकिंग अभियान चलाया। कार्रवाई में BJP नेता, जिला पंचायत सदस्य और डॉक्टर समेत 11 चालकों के हूटर उतरवाकर 33 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया।

Updated: Aug 10, 2026, 06:29 PM IST

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में चार पहिया वाहनों पर बिना पात्रता हूटर लगाकर घूमने वालों के खिलाफ ट्रैफिक पुलिस ने बड़ा अभियान चलाया है। चार घंटे तक 12 प्रमुख चौराहों पर हुई चेकिंग में जिला पंचायत सदस्य, भाजपा नेता और डॉक्टर समेत 11 वाहन चालक हूटर लगे वाहनों के साथ पकड़े गए। पुलिस ने सभी के हूटर उतरवाकर चालान काटे और उनसे कुल 33 हजार रुपये का जुर्माना वसूला। खास बात यह रही कि कार्रवाई के दौरान किसी तरह की सिफारिश से बचने के लिए ट्रैफिक पुलिस के थाना प्रभारी से लेकर एसआई, एएसआई, हवलदार और सिपाहियों तक के मोबाइल फोन बंद रखे गए थे।

ट्रैफिक पुलिस की यह कार्रवाई शाम के समय करीब चार घंटे तक चली थी। एएसपी सुजावल जग्गा के निर्देश पर ट्रैफिक थाना प्रभारी धनंजय शर्मा, अभिषेक रघुवंशी और केपीएस तोमर की टीमों ने 12 चौराहों पर वाहनों की जांच की। अभियान का मुख्य उद्देश्य ऐसे वाहन चालकों पर कार्रवाई करना था जो नियमों के तहत अनुमति नहीं होने के बावजूद अपनी गाड़ियों पर हूटर लगाकर आम लोगों के बीच प्रभाव जमाने की कोशिश करते हैं।

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पुलिस ने कार्रवाई के दौरान जिला पंचायत सदस्य, भाजपा नेता और चिकित्सक सहित कई लोगों की गाड़ियों से हूटर हटवाए। नियम तोड़ने वाले सभी 11 वाहन चालकों के चालान किए गए और जुर्माना जमा करने के बाद ही उन्हें वाहन ले जाने की अनुमति दी गई। इस कार्रवाई के अलावा यातायात के अन्य नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर भी कार्रवाई की गई।

गोला का मंदिर क्षेत्र में चेकिंग के दौरान पुलिस ने एक ऐसी कार को भी रोका जिस पर हूटर के साथ कांच पर ब्लैक फिल्म लगी हुई थी। कार चालक ने खुद को ग्वालियर में पदस्थ एक महिला निरीक्षक का रिश्तेदार बताया और पुलिसकर्मियों पर प्रभाव डालने की कोशिश की। उसने संबंधित निरीक्षक से बात कराने का प्रयास किया।

बताया गया कि महिला निरीक्षक ने भी कार्रवाई रोकने के लिए फोन करने की कोशिश की लेकिन अभियान के दौरान ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के मोबाइल बंद रखे गए थे। ऐसे में कोई सिफारिश मौके पर काम नहीं आई। पुलिस ने नियम के मुताबिक कार का चालान किया और जुर्माना जमा होने के बाद ही उसे छोड़ा।

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चेकिंग के दौरान सिर्फ एक मामले में ही सिफारिश की कोशिश नहीं हुई। झांसी रोड और कंपू क्षेत्र में चल रही कार्रवाई के दौरान दूसरे विभागों के अधिकारियों के फोन भी वाहन छोड़ने के लिए आते रहे। कुछ जनप्रतिनिधियों की ओर से भी फोन कर कार्रवाई से वाहनों को बाहर रखने का अनुरोध किया गया लेकिन पुलिस ने अभियान के दौरान किसी की सिफारिश स्वीकार नहीं की।