इटारसी में BJP नेता के बालिका गृह से 5 नाबालिग लापता, SP ने जांच के दिए आदेश
इटारसी में भाजपा नेता द्वारा संचालित एक निजी बालिका गृह से पिछले 3 वर्षों में 5 नाबालिग लड़कियों के लापता होने से हड़कंप मच गया है। शुक्रवार रात इस मामले में 5 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गईं।
इटारसी। नर्मदापुरम जिले के इटारसी स्थित एक निजी बालिका गृह से पिछले तीन सालों के दौरान पांच नाबालिग लड़कियों के लापता होने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। शुक्रवार रात इस मामले में इटारसी थाने में गुमशुदगी और अपहरण की पांच अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई। मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब लड़कियां अलग-अलग समय पर लापता हुई थी तब उनकी शिकायत पर तत्काल कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
पुलिस के अनुसार, बालिका गृह की केयरटेकर रानी सिंह राजपूत ने आवेदन देकर बताया कि संस्था से पिछले तीन सालों में अलग-अलग समय पर पांच नाबालिग बच्चियां गायब हुई। इसके आधार पर पुलिस ने शुक्रवार रात सभी मामलों में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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मामले में देरी इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि कानून के मुताबिक, किसी भी नाबालिग के लापता होने की सूचना मिलते ही पुलिस को तत्काल अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू करनी होती है। हालांकि, इस मामले में कुछ घटनाओं के एक से दो साल बाद एफआईआर दर्ज की गई। जिसकी वजह से संस्था और प्रशासन दोनों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह बालिका गृह भाजपा से जुड़े मनीष ठाकुर द्वारा संचालित किया जाता है। उनकी पत्नी नगर पालिका में सभापति हैं। खास बात यह है कि मनीष ठाकुर महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से पॉक्सो (POCSO) मामलों में सपोर्ट पर्सन के रूप में भी नियुक्त हैं। उनकी जिम्मेदारी नाबालिग पीड़ितों को कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया में सहयोग देने की है लेकिन उनकी ही संस्था से लगातार बच्चियों के लापता होने की घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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इटारसी थाना प्रभारी सौरभ पांडे ने बताया कि उन्होंने करीब एक महीने पहले ही थाना प्रभारी का पदभार संभाला है। उनके मुताबिक, शुक्रवार रात शिकायत प्राप्त होते ही तत्काल पांचों मामलों में एफआईआर दर्ज कर ली गई। पहले कभी शिकायत दी गई थी या नहीं इसकी जानकारी फिलहाल उनके पास नहीं है।
दूसरी ओर नर्मदापुरम के पुलिस अधीक्षक सांई कृष्णा एस. थोटा ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि नाबालिगों के लापता होने के मामलों में एफआईआर तत्काल दर्ज होना चाहिए था। आखिर इसमें देरी क्यों हुई, तत्कालीन पुलिस अधिकारियों या संस्था स्तर पर किसकी लापरवाही रही इसकी जांच इटारसी एसडीओपी को सौंपी गई है। एसपी ने स्पष्ट किया कि जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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