जी भाईसाहब जी: नरोत्तम मिश्रा रोये, इमरती हँसी, जुड़ गया ज्योतिरादित्य सिंधिया कनेक्शन

MP Politics: दतिया विधानसभा उपचुनाव बीजेपी की राजनीति का ऐसा कथानक है जहां इतिहास अपनेआप को दोहरा रहा है। पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट वैसे ही कट गया जैसे कभी उन्हें बाकी सब नेताओं को किनारे कर टिकट दिया गया था।

Updated: Jul 15, 2026, 06:56 AM IST

दतिया में बीजेपी का मंच सजा था। टिकट न मिलने के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा पहली बार सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए वे जितने जोश में थे, बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को जिताने की बात कहते–कहते वे मंच पर ही रो पड़े। भावातिरेक में वे कुछ बोल नहीं पाए और अपनी सीट पर आ कर बैठ गए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कंधे पर हाथ रख ढांढस बंधाया। वायरल हुए इस दृश्य में पीछे बैठी पूर्व मंत्री इमरती देवी हँसती हुई दिखाई दी। 

इस हँसने को नरोत्तम मिश्रा पर कटाक्ष की तरह देखा गया। सभी जानते हैं कि इमरती देवी और नरोत्तम मिश्रा राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। दोनों के बीच का विवाद काफी पुराना और चर्चित रहा है। दोनों ही नेता बीजेपी से जुड़े हुए हैं, लेकिन अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि और गुटों से आते हैं। इमरती देवी ने आशुतोष तिवारी को टिकट देने पर खुशी भी जाहिर की थी। डॉ. नरोत्तम मिश्रा के रोने पर समर्थकों ने तीखी प्रतिक्रिया दी तो लोगों ने गिना दिया कि नरोत्तम के कारण किन –किन को कब–कब रोना पड़ा है।

दतिया विधानसभा उपचुनाव बीजेपी की राजनीति का ऐसा कथानक है जहां इतिहास अपनेआप को दोहरा रहा है। पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट वैसे ही कट गया जैसे कभी उन्हें बाकी सब नेताओं को किनारे कर टिकट दिया गया था। याद दिलाया गया कि जैसे नरोत्तम मिश्रा के लिए खुश हुए थे वैसे ही आशुतोष तिवारी के लिए भी खुश होना चाहिए। कई लोगों ने 2020 में कांग्रेस सरकार गिराने में डॉ. नरोत्तम मिश्रा की भूमिका तथा मंत्री रहते हुए उनके व्यवहार से मिली तकलीफों को याद कर नरोत्तम मिश्रा के आँसुओं को सजा करार दिया।

जबकि इमरती देवी की हँसी नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों को नागवार गुजरी। उन्होंने तंज किया कि इमरती देवी के चेहरे पर हँसी है क्योंकि उन्होंने संगठन नहीं नेता ज्योतिरादित्य का साथ चुना। जबकि डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने संगठन का निर्णय माना। यह इमरती देवी के कांग्रेस छोड़ कर ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बीजेपी में जाने पर तंज है।

फुल सिंह बरैया का बयान सुन कहा, पहली बार सच बोला

दतिया उपचुनाव में टिकट वितरण के बाद हुए घमासान के बीच कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया का एक बयान चर्चा में आ गया। कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट न देने पर बीजेपी की आलोचना की। बरैया ने कहा, “मुख्यमंत्री की दौड़ में रहे तीन ब्राह्मण नेताओं की बीजेपी ने राजनीतिक हत्या कर दी है। ये तीन नेता हैं, डॉ. नरोत्तम मिश्रा, अनुप मिश्रा और गोपाल भार्गव।”

फूल सिंह बरैया के इस बयान पर नरोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलने से आहत समुदाय ने खूब प्रतिक्रियाएं दीं। अपनी प्रतिक्रियाओं में लोगों ने कहा कि कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने पहली बार सच कहा है। फूल सिंह बरैया अपने तीखे बोल तथा विवादों को जन्म देने वाले बयानों के लिए जाने जाते हैं। आमतौर पर जो समूह फूल सिंह बरैया के बयानों से लाल पीला होता रहा है वह इसबार खुश है क्योंकि फूल सिंह बरैया ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए ब्राह्मणों के बहाने नरोत्तम मिश्रा के पक्ष में आवाज उठाई है।

कांटे से कांटा निकालने का जतन

दतिया उप चुनाव पर देशभर की निगाहें लगी हुई हैं। पहले कांग्रेस से चुने गए राजेंद्र भारती का चुनाव निरस्त होना फिर नामांकन पत्र खरीद चुके बीजेपी के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया जाना और इस आक्रोश से भड़की हिंसा सुर्खियों में बनी हुई है। ऐसे में चुनाव जीतना बीजेपी के लिए नाक का सवाल बन गया है। बीजेपी संगठन ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा की नाराजगी दूर कर उनके समर्थकों के इस्तीफे स्वीकार न कर जिला संगठन को बचाए रखने का काम किया है लेकिन चुनाव प्रबंधन के लिए अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है। चुनाव की बागड़ोर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव प्रभारी बना दिया। यह कांटे से कांटा निकालने की जुगत माना जा रहा है। 

आपको याद होगा, नवंबर 2024 में विजयपुर में हुए उपचुनाव में बीजेपी के प्रत्याशी रामनिवास रावत हार गए थे। इस हार के कारणों की पड़ताल में पाया गया था कि उपचुनाव में क्षेत्र के प्रभावशाली नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया बिल्कुल भी सक्रिय नहीं थे। जबकि सिंधिया खेमें से संकेत दिया गया था कि उन्हें बुलाया नहीं गया था। इस गफलत को रोकने के लए बीजेपी ने इस बार ज्योतिरादित्य सिंधिया को ही प्रभारी बना कर जितवाने की जिम्मेदारी दे दी है।

खासबात यह है कि स्टार प्रचारकों की सूची में डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम 16 वें नंबर पर है। यानी, पार्टी ने नाम का भी रहम दिखाने की कोशिश नहीं की है। बल्कि एक संदेश ही दिया है। संदेश यह कि चुनाव प्रचार में नरोत्तम मिश्रा के समर्थक कुछ गड़बड़ करेंगे तो भी सिंधिया गुट बी टीम की तरह इस अनुरूप रणनीति तैयार कर काम करेगा। उधर, कांग्रेस ने युवा नेताओं को मोहल्लों में उतार कर जमीन मजबूत करने का जतन किया है। कांग्रेस ने जातीय समीकरणों का साधने की रणनीति पर भी काम शुरू कर दिया है। साफ है कि अगले कुछ दिन दतिया राजनीति की सुर्खियों में छाया रहने वाला है। 

सीएम मोहन यादव को सलाह शिवराज के पथ पर मत चलो

किसान मुद्दे पर प्रदेश सरकार का मौन किसान संगठनों को खल रहा है। मूंग की शत प्रतिशत खरीदी की मांग को लेकर 15 जुलाई को हरदा में चक्काजाम का आयोजन किया गया है। मूंग उत्पादक क्षेत्रों में आंदोलन और धारदार होने वाला है। इस घोषणा के साथ किसान नेता केदार सिरोही ने मुख्यमंत्री की सलाह दी है कि वे शिवराज सिंह चौहान के नक्शे कदम पर न चलें और मूंग खरीद पर किसानों को परेशान न करें। उन्होंने कहा कि मोहन जी मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था कृषि हैं। आप शिवराज सिंह चौहान के चक्रव्यूह में फंस कर कर कृषि को बर्बाद क्यों कर रहे हैँ? लोग आपको किसान विरोधी मानने लगेंगे, इसलिए अपनी व्यक्तिगत छवि को ख्याल मे रखते हुए, किसानों के पक्ष मे निर्णय लीजिए। 

केदार सिरोही ने किसान संघ पदाधिकारियों की चुप्पी को भी राजनीतिक बताते हुए सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा है कि किसान तू रहेगा मौन, तेरी सुनेगा कौन...यह नारा भारतीय किसान संघ का हैँ। अब यह नारा उनके कार्यकर्ताओ द्वारा लगाना चाहिए कि पदाधिकारी रहेंगे मौन तो सुनेगा कौन? किसान संघ ने हरदा में किसानों के हक़ कि लड़ाई शुरू की और वह खुद अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा हैँ। खुद की सरकार मे किसान संघ की सुनवाई नहीं हो रही हैँ। उनकी सुनवाई नहीं हो रही है, जिन्होंने बीजेपी को सत्ता लाने और बनाए रखने के लिए 45 साल से काम किया हैँ।