सिंधिया के गढ़ में बढ़ी भाजपा की मुश्किलें, शिवपुरी नगर पालिका के 18 पार्षदों ने एक साथ दिया इस्तीफा
इन 18 पार्षदों में 12 भाजपा के दो निर्दलीय, जबकि चार कांग्रेस के पार्षद शामिल हैं। इस्तीफा देने वाले पार्षदों ने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़ी नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं।

शिवपुरी। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र में आने वाले शिवपुरी में भाजपा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। यहां नगर पालिका के 18 पार्षदों ने एक साथ इस्तीफा दिया है। इन 18 पार्षदों में 12 भाजपा के दो निर्दलीय, जबकि चार कांग्रेस के पार्षद शामिल हैं। इस्तीफा देने वाले पार्षदों ने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़ी नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं।
दरअसल शिवपुरी नगर पालिका में पिछले कई दिनों से सियासी घमासान चल रहा है। यहां के पार्षद नगर पालिका की अध्यक्ष से बेहद खफा हैं। नाराज पार्षदों का आरोप है कि नगर पालिका अध्यक्ष अपनी मनमानी कर रही हैं और क्षेत्र में उनके वार्डों में विकास कार्य रुके पड़े हैं। ये नाराज पार्षद नगर पालिका शिवपुरी के कई भ्रष्टाचारों को उजागर करके कार्रवाई की मांग भी कर रहे थे।
पूर्व में इन्हीं पार्षदों के द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन इस अविश्वास प्रस्ताव के मामले में इन पार्षदों में आपस में फूट पड़ जाने के कारण कलेक्टर ने अविश्वास प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था। इन पार्षदों में से कुछ ने अविश्वास प्रस्ताव को वापस लेने की आवेदन कलेक्टर को दिया था, जिसके कारण इन पार्षदों में दो गुट बंट गए थे, लेकिन अब इन्हीं पार्षदों ने आपसी एकता का प्रदर्शन करते हुए इस्तीफे दे दिए।
फिलहाल उनके इस्तीफा स्वीकार किए जाने के संबंध में कलेक्टर ने स्थिति को स्पष्ट नहीं किया है। लेकिन राजनीतिक उठा-पटक के इस दौर में सिंधिया के गढ़ में नगर पालिका में जो कुछ हो रहा है वह भाजपा के लिए मुश्किलें खड़े करने जैसा है। बता दें कि शिवपुरी नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा पूर्व खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के समर्थकों में गिनी जाती हैं।
इन्हें हटाने के लिए बीते 11 जून को नगर पालिका से जुड़े 22 पार्षदों ने करैरा स्थित बगीचा सरकार हनुमान जी के मंदिर पर नगर पालिका अध्यक्ष को पद से हटाने की सौगंध ली थी। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर पर जो कसम खाई जाती है वह टूटती है तो संबंधित व्यक्ति को कोड हो जाता है। इन मान्यताओं के तहत इन पार्षदों ने गायत्री शर्मा को हटाने की जो शपथ ली थी, उसी क्रम में अपना इस्तीफा कलेक्टर कार्यालय में जाकर दे दिया और अपना वादा निभाया।