UP, उत्तराखंड और पंजाब में अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी BSP, मायावती का ऐलान

लखनऊ में आयोजित बैठक के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने बड़ा ऐलान किया है। बहुजन समाज पार्टी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के आगामी चुनाव में बिना किसी गठबंधन के अकेले मैदान में उतरेगी।

Updated: Aug 25, 2026, 03:03 PM IST

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में होने वाले आगामी चुनावों को लेकर पार्टी की रणनीति साफ कर दी है। उन्होंने ऐलान किया है कि बसपा तीनों राज्यों में किसी दल के साथ गठबंधन किए बिना अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरेगी। लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में हुई संगठन की विस्तृत बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। मायावती ने कहा कि पार्टी इन चुनावों में बेहतर प्रदर्शन के लिए पूरी ताकत से काम करेगी और उम्मीदवारों के चयन में कर्मठ व ईमानदार लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।

मायावती ने सोशल मीडिया पर जारी पोस्ट के साथ पार्टी की प्रेस रिलीज भी साझा की। इसमें बताया गया कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की तरह पंजाब में भी बसपा अकेले चुनाव लड़ेगी। बैठक में पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और चुनावी तैयारियों को तेज करने पर भी चर्चा हुई। साथ ही उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया को पारदर्शी रखने पर जोर दिया गया। जबकि, पंजाब में पार्टी का जनाधार बढ़ाने के लिए विशेष रणनीति बनाने का निर्णय लिया गया।

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बैठक के दौरान मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि अकेले चुनाव लड़ने के फैसले के बाद विरोधी दल यह प्रचार कर सकते हैं कि बसपा के वोट और सीटें घट जाएंगी। ऐसे में कार्यकर्ताओं को अफवाहों से प्रभावित होने के बजाय संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। मायावती ने पदाधिकारियों से विरोधियों के साम, दाम, दंड और भेद जैसे राजनीतिक हथकंडों का मजबूती से मुकाबला करने का आह्वान किया।

पंजाब को लेकर मायावती ने कहा कि राज्य की जनता आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और भाजपा समेत विभिन्न राजनीतिक दलों की सरकारों और उनके रवैये से परेशान है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से पंजाब में बसपा का आधार मजबूत करने और जनता के बीच बदलाव के विकल्प के तौर पर पार्टी को स्थापित करने के लिए काम करने को कहा।

बैठक में बसपा संस्थापक कांशीराम की जयंती को लेकर भी फैसला लिया गया। पार्टी 9 अक्टूबर को कांशीराम की जयंती देशभर में बड़े स्तर पर मनाएगी। इसके साथ ही 15 जनवरी 2027 को मायावती के जन्मदिन के अवसर पर जनकल्याणकारी दिवस आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इस दौरान पिछले आयोजन की तुलना में समाज से अधिक आर्थिक सहयोग जुटाने की योजना है। पार्टी का कहना है कि इस राशि का इस्तेमाल अंबेडकरवादी विचारधारा के प्रचार प्रसार और बसपा के आंदोलन को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।

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बसपा ने आखिरी बार 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में बसपा को 10 लोकसभा सीटों पर जीत मिली थी। जबकि, समाजवादी पार्टी के पांच उम्मीदवार संसद पहुंचे थे। चुनाव के बाद मायावती ने गठबंधन खत्म कर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि गठबंधन से बसपा को अपेक्षित राजनीतिक लाभ नहीं मिला।

इसके बाद बसपा ने ज्यादातर चुनाव अपने दम पर लड़े। हालांकि, पार्टी का चुनावी प्रदर्शन लगातार कमजोर हुआ है। साल 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बसपा सिर्फ एक सीट जीत सकी थी। वहीं, साल 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का कोई भी उम्मीदवार संसद नहीं पहुंच पाया था। ऐसे में अब यूपी, उत्तराखंड और पंजाब में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला बसपा के लिए संगठन और जनाधार को दोबारा मजबूत करने की बड़ी राजनीतिक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।

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