इंदौर के सरकारी अस्पतालों का पानी दूषित, 15 में से 6 सैंपल में मिले मल-मूत्र वाले बैक्टीरिया

इंदौर के सरकारी अस्पतालों में पानी की गुणवत्ता जांच में चिंताजनक स्थिति सामने आई है। नगर निगम की लैब ने 15 सैंपल जांचे। जिनमें 6 में कोलीफॉर्म और 5 में E. coli मिला।

Updated: Oct 03, 2026, 10:51 AM IST

इंदौर के सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी की गुणवत्ता पर नगर निगम की जांच ने चिंता बढ़ा दी है। वाटर टेस्टिंग लैब की जांच में 15 सैंपलों में से 6 में कोलीफॉर्म और 5 में E. coli बैक्टीरिया मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक, पीसी सेठी अस्पताल के बोरवेल के पानी में सबसे ज्यादा कोलीफॉर्म 118 और E. coli 24 MPN/100 ml दर्ज किया गया है।

नगर निगम की टीम ने शहर के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों और उनके परिसरों से पानी के नमूने लेकर जांच की थी। तय गुणवत्ता मानक के अनुसार, 100 मिलीलीटर पानी में कोलीफॉर्म और E. coli की मौजूदगी नहीं होनी चाहिए। जांच रिपोर्ट को नेता प्रतिपक्ष ने सार्वजनिक किया है।

सबसे अधिक दूषित सैंपल पीसी सेठी अस्पताल के बोरवेल का मिला। वहां कोलीफॉर्म की मात्रा 118 MPN/100 ml और E. coli 24 MPN/100 ml थी। अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर स्थित RO यूनिट से लिए गए पानी में भी दोनों बैक्टीरिया मिले। हालांकि, उनकी मात्रा 1 MPN/100 ml से कम थी।

गोविंद बल्लभ पंत जिला अस्पताल के वाटर कूलर का पानी भी जांच में मानक के अनुरूप नहीं मिला। वहां कोलीफॉर्म 64 और E. coli 5 MPN/100 ml दर्ज हुआ। यह पानी मरीजों और उनके साथ आने वाले परिजनों के पीने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

चाचा नेहरू अस्पताल में भी दो अलग-अलग स्रोतों से लिए गए पानी में बैक्टीरिया पाए गए। बिल्डिंग के बोरवेल के सैंपल में कोलीफॉर्म 10 और E. coli 4 MPN/100 ml मिला। वहीं, मुख्य गेट के दाईं ओर स्थित RO यूनिट के पानी में कोलीफॉर्म 26 और E. coli 16 MPN/100 ml दर्ज किया गया।

MY अस्पताल के पास के बोरवेल से लिए गए पानी में कोलीफॉर्म 9 और E. coli 7 MPN/100 ml मिला। हालांकि, अस्पताल के नर्मदा बल्क कनेक्शन और छठी मंजिल के टैप से लिए गए सैंपल में दोनों बैक्टीरिया की मात्रा 1 MPN/100 ml से कम थी।

मेंटल अस्पताल, बाणगंगा के बोरिंग के पानी में कोलीफॉर्म 23 और E. coli 1 MPN/100 ml से कम मिला। इसी अस्पताल के D.L., IPT Mail Block RO और मशीन इमरजेंसी के RO से लिए गए पानी में भी दोनों बैक्टीरिया की मात्रा 1 MPN/100 ml से कम थी।

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के तीन स्थानों से लिए गए सैंपल (डायलिसिस फ्लोर RO, बेसमेंट RO और कैंटीन टैप) में कोलीफॉर्म और E. coli दोनों की मात्रा 1 MPN/100 ml से कम दर्ज हुई।

जांच के आंकड़ों के मुताबिक, कुछ अस्पतालों में अलग-अलग स्रोतों के पानी की गुणवत्ता में अंतर भी सामने आया है। उदाहरण के लिए, MY अस्पताल के बोरवेल के पानी में बैक्टीरिया मिले। जबकि, नर्मदा बल्क कनेक्शन और छठी मंजिल के टैप का पानी इस स्तर पर दूषित नहीं पाया गया। इसी तरह पीसी सेठी अस्पताल के बोरवेल की तुलना में वहां के ग्राउंड फ्लोर RO का सैंपल बेहतर स्थिति में था।

पानी में कोलीफॉर्म और खासतौर पर E. coli की मौजूदगी स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है। E. coli का पाया जाना मलजनित संदूषण का संकेत हो सकता है। ऐसे पानी के सेवन से दस्त, पेट दर्द, उल्टी, मरोड़ और अन्य पाचन संबंधी संक्रमण हो सकते हैं। ज्यादा गंभीर स्थिति में डिहाइड्रेशन का खतरा भी रहता है।

अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए दूषित पानी की समस्या इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि उनमें से कई पहले से किसी बीमारी का उपचार करा रहे होते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों पर संक्रमण का असर अधिक हो सकता है।