जबलपुर: शिक्षा विभाग में करोड़ों का घोटाला, रिटायर्ड शिक्षकों के नाम पर गबन किए 1 करोड़ से ज्यादा रुपए, 14 पर FIR दर्ज

जबलपुर के पनागर में 1.11 करोड़ का घोटाला सामने आया है। मास्टरमाइंड अकाउंटेंट विजय भलावी ने फर्जी और रिटायर्ड शिक्षकों के नाम पर 8 साल तक वेतन निकाला।

Updated: Mar 21, 2026, 06:16 PM IST

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में शिक्षा विभाग के पनागर विकासखंड में करोड़ों रुपये के बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। यहां पदस्थ अकाउंटेंट ने फर्जी शिक्षकों के नाम पर सालों तक वेतन निकालकर शासन को भारी चूना लगाया था। मामले में तीन पूर्व शिक्षा अधिकारियों समेत कुल 14 लोगों के खिलाफ पनागर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश जारी है जो मामला सामने आते ही फरार हो गए हैं।

घोटाले का खुलासा तब हुआ जब कोष एवं लेखा विभाग भोपाल से जबलपुर कलेक्टर को सूचना मिली कि पनागर ब्लॉक में 2018 से अतिथि शिक्षकों के नाम पर वेतन निकाला जा रहा है। जांच में सामने आया कि जिन लोगों के नाम पर भुगतान किया गया उनमें कई रिटायर हो चुके थे। जबकि, कुछ ने कभी नौकरी ही नहीं की थी। कलेक्टर के निर्देश पर शिक्षा और लेखा विभाग की संयुक्त टीम गठित कर बैंक खातों की जांच की गई जिसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी उजागर हुई।

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जांच में पाया गया कि पनागर बीईओ कार्यालय में पदस्थ अकाउंटेंट विजय कुमार भलावी इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड था। वह शिक्षकों की सूची में फर्जी नाम जोड़ता था और उनके नाम पर जारी वेतन राशि को अपने लॉगिन पासवर्ड के जरिए निकालकर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर देता था। यह फर्जीवाड़ा लंबे समय तक बेहद सुनियोजित तरीके से चलता रहा था। जिससे विभाग के अन्य अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी थी।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि 2016 से पनागर ब्लॉक में पदस्थ भलावी ने 2018 से 2026 के बीच लगातार इस घोटाले को अंजाम दिया। इस दौरान तीन शिक्षा अधिकारी शैलबाला डोंगरे, त्र्यंबक गणेश खरे और नरेंद्र तिवारी के कार्यकाल में उनके लॉगिन का इस्तेमाल कर रकम निकाली गई और करीब 16 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की गई।

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बैंक खातों की पड़ताल में आरोपी अकाउंटेंट के साथ-साथ उसके परिवार के सदस्यों के खातों में भी भारी रकम मिली। उसकी पत्नी और दो बेटियों के खातों में लाखों रुपये जमा पाए गए थे। इसके अलावा जयंती भलावी, माधुरी भलावी, रागिनी भलावी, रानू भलावी, समीर कोष्ठा, माला कोष्ठा, अंकुश नेमा और पूर्व अतिथि शिक्षक सुचित्रा पटेल के खातों में भी रकम ट्रांसफर की गई थी। कुल मिलाकर करीब 1 करोड़ 11 लाख रुपये का लेन-देन सामने आया है।

बताया जा रहा है कि कोषलेखा विभाग में वित्तीय मिलान के दौरान गड़बड़ी पकड़ी गई। जिसके बाद मामला कलेक्टर तक पहुंचा और जांच शुरू हुई। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और सभी आरोपियों की तलाश में जुटी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस घोटाले में और कौन-कौन शामिल हो सकता है।

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