दिल्ली-NCR समेत पूरे उत्तर भारत में बारिश, मार्च में बदले मौसम के पैटर्न से वैज्ञानिक चिंतित
दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण मार्च में रिकॉर्ड बारिश हुई है। तापमान में 7 डिग्री तक गिरावट आई है और ठंड का अहसास बढ़ा है। मौसम के अचानक बदलने से वैज्ञानिक काफी चिंतित हैं।
नई दिल्ली। दिल्ली एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में पिछले कुछ दिनों से रुक रुककर हो रही बारिश ने मौसम का रुख पूरी तरह बदल दिया है। राजधानी दिल्ली में इस बार मार्च में हुई बारिश ने तीन साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। जिसकी वजह से तापमान में करीब 7 डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है।
पिछले दो तीन दिनों से जारी बारिश के कारण लोगों को अचानक गर्मी से राहत मिली है और ठंड जैसा एहसास लौट आया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, दिल्ली में आज दिनभर हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज चमक की संभावना बनी हुई है। अधिकतम तापमान 25 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। जो कि इस समय के सामान्य तापमान से काफी कम है। विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि अगले दो दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। जबकि, 22 मार्च के आसपास एक और वेस्टर्न डिस्टुबेंस सक्रिय हो सकता है।
मौसम में इस अचानक बदलाव के पीछे मुख्य वजह एक सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस है जो इस समय उत्तरी पाकिस्तान के ऊपर बना हुआ है। यह सिस्टम ऊपरी हवा में बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन के रूप में काम कर रहा है। इसके कारण उत्तर पश्चिम भारत में व्यापक बारिश हो रही है। इसके प्रभाव से 40 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल रही हैं और कई इलाकों में ओलावृष्टि भी दर्ज की गई है। वहीं, हिमालयी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बर्फबारी का दौर जारी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार का वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सामान्य से अलग व्यवहार कर रहा है। आमतौर पर ऐसे सिस्टम दिसंबर से फरवरी के बीच सक्रिय रहते हैं और मार्च के अंत तक कमजोर पड़ जाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि जेट स्ट्रीम उत्तर की ओर खिसक जाती है। हालांकि, इस बार यह सिस्टम एक लंबी ट्रफ के रूप में विकसित हुआ है। जिसने भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान तक लगभग 1,000 किलोमीटर लंबी वर्षा पट्टी बना दी है। जो कि इस मौसम में दुर्लभ मानी जाती है।
इस सिस्टम को ताकत देने में समुद्री नमी की अहम भूमिका है। भूमध्य सागर, कैस्पियन सागर, काला सागर (ब्लैक सी) और फारस की खाड़ी से आने वाली नमी के साथ-साथ अरब सागर से मिलने वाली अतिरिक्त नमी ने इसे और प्रभावी बना दिया है। जिसकी वजह से बारिश का दायरा और तीव्रता दोनों बढ़ गए हैं।
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह के असामान्य मौसम बदलाव अब धीरे-धीरे सामान्य होते जा रहे हैं। पहले जहां वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर फरवरी तक सीमित रहता था वहीं अब इसकी सक्रियता मार्च के अंत और कभी-कभी अप्रैल तक भी देखी जा रही है। विशेषज्ञ इसे ग्लोबल वार्मिंग और सबट्रॉपिकल जेट स्ट्रीम के देर से पीछे हटने का संकेत मान रहे हैं। जो कि आने वाले समय में मौसम की अनिश्चितता को और बढ़ा सकता है।




