MP में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का कहर, 42 जिलों में फसलें बर्बाद, किसानों को भारी नुकसान
मध्य प्रदेश में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई है। 42 जिलों में तेज आंधी के साथ गिरे ओलों से गेहूं, चना और सरसों की फसलें बर्बाद हो गई हैं।
मध्य प्रदेश में अचानक बदले मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार को प्रदेश के करीब 42 जिलों में तेज आंधी, बारिश और कई इलाकों में ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी और कटाई के लिए तैयार फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। मालवा-निमाड़, ग्वालियर-चंबल, महाकौशल और बुंदेलखंड अंचल सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। यहां गेहूं, चना, मक्का, मटर और सरसों की फसलें प्रभावित हुई हैं। मौसम में आए इस बदलाव से तापमान में 3 से 10 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है।
मालवा-निमाड़ क्षेत्र में गुरुवार रात से ही मौसम ने करवट ली। बड़वानी में अंगूर के आकार के ओले गिरने से गेहूं, चना और मक्का को व्यापक नुकसान हुआ। जबकि, धार के बदनावर क्षेत्र में करीब 59,600 हेक्टेयर में बोई गई गेहूं की फसल प्रभावित हुई है। किसानों का अनुमान है कि यहां 10 से 15 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है। आगर में कटाई के बाद खेतों में रखी फसल भीगने से दानों की गुणवत्ता खराब होने की आशंका है। जिसकी वजह से समर्थन मूल्य पर खरीदी प्रभावित हो सकती है। खरगोन में तेज हवाओं के कारण मक्का की फसल खेतों में गिर गई। जबकि, रतलाम, देवास और बुरहानपुर में नुकसान सीमित रहा और नीमच में असर नहीं के बराबर बताया गया है।
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ग्वालियर-चंबल अंचल में भी गुरुवार शाम से शुक्रवार सुबह तक बारिश का असर रहा था। यहां 2.2 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। जिसकी वजह से तापमान में 10.6 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आई थी। शिवपुरी, श्योपुर, दतिया और आसपास के इलाकों में तेज हवाओं और बारिश के कारण खेतों में खड़ी गेहूं और चने की फसलें जमीन पर बिछ गई थी। श्योपुर के विजयपुर क्षेत्र में चने के आकार के ओले गिरे थे। जबकि, दतिया में शाम के बाद तेज बारिश से खेतों में जलभराव की स्थिति बन गई थी।
दतिया जिले में मौसम के इस बदलाव का सबसे अधिक असर उदगंवा और नौनेर क्षेत्रों में देखा गया। यहां खेतों में पानी भर गया और फसलें गिरकर खराब होने लगी। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति में उत्पादन में 10 से 15 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। लगातार नमी रहने से दानों के सड़ने और गुणवत्ता खराब होने का खतरा बढ़ गया है। इसकी वजह से बाजार में किसानों को कम कीमत मिल सकती है। हालांकि, प्रशासन ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ओलावृष्टि के वीडियो को भ्रामक बताते हुए स्पष्ट किया है कि जिले में कहीं भी ओले नहीं गिरे।
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महाकौशल और विंध्य क्षेत्र के सिवनी, डिंडौरी, दमोह और मंडला जिलों में भी ओलावृष्टि और बारिश से फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है। दमोह के बटियागढ़ क्षेत्र में मटर के आकार के ओले गिरे। जबकि, जबलपुर में तेज आंधी और गरज-चमक के साथ हुई बारिश से ग्रामीण इलाकों में गेहूं की तैयार फसल खेतों में बिछ गई। अनूपपुर में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है।
मौसम विभाग के अनुसार, धार के बदनावर और बैतूल के घोड़ाडोंगरी में सर्वाधिक 18 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। जबकि, बड़वानी, भोपाल, दमोह और मुलताई में 12 मिमी से अधिक बारिश हुई थी। ओलावृष्टि का असर टीकमगढ़, खजुराहो, पन्ना, शिवपुरी और विदिशा समेत कई जिलों में देखा गया था। तेज हवाओं ने भी हालात बिगाड़े हैं। आगर-मालवा में हवा की गति 74 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई थी। जबकि, भोपाल और इंदौर में 40 किमी प्रति घंटा दर्ज की गई थी।
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