जी भाईसाहब जीः बीजेपी के सत्ता संतुलन से ज्योतिरादित्य सिंधिया को चोट

MP Politics: घर के एक कोने में फटाके फूट रहे हैं, उत्सव मनाया जा रहा है लेकिन दूसरे कोने में इससे मायूसी छाई हुई ऐसा ही कुछ ग्वालियर बीजेपी में हो रहा है। वहां उत्सव का माहौल है लेकिन राजनीतिक रूप से यह ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए झटके की तरह देखा जा रहा है। 

Updated: Mar 25, 2026, 07:11 PM IST

बीजेपी ने लंबे इंतजार के बाद निगम मंडल में नियुक्तियां शुरू हो गई हैं। पहला पद ग्वालियर के हिस्से में आया है। बीजेपी के खांटी नेता पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। पहली नियुक्ति ग्वालियर से होने के भी राजनीतिक मायने है। 2020 में कांग्रेस से बीजेपी में आने के बाद ग्वालियर बीजेपी में ज्योतिरादित्य सिंधिया नए शक्ति केन्द्र के रूप में उभरे हैं। 2020 के पहले भी बीजेपी में राजमाता विजयाराजे सिंधिया, यशोधरा राजे सिंधिया बीजेपी की सूत्रधार थी लेकिन कई नेता थे जो महल का विरोध कर अपनी राजनीति को धार दे रहे थे।

इन नेताओं में जयभान सिंह पवैया भी है। उनकी पूरी राजनीति महल यानी सिंधिया परिवार का विरोध करने पर केंद्रित रही है। ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा समर्थकों को बीजेपी में ज्यादा महत्व मिलने से क्षेत्र के कई नेता नाराज हैं। वे खुद को नजरअंदाज किया जाना महसूस कर रहे हैं। इसलिए हाशिए पर चल रहे जयभान सिंह पवैया की मेन स्ट्रीम में वापसी ग्वालियर−चंबल क्षेत्र की राजनीति को संतुलन देना है। इससे बिजली मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर और प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट के कारण ग्वालियर में बढ़ती सिंधिया की ताकत पर अंकुश माना जा रहा है। जयभान सिंह पवैया को पद नाराज गुट को प्राथमिकता देना माना गया। 

दूसरी तरफ, नाम की सियासत भी वर्चस्व का कारण बन गई है। सिंधिया समर्थक चाहते हैं कि माधवराव सिंधिया के ग्वालियर में रेलवे सहित अन्य योगदान को याद करते हुए स्टेशन का नामकरण पूर्व रेल मंत्री माधवराव सिंधिया के नाम पर किया जाना चाहिए। यह संभव भी हो जाता लेकिन सांसद भारत सिंह कुशवाह ने संसद में मांग रख दी है कि सौंदर्यीकरण के बाद ग्वालियर रेलवे स्टेशन का नाम अटल जी के नाम पर होना चाहिए। इस मांग का टेबल थपथपा कर संसद में स्वागत किया गया। सांसद भारत सिंह कुशवाह पिछले कुछ समय से ज्योतिरादित्य सिंधिया की कार्य प्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। वे विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के समर्थक हैं तथा उनके विरोध को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया व विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के बीच वर्चस्व के टकराव के रूप में देखा जा रहा है। 

ग्वालियर क्षेत्र की राजनीति में की इन दो घटनाओं का असर सत्ता संतुलन की तरह देखा जाना एक पहलू है। दूसरा व्यापक असर ज्योतिरादित्य सिंधिया को मिली राजनीतिक और मानसिक चोट माना जा रहा है। एक तरफ, राजनीतिक क्षति है कि धुर विरोधी नेता जयभान सिंह पवैया पद पा गए हैं जबकि पिता के नाम पर स्टेशन का नामकरण करने की मुहिम कैसे परवान चढ़ेगी जब सामने अटली जी का नाम होगा। इस बीच कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने रानी 'मृगनयनी' के नाम पर स्टेशन का नाम रखने की मांग कर दी है। साफ है कि नामकरण अब आसान कार्य नहीं रह गया है। इसपर भरपूर राजनीति होगी।  

मोदी का बखान, शिवराज का राजनीतिक अंदाज

पीएम मोदी ने सत्ता में रहने के 8931 दिन पूरे किए तो सभी ने अपनी अपनी तरह से बधाई दी। केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सहित अन्य नेताआं ने ट्वीट किए गए मगर शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कांफ्रेंस में पीएम मोदी की शान में कसीदे पढ़े। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मैं बड़ी दुविधा में हूं, प्रधानमंत्री जी ने सरकारों के मुखिया रहते हुए 22 मार्च, 2026 को अपने 8,931 दिन पूरे किए और मैं इतने लंबे समय की चर्चा 20-25 मिनट में कैसे करूं, क्योंकि मोदी जी एक व्यक्ति नहीं विचार हैं। परिश्रम की पराकाष्ठा के बड़े उदाहरण हैं प्रधानमंत्री। उन्होंने देश के लिए कैसे काम किया है ये बहुत महत्वपूर्ण हैं। देश धन्य हैं जो मोदी जी जैसा नेता मिला। 

इसके पहले संसद में मोदी की प्रशंसा का वीडियो वायरल हुआ था। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का यह राजनीतिक अंदाज चर्चा में है। सोशल मीडिया पर दिलचस्प कमेंट आ रहे हैं। क बार फोटो व वीडियो वायरल कर बताया गया कि पीम मोदी उनके किसी भी जेस्चर पर रिएक्शन नहीं देते हैं। लेकिन शिवराज सिंह चौहान पीएम मोदी की प्रशंसा का कोई मौका नहीं छोड़ते। शायद इस उम्मीद में कि कभी तो वक्त आयेगा, कभी तो वे मुस्कुराएंगे।

बीजेपी एमएलए अड़े, सरकार के खिलाफ तो बोलूंगा  

हाल में कई मौके आए हैं जब बीजेपी के नेताओं खासकर विधायकों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। विधानसभा व इसके बाहर भी पार्टी के लिए मुसीबत खड़ी करने वाले इन विधायकों व नेताओं को संगठन ने तलब कर समझाइशा दी है। अधिकांश नेताओं ने संगठन की फटकार के बाद चुप्पी भी साध ली लेकिन इस बार मामला उलटा है। अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे लहार से बीजेपी विधायक अंबरीश शर्मा ने संगठन की बात मानने से इंकार कर दिया है।

 विधायक अंबरीश शर्मा का आरोप है कि कांग्रेस नेता गोविंद सिंह की कोठी की वजह से दलित बस्ती का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है और प्रशासन विपक्षी दबाव में कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। इस रास्ते को खुलवाने के लिए स्थानीय लोग धरने पर बैठे हैं। उनके समर्थन में रविवार को खुद विधायक भी धरने पर बैठ गए थे। उन्होंने मंच से सरकार की नीतियों को कोसा था। बात भोपाल पहुंची तो संगठन ने विधायक अंबरीश शर्मा को बुला कर बात की। प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलावाल से मुलाकात के बाद विधायक अंबरीश शर्मा ने साफ कर दिया है कि जब तक बात नहीं मानी जाती है उनकी यह लड़ाई जारी रहेगी। 

टैलेंट हंट से चर्चा में कांग्रेस 

मध्य प्रदेश कांग्रेस इन दिनों टैलेंट हंट से चर्चा में है। विचारधारा और विभिन्न मुद्दों पर दमदार और प्रभावी तरीके से पार्टी की बात रखने के लिए युवाओं की खोज शुरू हो चुकी है। ग्वालियर के बाद भोपाल के कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में दूर-दराज से पार्टी प्रवक्ता, रिसर्च कोऑर्डिनेटर और मीडिया कोऑर्डिनेटर बनने के लिए पहुंचे। इस प्रकिया के माध्यम से 20 राज्य प्रवक्ता, कई मीडिया पैनलिस्ट, मंडल और जिला स्तर पर दो-दो प्रवक्ता चुने जाएंगे। इसके अलावा दो राष्ट्रीय स्तर के पैनलिस्ट और एक विशेष अंग्रेजी मीडिया पैनलिस्ट को भी चुना जाएगा। कांग्रेस की विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता, समकालीन मुद्दों पर अध्ययन, शोध क्षमता, वाकपटुता, मीडिया प्रबंधन, संगठनात्मक अनुशासन आदि के मानदंडों के आधार पर युवा का चुनाव किया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाया जा सके।.पार्टी खुश है कि युवा जुड़ने में उत्साह दिखा रहे हैं। पॉलिटिकल पार्टी के लिए यह चर्चा और उत्साह मायने रखता है।