MP बोर्ड परीक्षा नियमों में बदलाव, परीक्षार्थियों के अभिभावक नहीं बन सकेंगे पर्यवेक्षक

माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा 10 फरवरी से शुरू होगी। नकल और पेपर लीक रोकने केंद्राध्यक्ष चयन प्रक्रिया बदली गई है।

Updated: Jan 20, 2026, 11:18 PM IST

भोपाल। माध्यमिक शिक्षा मंडल की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 10 फरवरी से शुरू होने जा रही हैं। नकल, प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा में गड़बड़ी पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए इस बार बोर्ड ने परीक्षा व्यवस्था में बड़े और सख्त बदलाव किए गए हैं। सबसे अहम बात यह है कि परीक्षा कार्य से जुड़े हर स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही तय की गई है।

इस बार जिन शिक्षकों या अधिकारियों के बच्चे बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे उन्हें किसी भी परीक्षा केंद्र पर केंद्राध्यक्ष या पर्यवेक्षक नहीं बनाया जाएगा। इसके साथ ही गंभीर बीमारी से पीड़ित कर्मचारियों को भी परीक्षा ड्यूटी से दूर रखा जाएगा। हायर सेकेंडरी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की ड्यूटी उनके ही विषय के प्रश्नपत्रों में पर्यवेक्षक के रूप में नहीं लगाई जाएगी ताकि किसी भी तरह की अंदरूनी मदद या पक्षपात की गुंजाइश न रहे।

केंद्राध्यक्ष और सहायक केंद्राध्यक्षों की नियुक्ति प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब यह जिम्मेदारी विकासखंड स्तर पर नहीं होगी। इसके बजाय पूरे जिले के शिक्षकों और प्राचार्यों की एक संयुक्त जिला स्तरीय सूची तैयार की जाएगी। इस सूची को जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति से अनुमोदन दिलाया जाएगा। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी इस सूची को जिला सूचना विज्ञान केंद्र को भेजेंगे।

एनआईसी में पहले से निर्धारित परीक्षा केंद्रों की सूची और शिक्षकों की सूची को एक विशेष सॉफ्टवेयर में डाला जाएगा। यह सॉफ्टवेयर रैंडम पद्धति से किसी शिक्षक या प्राचार्य को जिले के किसी भी परीक्षा केंद्र से जोड़ देगा और उसे केंद्राध्यक्ष या सहायक केंद्राध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपेगा। अधिकारियों के अनुसार, इस व्यवस्था से किसी खास केंद्र पर मनपसंद पोस्टिंग या अधिकारियों से सिफारिश कर नजदीकी केंद्र लेने जैसी प्रवृत्ति पर पूरी तरह रोक लगेगी जो पिछले कुछ सालों में बार-बार सामने आती रही है।

माध्यमिक शिक्षा मंडल ने यह भी साफ किया है कि जिन परीक्षा केंद्रों पर पिछले कुछ सालों में सामूहिक नकल की घटनाएं सामने आई हैं वहां उस समय तैनात रहे केंद्राध्यक्षों को इस साल दोबारा यह जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। गोपनीयता भंग करने, परीक्षा कार्य में गंभीर लापरवाही बरतने या नियमों की अनदेखी करने वाले केंद्राध्यक्ष, सहायक केंद्राध्यक्ष, शिक्षक या अन्य कर्मचारियों को पांच साल के लिए परीक्षा ड्यूटी से दूर रखा जाएगा। इसके अलावा मंडल परीक्षा कार्य से पहले से डिबार किए गए शिक्षक और प्राचार्य पूरी तरह अपात्र माने जाएंगे।

बोर्ड ने परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्रों के वितरण, उत्तरपुस्तिकाओं की सुरक्षा और परीक्षा संचालन की हर प्रक्रिया में तय प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। परीक्षा नियंत्रक बलवंत वर्मा के मुताबिक, परीक्षा के हर चरण पर निगरानी रखी जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।