MP: सिंध नदी में अवैध रेत खनन पर NGT सख्त, जमीनी हकीकत का पता लगाने कमेटी गठित
सिंध नदी का यह क्षेत्र पर्यावरण और वन्यजीवों के लिहाज से बेहद संवेदनशील है, क्योंकि यह राष्ट्रीय चंबल (घड़ियाल) वन्यजीव अभ्यारण्य से पारिस्थितिक रूप से जुड़ा हुआ है।
भिंड। मध्य प्रदेश के भिंड और दतिया जिलों से गुजरने वाली सिंध नदी में धड़ल्ले से चल रहे अवैध रेत खनन को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी ने जमीनी हकीकत पता करने और कार्रवाई को लेकर एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी 6 हफ्ते में रिपोर्ट देगी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने इस संबंध में याचिका लगाई थी। इसपर सुनवाई करते हुए एनजीटी के न्यायिक सदस्य शेव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने मध्य प्रदेश सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने जमीनी हकीकत का पता लगाने और कार्रवाई की रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक उच्च स्तरीय संयुक्त समिति का गठन भी कर दिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), मध्य प्रदेश पर्यावरण विभाग के सचिव द्वारा नामित एक प्रतिनिधि और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) के प्रतिनिधि को शामिल कर एक संयुक्त समिति बनाई है। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस समिति के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है। ट्रिब्यूनल ने इस समिति को प्रभावित इलाकों का दौरा कर छह सप्ताह के भीतर अपनी तथ्यात्मक और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता डॉ. गोविंद सिंह की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने ट्रिब्यूनल को बताया कि चंबल-यमुना प्रणाली की प्रमुख सहायक नदी 'सिंध' में बड़े पैमाने पर भारी मशीनों और सक्शन-ड्रेजिंग उपकरणों से लैस नावों के जरिए नदी की मुख्य धारा के भीतर से रेत निकाली जा रही है। यह अवैध कारोबार भिंड जिले के 18 और दतिया जिले के 6 गांवों में खुलेआम चल रहा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिना किसी वैध जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (DSR) या पर्यावरण मंजूरी के निकाली जा रही इस रेत को बिना वैध ट्रांजिट परमिट के मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जा रहा है। इस मामले में पुलिस की संलिप्तता को लेकर एक प्रारंभिक सतर्कता (विजिलेंस) जांच भी शुरू हो चुकी है।
सुनवाई के दौरान यह दलील भी दी गई कि मध्य प्रदेश सरकार पूर्व में एनजीटी द्वारा 'गीता उर्फ लक्ष्मी मीणा बनाम मध्य प्रदेश राज्य' मामले में तय किए गए सुरक्षात्मक दिशा-निर्देशों को इन जिलों में लागू करने में पूरी तरह विफल रही है। इन नियमों के तहत जिला स्तरीय टास्क फोर्स का गठन, पीरियोडिक निरीक्षण, वार्षिक पुनर्भरण अध्ययन (Annual Replenishment Study) और अवैध वाहनों पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान है, जिसका पालन नहीं किया जा रहा है।
बता दें कि सिंध नदी का यह क्षेत्र पर्यावरण और वन्यजीवों के लिहाज से बेहद संवेदनशील है, क्योंकि यह राष्ट्रीय चंबल (घड़ियाल) वन्यजीव अभ्यारण्य से पारिस्थितिक रूप से जुड़ा हुआ है। यह नदी मगरमच्छों, प्रवासी पक्षियों और गंभीर रूप से लुप्तप्राय भारतीय फ्लैपशेल कछुओं व घड़ियालों का प्रमुख प्रजनन स्थल है। अनियंत्रित और अवैध खनन के कारण नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है, जल प्रदूषण गंभीर रूप ले चुका है और इन दुर्लभ जलीय जीवों का प्राकृतिक आवास पूरी तरह नष्ट होने के कगार पर पहुंच गया है।




