ट्रेन के फर्स्ट AC में चूहों का आतंक, रिटायर्ड अफसर की नाक कुतरी, शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई

ऊना-इंदौर एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कोच में सफर कर रहे 78 वर्षीय रिटायर्ड अधिकारी की नाक सोते समय चूहे ने काट ली। परिजनों की शुरुआती शिकायत पर कार्रवाई न होने से यह हादसा हुआ।

Updated: Aug 24, 2026, 07:33 PM IST

इंदौर। चंडीगढ़ से इंदौर आ रही ऊना-इंदौर एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कोच में सफर कर रहे 78 वर्षीय रिटायर्ड अधिकारी एचपी करण की नाक चूहे ने काट ली। घटना उस वक्त हुई जब वह ट्रेन के एच 1 कोच के ए कैबिन में सो रहे थे। चंडीगढ़ से इंदौर लौट रहे बुजुर्ग यात्री के परिवार का दावा है कि सफर शुरू होने के कुछ समय बाद ही कोच में चूहा दिखाई दिया था और इसकी शिकायत रेलवे कर्मचारियों से की गई थी। इसके बावजूद रात करीब साढ़े 10 बजे चूहे ने सोते समय उनकी नाक काट ली। इंदौर पहुंचने के बाद परिजन उन्हें कोकिलाबेन अस्पताल ले गए जहां रेबीज से बचाव के लिए पहला इंजेक्शन लगाया गया।

परिजनों के मुताबिक, एचपी करण शनिवार को परिवार के साथ चंडीगढ़ से इंदौर आने के लिए ट्रेन नंबर 19308 ऊना हिमाचल एक्सप्रेस में सवार हुए थे। ट्रेन के फर्स्ट एसी कोच में बैठने के कुछ समय बाद ही परिवार को चूहा दिखाई दिया। बेटे विजय ने इसकी जानकारी रेलवे स्टाफ को दी। परिवार का कहना है कि कोच में गंदगी भी थी। शिकायत के बाद कर्मचारियों ने सफाई कर दी लेकिन चूहे को पकड़ने या पेस्ट कंट्रोल जैसी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद भी चूहा कोच में घूमता रहा था।

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रात करीब साढ़े 10 बजे एचपी करण अपनी सीट पर सो रहे थे। इसी दौरान चूहा उनके पास पहुंचा और उनकी नाक पर काट लिया। अचानक हुई घटना से परिवार के लोग घबरा गए और ट्रेन में ही रेलवे कर्मचारियों से मदद मांगी। शिकायत के बाद रेलवे की ओर से चिकित्सा सहायता की व्यवस्था की गई। ट्रेन के आगरा पहुंचने तक चिकित्सा दल ने बुजुर्ग का प्राथमिक उपचार किया और जरूरी दवाइयां दी।

इंदौर पहुंचने के बाद परिजन एचपी करण को सीधे निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने घाव का प्राथमिक उपचार किया और रेबीज से बचाव के लिए पहला इंजेक्शन लगाया। परिवार के मुताबिक, डॉक्टरों ने आगे भी चार इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी है।

पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि चूहे के काटने की घटना उस समय सामने आई जब ट्रेन आगरा मंडल क्षेत्र से गुजर रही थी। यात्री की शिकायत मिलने के बाद मामला आगरा मंडल को भेजा गया और वहां उसे प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराई गई। रेलवे अधिकारी के मुताबिक, ट्रेन के इंदौर से ऊना हिमाचल के लिए रवाना होने से पहले निर्धारित एंटी रोडेंट यानी चूहा नियंत्रण प्रक्रिया की गई थी। उस समय कोच में चूहे को लेकर कोई शिकायत नहीं मिली थी।

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मुकेश कुमार के अनुसार, ट्रेन में रोडेंट कंट्रोल नियमित रूप से किया जाता है। जबकि, पेस्ट कंट्रोल करीब 15 दिन के अंतराल पर होता है। उनका कहना है कि इंदौर से रवाना होने से पहले ट्रेन की साफ सफाई, मेंटेनेंस और चूहा नियंत्रण की प्रक्रिया पूरी की गई थी। रेलवे का अनुमान है कि यात्रा के दौरान किसी स्टेशन पर कोच का दरवाजा खुला रहने या किसी अन्य वजह से चूहा अंदर पहुंचा हो सकता है। अधिकारी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया है। रेलवे के मुताबिक, इंदौर से ऊना जाने के दौरान किसी यात्री ने चूहे की शिकायत नहीं की थी। जबकि, वापसी यात्रा में यह मामला सामने आया।

घटना के बाद फर्स्ट एसी जैसे प्रीमियम कोच की साफ सफाई और पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। खासकर इसलिए क्योंकि परिवार के अनुसार, सफर शुरू होने के कुछ समय बाद ही चूहा दिखाई दे गया था और इसकी सूचना रेलवे कर्मचारियों को भी दे दी गई थी। ऐसे में यात्रियों का सवाल है कि शुरुआती शिकायत के बाद केवल सफाई कराने के बजाय चूहे को हटाने के लिए तत्काल प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाया गया। इंदौर में चूहे के काटने की ऐसी घटना पहले भी सामने आ चुकी है। इससे पहले इंदौर एयरपोर्ट के टर्मिनल परिसर में भोपाल निवासी नीरज को चूहे ने काट लिया था। वह बेंगलुरु जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे थे।

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