केंद्रीय मंत्रियों के बंगलों के रेनोवेशन पर एक साल में खर्च हुए 92 करोड़ रुपये, RTI में बड़ा खुलासा

दिल्ली के लुटियंस बंगला जोन में केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी आवासों की मरम्मत और रखरखाव पर 2025-26 में रिकॉर्ड 92.35 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।

Updated: Aug 24, 2026, 01:30 PM IST

नई दिल्ली। लुटियंस दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी बंगलों के रखरखाव पर होने वाले खर्च सवालों के घेरे में है। केंद्रीय मंत्रियों के बंगले पर रखरखाव का खर्च 11 साल में 3 गुना बढ़ गया है। इसका सालाना खर्च 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड 92.35 करोड़ रुपये हो गया। यह 2014-15 में खर्च किए गए 27.47 करोड़ रुपये से तीन गुना से भी ज्यादा है। यह जानकारी RTI के जरिए हासिल की हुई है।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में आरटीआई के हवाले से बताया गया है कि केंद्र सरकार ने 2014-15 से 2025-26 के बीच इन कामों पर सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (CPWD) के जरिए कुल 547.68 करोड़ रुपये खर्च किए। CPWD ही मरम्मत, रेनोवेशन और रखरखाव का काम संभालता है।

अधिकारियों ने बताया कि 2025-26 में हुआ खर्च 2014 के बाद सबसे ज्यादा रहा। इसके पीछे महंगाई और मध्य दिल्ली में बड़े परिसरों में बने पुराने भवनों के रखरखाव की बढ़ती लागत को वजह बताया गया।
सूचना के अधिकार से मिली जानकारी पर आधारित आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 12 वर्षों में केंद्रीय मंत्रियों के आवासों के रखरखाव पर कुल 547.68 करोड़ खर्च किए गए हैं। 

कॉकरोच जनता पार्टी ने लुटियंस दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी बंगलों के रखरखाव पर होने वाले खर्च को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने कहा है कि जिस रकम को मंत्रियों के आलीशान सरकारी बंगलों के रखरखाव पर खर्च किया जा रहा है, उसका इस्तेमाल सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाएं सुधारने में किया जा सकता था।

कॉकरोच जनता पार्टी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि अपने शानदार बंगलों को ठीक करना बंद करो और स्कूलों को ठीक करो। ₹92 करोड़ = 10 नए विश्वस्तरीय सरकारी स्कूल। पैसा तो है, लेकिन इसे सरकारी स्कूलों पर खर्च करने की इच्छाशक्ति की कमी है।