बिहार में पकड़ा गया मंडला लूटकांड का मास्टरमाइंड, कारोबारी से दो करोड़ के जेवर छीनकर भागे थे लुटेरे

मंडला के आयुषी ज्वेलर्स लूटकांड में पुलिस को बड़ी सफलता मिली। बिहार से मास्टरमाइंड मो. खालिद समेत तीन आरोपी पकड़े गए। सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल डंप से सुराग मिला। दो करोड़ से ज्यादा की लूट को अंजाम दिया गया था।

Updated: Nov 29, 2025, 02:25 PM IST

मंडला। मध्य प्रदेश के मंडला के चर्चित आयुषी ज्वेलर्स लूटकांड में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। दो करोड़ से ज्यादा की लूट को अंजाम देने वाले गैंग के मास्टरमाइंड को बिहार से गिरफ्तार कर लिया गया है। मध्यप्रदेश पुलिस ने गुरुवार देर रात मुजफ्फरपुर पुलिस के साथ मिलकर सदर, बरूराज और पारू थाना क्षेत्रों में छापेमारी की और मास्टरमाइंड मो. खालिद समेत तीन आरोपी को घर दबोचा।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बरूराज थाना क्षेत्र के रामपुरवा अखाड़ा निवासी मो. खालिद, सदर थाना क्षेत्र के अतरदह वार्ड 31 का शशि कुमार और पारू के ग्यासपुर निवासी कृष्णा कुमार सिंह के रूप में हुई है। पुलिस ने घटना में उपयोग की गई खालिद की कार भी जब्त कर ली गई है। शुक्रवार को कोतवाली मंडला थाने के एसआई शफीक खान ने तीनों को 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में आवेदन दिया है। आरोपियों के मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। जबकि, लूटे गए सोने-चांदी के आभूषणों की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।

जांच में पता चला कि वारदात के बाद अपराधियों की दो कारें संदिग्ध हालत में दिखाई दीं। मोबाइल टावर लोकेशन और कई टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर वही दोनों कारें पाई गई जिसके जरिए पुलिस मो. खालिद तक पहुंची। खालिद की गिरफ्तारी के बाद शशि और कृष्णा को भी धर दबोचा। पुलिस के अनुसार 55 वर्षीय खालिद इस पूरी योजना का सूत्रधार था और उसने बिहार के साथ मध्यप्रदेश के अपराधियों को भी शामिल किया था। पूछताछ में उसने कई साथियों के नाम बताए हैं जिनकी तलाश में पांच विशेष टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।

एसडीपीओ पश्चिमी-1 सुचित्रा कुमारी ने बताया कि तीनों आरोपी पकड़े जा चुके हैं। हालांकि, अब तक जेवरात बरामद नहीं हुए हैं। खालिद के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जानकारी जुटाई जा रही है। पूछताछ में कृष्णा कुमार सिंह ने बयान दिया कि वह मजदूरी करता है और खालिद से मुलाकात के बाद इस काम में शामिल हुआ है। खालिद ने उसे बताया था कि मंडला की आयुषी ज्वेलर्स दुकान में करीब दो से ढाई किलो सोना रखा रहता है और इसे लूटकर बड़ी कमाई की जा सकती है।

जांच में सामने आया कि 17 नवंबर को खालिद अपनी कार से शशि और कृष्णा के साथ कटनी होते हुए जबलपुर और इंदौर पहुंचा और फिर मंडला आया। यहां पर उसने स्थानीय बदमाश पंकज ठाकुर, लवकुश, शनि, अजहर आदि से संपर्क किया। कृष्णा ने स्वीकार किया कि वारदात के दौरान जब दुकान मालिक आयुष सोनी ने विरोध किया तब उसने पिस्टल से गोली चलाई। यह हमला 20 नवंबर की शाम करीब 7.15 से 7.30 बजे के बीच हुआ था।

घटना के वक्त आयुषी ज्वेलर्स में अक्षांश सोनी और उनके भाई आयुष सोनी मौजूद थे। जबकि, कर्मचारी बॉबी यादव आभूषणों को दो बैग में भरकर दुकान बंद करने की तैयारी कर रहा था। जैसे ही बॉबी बैग लेकर बाहर खड़ी कार में रखने लगा उसी समय तेज रफ्तार से आई दूसरी कार दुकान के सामने रुकी। तीन हथियारबंद बदमाश उतरे और ड्राइवर कार में ही बैठा रहा। एक हमलावर ने बॉबी के सिर पर पिस्टल तानकर बैग जमीन पर रखने को मजबूर किया।

इसी दौरान दूसरा अपराधी दुकान में घुसा और अंदर रखा पूरा सोना-चांदी निकालने की धमकी दी। आयुष ने इसका विरोध किया तो बदमाश ने उसके बाएं पैर में घुटने के नीचे गोली दाग दी। आयुष लहूलुहान होकर गिर पड़ा। लुटेरे बैग उठाकर कार से फरार हो गए। बाद में बॉबी और अक्षांश ने घायल आयुष को जिला अस्पताल पहुंचाया जहां उसका इलाज किया गया। पुलिस का दावा है कि कई आरोपी अभी फरार हैं और गहनों की बरामदगी के लिए लगातार दबिश जारी है।