दफ्तर दरबारी: क्‍या आईएएस ने किया 65 लाख का घोटाला, अब क्या करेंगे सीएम मोहन यादव

MP Politics: मप्र के प्रशासनिक जगत और राजनीतिक केनवास पर इनदिनों आईएएस संतोष मिश्रा का बयान और उस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जारी हैं। प्रतिक्रियाएं निचले स्‍तर तक पहुंच गई है जबकि कर्मचारी संगठन में मतभेद ताकतवर पूर्व आईएएस पर 65 लाख के गबन के आरोपों तक पहुंच गए हैं।

Updated: Nov 30, 2025, 03:06 PM IST

आईएएस संतोष वर्मा के ब्राह्मण की बेटियों को लेकर दिए गए बयान पर विवाद का बवंडर उठा है तो इसकी आंच अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) के क्रियाकलापों तक पहुंच गई है। कर्मचारी नेता मुकेश मौर्य ने स्‍वयं को अजाक्स का वास्‍तविक प्रांतीय अध्यक्ष तथा आईएएस संतोष वर्मा को फर्जी अध्यक्ष बताया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि 20 साल से ज्यादा समय तक संगठन के संरक्षक रहे रिटायर्ड आईएएस जेएन कंसोटिया ने बिना अनुमति 65 लाख रुपए निकाल लिए हैं।

संगठन के भीतर छिड़ा सत्ता संघर्ष 29 जुलाई 2023 को सतह पर आया था जब ग्वालियर में मुकेश मौर्य को सर्वसम्मति से प्रांताध्यक्ष चुना गया था। अजाक्‍स के संरक्षक तत्‍कालीन वरिष्‍ठ आईएएस जेएन कंसोटिया ने मुकेश मौर्य के चयन को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। रजिस्ट्रार ने सुनवाई के बाद मौर्य की कार्यकारिणी को वैधता दी, फिर भी विवाद अदालत और संगठन दोनों में जारी है।

इस बीच कंसोटिया गुट ने आईएएस संतोष वर्मा को अजाक्‍स का प्रांतीय अध्‍यक्ष बना दिया। संगठन की बैठक में प्रांतीय अध्‍यक्ष संतोष वर्मा ने आरक्षण और ब्राह्मण की बेटी वाला बयान दिया। इसके बाद वे तथा उनके धड़े वाला अजाक्‍स संगठन निशाने पर आ गया है। अब संगठन के नियंत्रण और वित्तीय लेनदेन को लेकर दो गुट आमने-सामने हैं।

स्‍वयं को अजाक्‍स का प्रांतीय अध्‍यक्ष बता रहे मुकेश मौर्य ने कहा है कि संघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व अपर मुख्य सचिव जेएन कंसोटिया ने संगठन के एसबीआई टीटी नगर और बैंक ऑफ बड़ोदा की अरेरा कॉलोनी शाखा के खातों से 65 लाख रुपए अवैध रूप से निकाले हैं। प्रांतीय अध्यक्ष मुकेश मौर्य व पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ज्ञापन सौंपकर इस वित्तीय घोटाले की उच्चस्तरीय जांच करने तथा रिटायर्ड आईएएस कंसोटिया पर वैधानिक कार्रवाई और अजाक्स पर वैध आधिपत्य मौर्य को दिलाए जाने की मांग की है।

अजाक्‍स के प्रांतीय अध्‍यक्ष संतोष मौर्य के बयान के बाद अजाक्‍स के दूसरे धड़े ने लोहे को गर्म पा कर चोट कर दी है। अब गेंद सीएम मोहन यादव के पाले में हैं। उन पर है कि लगातार राजनीतिक हो रहे इस मामले पर वे क्या निर्णय लेते हैं। यही निर्णय कर्मचारियों की दलित राजनीति की दिशा तय करेगा।

ब्राह्मण बेटी पर आईएएस का बयान और गिरी हुई राजनीति

अजाक्स के कार्यक्रम में आरक्षण को लेकर दिए आईएएस संतोष वर्मा के बयान के बाद राजनीति गरमाई ही नहीं बल्कि निचले स्तर पर भी जा रही है। बयान के विरोध में ब्राह्मण नेता और संगठन ही नहीं दलित कर्मचारी भी मैदान में हैं। दूसरी तरफ आईएएस संतोष वर्मा पर दबाव को देखते हुए उनके समर्थन में भी प्रदर्शन हो रहे हैं। रविवार को जय आदिवासी संगठन (जयस) की ओर से इंदौर में बड़े प्रदर्शन की घोषणा की गई है। राजनीति का आलम यह है कि आईएएस संतोष वर्मा के समर्थन पर भी जयस में विवाद सामने आया है। जयस के प्रांतीय अध्‍यक्ष रविराज बघेल ने कहा कि जयस ने आईएएस संतोष वर्मा के बयान का समर्थन नहीं किया है। जो प्रदर्शन कर रहा है वह असंतुष्‍टों का दूसरा धड़ा है जिसे कुछ बरस पहले जयस से बाहर कर दिया गया था।

आईएएस संतोष वर्मा के पक्ष और विपक्ष में जारी प्रदर्शन और आक्रोश न केवल व्‍यापक हो रहा है बल्कि यह भाषायी मर्यादा भी खो रहा है। आईएएस संतोष वर्मा के बयान की भाषा पर आपत्ति है तो उनके जवाब में और निम्न स्तर की भाषा का इस्तेमाल हो रहा है। ब्राह्मण नेताओं ने तीखी भाषा में भर्त्‍सना की तो संगठनों ने बहन-बेटियों के सम्मान पर टिप्पणी करने वाले को सबक सिखाने के लिए 1,51,000 रुपये का पुरस्कार घोषित कर दिया। लोगों ने आईएएस के घर बेटा भेजने, मुंह काला करने सहित और निम्‍न स्‍तर की भाषा पर जा कर टिप्‍पणियां की। ब्रा‍ह्मण बेटी के अपमान से आहत लोगों ने बयान से आहत हो कर दूसरे वर्ग की बेटियों के लिए ‘घटिया’ किस्‍म की टिप्‍पणी की जा रही है। कन्‍या के अपमान से शुरू हुआ विरोध इतना राजनीतिक हो चुका है कि महिलाओं का अपमान करने करने से भी गुरेज नहीं किया गया।

कलेक्टर साहब क्यों हमारे महाराज को बदनाम करना चाहते हो?

केंद्रीय मंत्री ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया अपने क्षेत्र में थे। गुना में रेलवे ओवरब्रिज शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान सिंधिया समर्थक बीजेपी विधायक पन्नालाल शाक्य ने सिंधिया के सामने ही मंच से गुना कलेक्टर को चेतावनी देते हुए अपनी पी़ड़ा भी जाहिर कर दी। विधायक पन्नालाल शाक्य ने खाद वितरण केन्द्र पर हुई आदिवासी महिला की मौत के मामले पर नाराज दिखाई। उन्होंने पहले तो सिंधिया की ओर देखकर उनसे माफी मांगी फिर कहा कि यहां कलेक्टर बैठे हैं हम तो कलेक्टर से ही जवाब लेंगे कि यह राशन और खाद के लिए लंबी-लंबी लाइनें क्यों लग रही हैं? आपकी व्यवस्था कैसी है बताओ? क्यों हमारे सिंधिया को बदनाम करना चाहते हो? यह सब अव्यवस्थाएं सिंधिया के क्षेत्र में क्यों हो रही हैं, मैं कभी नहीं चाहूंगा कि यह सब यहां हो। उन्होंने कहा- जवाब नहीं दिया तो यहीं नहीं, विधानसभा में पूछेंगे!

विधायक के बयान के बाद कार्यक्रम में कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया था। बाद के दो दिनों में केंद्रीय मंत्री ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने अपने समर्थक विधायक पन्‍नालाल शाक्‍य के साथ मजाकिया व्‍यवहार कर उनकी नाराजगी को दूर करने की कोशिश की। मंत्री सिंधिया के हास परिहास के कारण विधायक पन्‍नालाल शाक्‍य की नाराजगी तो आई गई बात हो गई लेकिन उनका बयान एक सवाल छोड़ गया है।

सवाल यह कि जन प्रतिनिधियों के अपमान, उनकी अनुसनी करने के आरोपों के बाद क्या अफसरों की कार्यप्रणाली नेताओं को बदनाम कर रही है? बीजेपी विधायक पन्‍नालाल शाक्‍य ने कार्यक्रम में कहा था कि किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इस तरह की घटनाएं क्षेत्र में गलत संदेश देती हैं। बीजेपी विधायकों को डर सता रहा है कि अफसरों की कार्य प्रणाली नेताओं का नाम और काम दोनों बिगाड़ रही है।

इंदौर आरटीओ में पत्रकारों की पिटाई, बात कितनी दूर जाएगी?

इंदौर आरटीओ कार्यालय में सोमवार को एक टीवी चैनल के पत्रकार और कैमरामैन पर हमला कर उन्हें बंधक बना लिया गया। आरोप है कि आरटीओ कार्यालय में पदस्थ बाबू और होमगार्ड सैनिक ने बाहरी बदमाशों को बुलाकर दोनों की पिटाई करवाई, कैमरा छीनकर तोड़ दिया और जाने से रोके रखा। घटना के बाद पत्रकारों और संगठनों ने विरोध किया तो सरकार ने सख्‍ती दिखाई। प्रकरण में शामिल विभाग के बाबू को मुख्यालय अटैच किया गया है। आरोपियों पर मामला दर्ज किया गया है।

मगर मुद्दा सिर्फ पत्रकारों की पिटाई नहीं है। मुद्दा परिवहन विभाग में फैला भ्रष्टाचार भी है। वह भ्रष्‍टाचार जिसकी पोल पत्रकारों ने खबर के जरिए खोली थी। परिवहन विभाग में भ्रष्‍टाचार की कोई सीमा नहीं है। परिवहन विभाग के कांस्‍टेबल के पास से 92 करोड़ की सम्‍पत्ति मिल चुकी है। लावारिस कार में मिले 52 किलो सोने तथा 10 करोड़ केश का भी कोई मालिक नहीं मिला है।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने परिवहन विभाग के आरटीओ बैरियर की लूट पर 5 साल पहले 5 बार अलर्ट किया। एक कार्यक्रम में तो गडकरी ने परिवहन विभाग के कुछ अधिकारियों की तुलना चंबल के डाकुओं से कर दी थी।

आरटीओ का कमाल देखिए जिस काम के लिए पूरा डिजिटल सिस्टम बनाया गया है, वही काम आज भी दलाल की जेब में रहकर पूरा होता है। आम आदमी ऑनलाइन स्लॉट लेता है, ऑनलाइन फीस भरता है, ऑनलाइन दस्तावेज़ अपलोड करता है पर ऑफलाइन उसे फिर भी दलाल की दुकान तक जाना ही पड़ता है। परिवहन विभाग ममें यह व्यवस्था एक मूक सहमति पर चल रही है। इंदौर की घटना के बाद अब तक तो इस मूक सहमति को तोड़ने का कोई उपक्रम नहीं हुआ है।