जी भाईसाहब जी: मोहन यादव के कार्यक्रम में चोर जैसे बीजेपी नेता
MP Politics: स्थानीय स्तर पर मुख्यमंत्री का कार्यक्रम सबसे बड़ा इवेंट होता है। इसी में स्थानीय नेताओं की ब्रांडिंग और शक्ति प्रदर्शन होता है। अंदरूनी राजनीति में उठाने-गिराने का खेल भी ऐसे ही कार्यक्रमों में होता है। नीमच में भी ऐसा ही कुछ हुआ।
नीमच में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम के दौरान बीजेपी नेताओं की हालत चोरों जैसी हो गई। बीजेपी के बड़े-बड़े नेता आगे की कतार में बैठने के उत्साह से वीआईपी गेट पर पहुंचे थे मगर इन नेताओं को अंदर जाने से रोक दिया गया। पुलिस ने साफ कह दिया, नेताजी, लिस्ट में नाम नहीं है, अंदर नहीं जा सकते! कार्यकर्ताओं के सामने नेताओं किरकिरी हो गई। मामला प्रतिष्ठा से जुड़ गया। यहां-वहां फोन लगाए गए कि किसी तरह नाम जुड़ जाए। इस पर भी बात नहीं बनी तो नेताओं ने वीआईपी पांडाल के चोर रास्ते तलाशे लेकिन वहां भी पुलिसकर्मी तैनात थे।
पुलिस ने जिन्हें रोका वे छोटे कार्यकर्ता नहीं, बल्कि इलाके के बड़े चेहरे हैं। इनमें भाजपा नेता राकेश भारद्वाज, सुरेंद्र सेठी शामिल हैं। स्थानीय नेताओं के प्रवेश सूची बनाने में मुख्य भूमिका सांसद सुधीर गुप्ता, विधायक दिलीप सिंह परिहार व माधव मारू तथा नीमच जिला बीजेपी प्रभारी सुभाष पटेल ने निभाई। जाहिर है, अपनों को तवज्जो मिली और दूसरे नेताओं के नाम वीआईपी सूची से कट गए। नाम कटने से गुस्साए नेताओं की पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई। मगर धमकी, नाराजगी, आग्रह, निवेदन जैसे कोई तरीके काम नहीं आए और नेताओं को मन मसोस कर रह जाना पड़ा।
स्थानीय स्तर पर मुख्यमंत्री का कार्यक्रम सबसे बड़ा इवेंट होता है। इसी में स्थानीय नेताओं की ब्रांडिंग और शक्ति प्रदर्शन होता है। अंदरूनी राजनीति में उठाने-गिराने का खेल भी ऐसे ही कार्यक्रमों में होता है। यही कारण है कि वीआईपी गेट से प्रवेश के लिए नेताओं ने खूब जोर आजमाइश की लेकिन जब बात नहीं बनी तो चुपचाप चले गए।
कांग्रेस के किसान आंदोलन में भीड़ के मायने
रतलाम में किसानों और अन्य मुद्दों को लेकर जिला कांग्रेस ने महारैली का आयोजन किया। कलेक्ट्रेट घेरने के लिए आगे बढ़ रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का उपयोग किया। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच जमकर धक्का-मुक्की भी हुई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रोकने के लए बल प्रयोग हुआ। यह कवायद तो आमतौर पर हर प्रदर्शन के दौरान होती है लेकिन रतलाम के इस प्रदर्शन की चर्चा खासतौर से हो रही है।
इस खास चर्चा का कारण है प्रदर्शनकारियों की संख्या। रतलाम में कई सालों बाद कांग्रेस के प्रदर्शन में इतनी भीड़ दिखाई दी जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ। यह भीड़ केवल कांग्रेस की ताकत ही नहीं बता रही है बल्कि उससे ज्यादा किसानों की परेशानी दिखा रही है। मानसून के कारण ही नहीं किसान खाद एवं बीज के संकट तथा उनके अमानक होने, ई-केवाईसी और ई-टोकन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
भारतीय किसान संघ और किसान मोर्चा सहित बीजेपी के मुख्य संगठन में किसान नेताओं का बोलबाला है। ऐसे में भी किसानों की समस्याएं सरकार तक नहीं पहुंच पा रही है। यही कारण है कि जब कांग्रेस ने आह्वान किया तो रतलाम जैसे बीजेपी के गढ़ में बड़ी तादाद में किसान जुट गए। इस आंदोलन में जुटी भीड़ अचरज पैदा करने वाली है। अगर बीजेपी इसका अर्थ समझना चाहें तो यह भीड़ मैदानी स्थिति का आईना है।
बिना महामंत्री बीजेपी का संगठन
बीजेपी में संगठन महामंत्री का पद मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष के बराबर ताकतवर और महत्व का है। यह पद बीते छह माह से खाली है। जनवरी के अंत में संघ ने मध्य प्रदेश बीजेपी के संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा का मूल संगठन में वापस बुलाकर सह क्षेत्रीय बौद्धिक प्रमुख बना दिया था। उसके बाद से प्रदेश बीजेपी बगैर संगठन महामंत्री के चल रही है। फिलहाल यह जिम्मेदारी क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल बखूबी निभा रहे हैं। लगातार प्रवास करके वे संगठन में कसावट लाने का प्रयास कर रहे हैं। मतलब पद भले ही खाली है मगर उसका काम दिल्ली से भेजे गए प्रभारी देख रहे हैं।
इस देरी से एक संकेत यह भी जाता है कि केंद्रीय नेतृत्व ने इस पद को इतना महत्वहीन बना दिया है कि खाली होने से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। स्वाभाविक है कि इस देरी से वे नेतागण खुश हैं जिनके हाथ में निर्णय क्षमता आ गई है। मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष मिल कर निर्णय ले रहे हैं, संगठन महामंत्री का तीसरा कोण साइलेंट है। हाल ही में राजस्थान बीजेपी में संगठन महामंत्री की नियुक्ति होने के बाद अब मध्य प्रदेश में भी जल्द घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है। खबरों में कहा जा रहा है कि संघ के छह वरिष्ठ प्रचारक इस पद की दौड़ में शामिल हैं। इनमें दिनकर राव सबनीस, अभय महाजन, अखिलेश मिश्रा, राजमोहन, विमल गुप्ता और निखलेश महेश्वरी प्रमुख हैं। दिनकर राव सबनीस हाल ही में ग्राहक पंचायत की जिम्मेदारी से मुक्त हुए हैं। उन्हें मध्य प्रदेश की राजनीति और संगठन की गहरी समझ रखने वाला प्रचारक माना जाता है, इसलिए उनका नाम सबसे आगे माना जा रहा है। अंदरखाने की खबर है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार और नितिन नबीन की कार्यकारिणी गठन के उपरांत संगठन महामंत्री की घोषणा होगी।
बीना विधायक निर्मला सप्रे को राहत
उसी को जीने का हक़ है जो इस ज़माने में
इधर का लगता रहे और उधर का हो जाए।
मशहूर शायर वसीम बरेलवी का यह शेर बीना विधायक निर्मला सप्रे के किरदार का बताता है। निर्मला सप्रे कांग्रेस के टिकट से चुन कर विधानसभा में पहुंची। फिर लोकसभा चुनाव के समय बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली। वे बीजेपी के कार्यक्रमों तथा पार्टी के संगठनात्मक कार्यक्रमों में भी दिखाई दी हैं लेकिन वे दस्तावेजों में कांग्रेस विधायक ही हैं।
जब वे कांग्रेस के पाले का छोड़ बीजेपी के साथ दिखाई देने लगी तो नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा सचिवालय में शिकायत की। विधानसभा में निर्णय 2 साल से लंबित है। इसबीच कार्रवाई की मांग को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हाई कोर्ट की शरण ली। अब सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कह दिया है कि मामला विधानसभा में लंबित है। पहला फैसला तो वहीं होगा। अब विधानसभा अध्यक्ष कब फैसला करेंगे इसकी कोई खबर नहीं है। विधानसभा में मामला लंबित है और कोर्ट से विधायक निर्मला सप्रे को राहत मिल गई है। आधा कार्यकाल गुजर गया। आधा और गुजर जाएगा। किसी को खबर नहीं है कि निर्मला सप्रे बीजेपी के साथ या कांग्रेस की विधायक। नियमों के जाल में उलझ कर ईमानदारी, पारदर्शिता औंधे मुंह गिर पड़ी है।




